धार्मिक कार्यों के प्रबंध की स्वतंत्रता
त्वरित सारांश (TL;DR)
धार्मिक कार्यों के प्रबंध की स्वतंत्रता: प्रत्येक धार्मिक संप्रदाय को धार्मिक व धर्मार्थ संस्थाओं की स्थापना करने, अपने धर्म विषयक कार्यों का प्रबंधन करने और संपत्ति रखने का अधिकार देता है।
सरल नागरिक भाषा में अर्थ
जहां अनुच्छेद 25 व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करता है, वहीं अनुच्छेद 26 धार्मिक संप्रदायों के सामूहिक अधिकारों की रक्षा करता है। लोक व्यवस्था, सदाचार और स्वास्थ्य के अधीन रहते हुए प्रत्येक धार्मिक संप्रदाय को मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च या धर्मार्थ ट्रस्ट स्थापित करने, अपने धार्मिक अनुष्ठानों का प्रबंधन करने और कानून के अनुसार संपत्ति का प्रशासन करने का अधिकार है।
यह आपको क्या अधिकार देता है?
मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च, मठ और धर्मार्थ ट्रस्ट स्थापित करने व चलाने का सामूहिक अधिकार
अपने आवश्यक धार्मिक रीति-रिवाजों का प्रबंधन करने की स्वायत्तता (अनुच्छेद 26(b))
धार्मिक व धर्मार्थ कार्यों के लिए चल-अचल संपत्ति अर्जित करने का संवैधानिक हक
अपवाद एवं युक्तियुक्त निर्बंधन (सीमाएं)
धार्मिक ट्रस्टों के वित्तीय और धर्मनिरपेक्ष प्रशासन (Secular Administration) में भ्रष्टाचार या कुप्रबंधन रोकने के लिए सरकार कानून बना सकती है।
दैनिक जीवन में यह क्यों महत्वपूर्ण है?
यह सामुदायिक पूजा स्थलों और धर्मार्थ संस्थाओं की आध्यात्मिक स्वायत्तता और वित्तीय पारदर्शिता के बीच संतुलन बनाता है।
और गहराई से पढ़ना चाहते हैं? आधिकारिक राजपत्रित मूल पाठ या सुप्रीम कोर्ट निर्णय व संविधान सभा बहस देखें: