आपातकालीन नागरिक हेल्पलाइन

अनुच्छेद 29 Part III ★ मौलिक अधिकार — नागरिक सुरक्षा कवच

अल्पसंख्यक-वर्गों के हितों, भाषा, लिपि और संस्कृति का संरक्षण

त्वरित सारांश (TL;DR)
भाषा, लिपि और संस्कृति का संरक्षण: भारत के प्रत्येक नागरिक वर्ग को अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति को सुरक्षित रखने का अधिकार देता है और सरकारी सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में दाखिले में भेदभाव पर रोक लगाता है।
अनुच्छेद 29 भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता का रक्षक है। अनुच्छेद 29(1) के अनुसार, भारत के किसी भी भाग में रहने वाले नागरिकों के किसी भी अनुभाग को, जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाए रखने का पूर्ण मौलिक अधिकार है। अनुच्छेद 29(2) स्पष्ट करता है कि राज्य द्वारा पोषित या सरकारी सहायता पाने वाले किसी भी स्कूल/कॉलेज में किसी भी नागरिक को धर्म, मूलवंश, जाति या भाषा के आधार पर प्रवेश से वंचित नहीं किया जाएगा।
अपनी मातृभाषा, लिपि (जैसे देवनागरी, बांग्ला, गुरुमुखी, तमिल, ओल चिकी आदि) और लोक संस्कृति को सहेजने व आगे बढ़ाने का अधिकार (अनुच्छेद 29(1))
अपनी भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए शांतिपूर्ण अभियान चलाने का संवैधानिक हक
सरकारी या सरकारी सहायता प्राप्त किसी भी शिक्षण संस्थान में धर्म, जाति या भाषा के भेदभाव के बिना प्रवेश पाने का अधिकार (अनुच्छेद 29(2))
अनुच्छेद 29(1) केवल अल्पसंख्यकों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के नागरिकों के "किसी भी वर्ग" को अपनी भाषा और संस्कृति बचाने का अधिकार देता है।
यह सुनिश्चित करता है कि भारत में किसी भी समुदाय की मातृभाषा को मिटाया न जा सके और किसी छात्र को उसकी भाषा या जाति के कारण कॉलेज में दाखिले से रोका न जा सके।
और गहराई से पढ़ना चाहते हैं? आधिकारिक राजपत्रित मूल पाठ या सुप्रीम कोर्ट निर्णय व संविधान सभा बहस देखें:
Copied to clipboard!
EN-IN • STUDIO VOICE
Preparing studio neural voice...