नए राज्यों का निर्माण और वर्तमान राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन
त्वरित सारांश (TL;DR)
अनुच्छेद 3 (नए राज्यों का निर्माण और वर्तमान राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन): Part I के अंतर्गत भारत के राज्यक्षेत्र और राज्यों के गठन/सीमाओं का संवैधानिक नियम।
सरल नागरिक भाषा में अर्थ
संविधान के Part I (संघ और उसका राज्यक्षेत्र) में स्थित अनुच्छेद 3 'नए राज्यों का निर्माण और वर्तमान राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन' का प्रावधान करता है। यह अनुच्छेद संसद को राज्यों के प्रवेश, पुनर्गठन और पहली तथा चौथी अनुसूची में आवश्यक संशोधनों की वैधानिक प्रक्रिया तय करने का अधिकार देता है।
प्रमुख संवैधानिक उपबंध एवं बिंदु
संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद 3): Part I के अंतर्गत 'नए राज्यों का निर्माण और वर्तमान राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन' के लिए बाध्यकारी कानूनी नियम तय करता है
इसमें 1 खंड (Clauses) व 8 उप-खंड तथा स्पष्ट संवैधानिक शर्तें (Provisos) दी गई हैं
मनमाने प्रशासनिक आदेशों के बजाय संसद की लोकतांत्रिक प्रक्रिया और जवाबदेही को अनिवार्य बनाता है
अपवाद एवं युक्तियुक्त निर्बंधन (सीमाएं)
राज्यों की सीमा या नाम बदलने वाले विधेयक के लिए राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश और संबंधित राज्य विधानमंडल की राय लेना आवश्यक है।
दैनिक जीवन में यह क्यों महत्वपूर्ण है?
अनुच्छेद 3 भारत की अखंडता बनाए रखते हुए नए राज्यों के लोकतांत्रिक पुनर्गठन को संभव बनाता है।
और गहराई से पढ़ना चाहते हैं? आधिकारिक राजपत्रित मूल पाठ या सुप्रीम कोर्ट निर्णय व संविधान सभा बहस देखें: