संपत्ति का अनिवार्य अर्जन (44वें संशोधन द्वारा निरसित)
त्वरित सारांश (TL;DR)
ऐतिहासिक अनुच्छेद 31 (संपत्ति का अनिवार्य अर्जन (44वें संशोधन द्वारा निरसित)) — इसे संविधान (Forty-fourth Amendment (1978)) अधिनियम द्वारा औपचारिक रूप से निरसित (समाप्त) कर दिया गया है।
सरल नागरिक भाषा में अर्थ
अनुच्छेद 31 (संपत्ति का अनिवार्य अर्जन (44वें संशोधन द्वारा निरसित)) संविधान के Part III में शामिल था, किंतु संसद ने संविधान (Forty-fourth Amendment (1978)) अधिनियम द्वारा इसे निरसित (Omitted/Repealed) कर दिया है। संवैधानिक क्रम और ऐतिहासिक संदर्भ बनाए रखने के लिए मूल संहिता में इसका क्रमांक सुरक्षित रखा गया है।
यह आपको क्या अधिकार देता है?
अनुच्छेद 31 अब सक्रिय रूप से प्रवर्तन में नहीं है (संविधान (Forty-fourth Amendment (1978)) अधिनियम द्वारा निरसित)
इससे संबंधित अधिकार व नियम अब संशोधित संवैधानिक प्रावधानों द्वारा संचालित होते हैं
कानूनी इतिहास और अदालती संदर्भों के लिए संवैधानिक अभिलेख में सुरक्षित
अपवाद एवं युक्तियुक्त निर्बंधन (सीमाएं)
यह अनुच्छेद संविधान संशोधन द्वारा निरसित किया जा चुका है।
दैनिक जीवन में यह क्यों महत्वपूर्ण है?
संविधान के ऐतिहासिक विकास और लोकतांत्रिक संशोधनों को समझने के लिए यह रिकॉर्ड महत्वपूर्ण है।
और गहराई से पढ़ना चाहते हैं? आधिकारिक राजपत्रित मूल पाठ या सुप्रीम कोर्ट निर्णय व संविधान सभा बहस देखें: