आपातकालीन नागरिक हेल्पलाइन

अनुच्छेद 31B Part III ★ मौलिक अधिकार — नागरिक सुरक्षा कवच

कुछ अधिनियमों और विनियमों का विधिमान्यकरण (नौवीं अनुसूची)

त्वरित सारांश (TL;DR)
अनुच्छेद 31B (कुछ अधिनियमों और विनियमों का विधिमान्यकरण (नौवीं अनुसूची)): भाग III के अंतर्गत प्रवर्तनीय मौलिक अधिकार एवं संवैधानिक सुरक्षा कवच।
संविधान के भाग III (मौलिक अधिकार) में अनुच्छेद 31B 'कुछ अधिनियमों और विनियमों का विधिमान्यकरण (नौवीं अनुसूची)' का उपबंध करता है। यह मौलिक अधिकारों के क्रियान्वयन, भूमि सुधार व कल्याणकारी कानूनों के संरक्षण (31A-31C), सशस्त्र बलों में अनुशासन हेतु आवश्यक नियमों (33) तथा मौलिक अधिकारों को प्रभावी बनाने हेतु संसद की विधायी शक्ति (35) को स्पष्ट करता है।
संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद 31B): Part III के अंतर्गत 'कुछ अधिनियमों और विनियमों का विधिमान्यकरण (नौवीं अनुसूची)' के लिए बाध्यकारी कानूनी नियम तय करता है
यह एक सीधा और स्पष्ट संवैधानिक निर्देश है जिसका पालन करना सभी संबंधित प्राधिकारियों के लिए अनिवार्य है
अनुच्छेद 31B के उल्लंघन में की गई किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई को हाई कोर्ट (अनुच्छेद 226) या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है
केशवानंद भारती और आई.आर. कोएल्हो (2007) के फैसलों के अनुसार, संविधान के मूल ढांचे (Basic Structure) का उल्लंघन करने वाले कानून न्यायिक समीक्षा से बाहर नहीं हो सकते।
यह नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय तथा राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संवैधानिक संतुलन स्थापित करता है।
और गहराई से पढ़ना चाहते हैं? आधिकारिक राजपत्रित मूल पाठ या सुप्रीम कोर्ट निर्णय व संविधान सभा बहस देखें:
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