अनुसूचित जनजातियां (Scheduled Tribes)
त्वरित सारांश (TL;DR)
अनुच्छेद 342 (अनुसूचित जनजातियां (Scheduled Tribes)): भाग XVI के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व और राष्ट्रीय आयोगों का प्रावधान।
सरल नागरिक भाषा में अर्थ
संविधान के भाग XVI का अनुच्छेद 342 'अनुसूचित जनजातियां (Scheduled Tribes)' का उपबंध करता है। यह लोकसभा (330) और राज्य विधानसभाओं (332) में अनुसूचित जातियों (SC) व अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए सीटों के आरक्षण, सेवाओं में दावों (335), तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (338), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (338A) और पिछड़े वर्गों के संवैधानिक संरक्षण को सुनिश्चित करता है। Note: 104वें संविधान संशोधन (2019) द्वारा एंग्लो-इंडियन नामांकन को आगे नहीं बढ़ाया गया।
प्रमुख संवैधानिक उपबंध एवं बिंदु
संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद 342): Part XVI के अंतर्गत 'अनुसूचित जनजातियां (Scheduled Tribes)' के लिए बाध्यकारी कानूनी नियम तय करता है
इसमें 3 खंड (Clauses) के माध्यम से स्पष्ट प्रक्रिया तय की गई है
मनमाने प्रशासनिक आदेशों के बजाय संसद की लोकतांत्रिक प्रक्रिया और जवाबदेही को अनिवार्य बनाता है
अपवाद एवं युक्तियुक्त निर्बंधन (सीमाएं)
अनुच्छेद 341 और 342 के तहत अनुसूचित जाति या जनजाति की सूची में कोई भी बदलाव केवल संसद द्वारा पारित कानून से ही किया जा सकता है।
दैनिक जीवन में यह क्यों महत्वपूर्ण है?
यह वंचित वर्गों को संसद व विधानसभाओं में आवाज देता है और अत्याचार या भेदभाव की शिकायतों की जांच के लिए राष्ट्रीय आयोगों को सिविल कोर्ट की शक्तियां देता है।
और गहराई से पढ़ना चाहते हैं? आधिकारिक राजपत्रित मूल पाठ या सुप्रीम कोर्ट निर्णय व संविधान सभा बहस देखें: