आपातकालीन नागरिक हेल्पलाइन

अनुच्छेद 353 Part XVIII

आपात की उद्घोषणा का प्रभाव

त्वरित सारांश (TL;DR)
अनुच्छेद 353 (आपात की उद्घोषणा का प्रभाव): भाग XVIII के तहत आपातकालीन उपबंधों और उनके दुरुपयोग को रोकने वाले कड़े संवैधानिक सुरक्षा नियमों का प्रावधान।
संविधान के भाग XVIII (आपात उपबंध) का अनुच्छेद 353 'आपात की उद्घोषणा का प्रभाव' से संबंधित है। यह राष्ट्रीय आपातकाल (352-354), बाह्य आक्रमण से राज्यों की रक्षा के संघ के कर्तव्य (355), राज्यों में संवैधानिक तंत्र की विफलता (356-357), आपातकाल के दौरान अधिकारों की स्थिति (358-359) और वित्तीय आपातकाल (360) को नियंत्रित करता है। 44वें संविधान संशोधन (1978) के बाद आपातकाल में भी अनुच्छेद 20 और 21 (जीवन व व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) कभी निलंबित नहीं किए जा सकते।
संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद 353): Part XVIII के अंतर्गत 'आपात की उद्घोषणा का प्रभाव' के लिए बाध्यकारी कानूनी नियम तय करता है
इसमें 1 खंड (Clauses) व 5 उप-खंड तथा स्पष्ट संवैधानिक शर्तें (Provisos) दी गई हैं
मनमाने प्रशासनिक आदेशों के बजाय संसद की लोकतांत्रिक प्रक्रिया और जवाबदेही को अनिवार्य बनाता है
प्रत्येक आपातकालीन उद्घोषणा के लिए तय समय-सीमा के भीतर संसद की मंजूरी अनिवार्य है और एस.आर. बोम्मई केस (1994) के तहत यह न्यायिक समीक्षा के अधीन है।
यह युद्ध या राष्ट्रीय संकट में देश की रक्षा करता है और साथ ही नागरिकों के जीवन व स्वतंत्रता के अधिकार को तानाशाही से बचाता है।
और गहराई से पढ़ना चाहते हैं? आधिकारिक राजपत्रित मूल पाठ या सुप्रीम कोर्ट निर्णय व संविधान सभा बहस देखें:
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