आपातकालीन नागरिक हेल्पलाइन

अनुच्छेद 356 Part XVIII

राज्यों में सांविधानिक तंत्र के विफल हो जाने की दशा में उपबंध (राष्ट्रपति शासन)

त्वरित सारांश (TL;DR)
राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल होने पर राष्ट्रपति शासन लगाने का प्रावधान, जिसे सुप्रीम कोर्ट के बोम्मई फैसले द्वारा कड़े नियमों में बांधा गया है।
अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन) का प्रावधान गंभीर संवैधानिक संकट के लिए बनाया गया था। अतीत में केंद्र सरकारें इसका दुरुपयोग विपक्षी राज्य सरकारों को गिराने के लिए करती थीं। सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की संविधान पीठ ने 'एस.आर. बोम्मई (1994)' फैसले में ऐतिहासिक नियम तय किए: बहुमत का फैसला केवल विधानसभा के पटल (फ्लोर टेस्ट) पर होगा, और दुर्भावनापूर्ण ढंग से सरकार गिराने पर अदालत भंग विधानसभा को फिर से बहाल कर सकती है।
लोकतांत्रिक जनादेश की सुरक्षा: बिना फ्लोर टेस्ट के चुनी हुई सरकार को बर्खास्त करने पर रोक
मनमाने ढंग से राष्ट्रपति शासन थोपने के खिलाफ सीधे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती का हक
अवैध रूप से भंग की गई विधानसभा को अदालत द्वारा बहाल करने का अधिकार
दो महीने के भीतर संसद की मंजूरी अनिवार्य है और विशेष परिस्थितियों के बिना इसे एक वर्ष से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता।
यह भारत के संघीय ढांचे की ढाल है, जिससे केंद्र सरकार मनमर्जी से राज्यों की चुनी हुई सरकारों को गिरा न सके।
और गहराई से पढ़ना चाहते हैं? आधिकारिक राजपत्रित मूल पाठ या सुप्रीम कोर्ट निर्णय व संविधान सभा बहस देखें:
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