छह वर्ष से कम आयु के बालकों के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख और शिक्षा का उपबंध
त्वरित सारांश (TL;DR)
अनुच्छेद 45 (छह वर्ष से कम आयु के बालकों के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख और शिक्षा का उपबंध): भाग IV के तहत लोक-कल्याणकारी राज्य के निर्माण हेतु नीति निर्देशक सिद्धांत।
सरल नागरिक भाषा में अर्थ
संविधान के भाग IV (राज्य के नीति निदेशक तत्व) का अनुच्छेद 45 'छह वर्ष से कम आयु के बालकों के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख और शिक्षा का उपबंध' का निर्देश देता है। अनुच्छेद 37 के अनुसार ये सिद्धांत देश के शासन में मूलभूत हैं और केंद्र तथा राज्य सरकारों का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वे कानून और जन-कल्याण की योजनाएं बनाते समय इन सिद्धांतों को लागू करें।
प्रमुख संवैधानिक उपबंध एवं बिंदु
संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद 45): Part IV के अंतर्गत 'छह वर्ष से कम आयु के बालकों के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख और शिक्षा का उपबंध' के लिए बाध्यकारी कानूनी नियम तय करता है
यह एक सीधा और स्पष्ट संवैधानिक निर्देश है जिसका पालन करना सभी संबंधित प्राधिकारियों के लिए अनिवार्य है
अनुच्छेद 45 के उल्लंघन में की गई किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई को हाई कोर्ट (अनुच्छेद 226) या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है
अपवाद एवं युक्तियुक्त निर्बंधन (सीमाएं)
अनुच्छेद 37 के तहत इन्हें सीधे अदालत में बाध्यकारी नहीं बनाया गया है, परंतु सुप्रीम कोर्ट इन्हें अनुच्छेद 21 (गरिमापूर्ण जीवन) के साथ मिलाकर व्याख्या करता है।
दैनिक जीवन में यह क्यों महत्वपूर्ण है?
यह श्रमिक कल्याण, शिक्षा, कृषि, पशुपालन, ऐतिहासिक स्मारकों की रक्षा और सामाजिक सुरक्षा कानूनों का संवैधानिक आधार है।
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