पाकिस्तान को प्रव्रजन करने वाले कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार
त्वरित सारांश (TL;DR)
अनुच्छेद 7 (पाकिस्तान को प्रव्रजन करने वाले कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार): Part II के अंतर्गत भारतीय नागरिकता की पात्रता और संवैधानिक नियमों का निर्धारण।
सरल नागरिक भाषा में अर्थ
संविधान के भाग II (नागरिकता) का अनुच्छेद 7 'पाकिस्तान को प्रव्रजन करने वाले कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार' को स्पष्ट करता है। यह 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के समय अधिवास (Domicile), विभाजन के दौरान प्रव्रजन (Migration), विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्तियों या विदेशी नागरिकता लेने पर भारतीय नागरिकता की स्थिति तय करता है।
प्रमुख संवैधानिक उपबंध एवं बिंदु
संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद 7): Part II के अंतर्गत 'पाकिस्तान को प्रव्रजन करने वाले कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार' के लिए बाध्यकारी कानूनी नियम तय करता है
इसमें 1 खंड (Clauses) व 1 उप-खंड तथा स्पष्ट संवैधानिक शर्तें (Provisos) दी गई हैं
अनुच्छेद 7 के उल्लंघन में की गई किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई को हाई कोर्ट (अनुच्छेद 226) या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है
अपवाद एवं युक्तियुक्त निर्बंधन (सीमाएं)
भारत में एकहरी नागरिकता लागू है; अनुच्छेद 9 के अनुसार किसी विदेशी राज्य की नागरिकता स्वेच्छा से लेने पर भारतीय नागरिकता समाप्त हो जाती है और अनुच्छेद 11 के तहत संसद इस पर कानून बनाती है।
दैनिक जीवन में यह क्यों महत्वपूर्ण है?
अनुच्छेद 7 भारत के प्रत्येक नागरिक की कानूनी पहचान और समान संवैधानिक अधिकारों की बुनियाद है।
और गहराई से पढ़ना चाहते हैं? आधिकारिक राजपत्रित मूल पाठ या सुप्रीम कोर्ट निर्णय व संविधान सभा बहस देखें: