उच्चतम न्यायालय का अभिलेख न्यायालय (Court of Record) होना
त्वरित सारांश (TL;DR)
अनुच्छेद 129 (उच्चतम न्यायालय का अभिलेख न्यायालय (Court of Record) होना): भारत के सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) की अधिकारिता, न्यायिक स्वतंत्रता और अपीलीय शक्तियों का प्रावधान।
सरल नागरिक भाषा में अर्थ
संविधान के भाग V के अध्याय IV (संघ की न्यायपालिका) का अनुच्छेद 129 'उच्चतम न्यायालय का अभिलेख न्यायालय (Court of Record) होना' से संबंधित है। यह सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के न्यायाधीशों की सेवा शर्तों, अभिलेख न्यायालय (Court of Record) की शक्ति, केंद्र-राज्य विवादों की आरंभिक अधिकारिता, दीवानी व फौजदारी अपीलों, निर्णयों के पुनर्विलोकन (Review) तथा न्यायिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है।
प्रमुख संवैधानिक उपबंध एवं बिंदु
संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद 129): Part V के अंतर्गत 'उच्चतम न्यायालय का अभिलेख न्यायालय (Court of Record) होना' के लिए बाध्यकारी कानूनी नियम तय करता है
यह एक सीधा और स्पष्ट संवैधानिक निर्देश है जिसका पालन करना सभी संबंधित प्राधिकारियों के लिए अनिवार्य है
सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) की स्वतंत्र न्यायिक निगरानी द्वारा संरक्षित
अपवाद एवं युक्तियुक्त निर्बंधन (सीमाएं)
सर्वोच्च न्यायालय अपनी शक्तियों का प्रयोग संवैधानिक नियमों और न्यायिक प्रक्रिया के तहत पूर्णतः स्वतंत्र रूप से करता है।
दैनिक जीवन में यह क्यों महत्वपूर्ण है?
यह सुप्रीम कोर्ट को संविधान का सर्वोच्च संरक्षक और हर नागरिक के लिए न्याय की अंतिम उम्मीद बनाता है।
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