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अनुच्छेद 131 Part V

उच्चतम न्यायालय की आरंभिक अधिकारिता (केंद्र-राज्य विवाद)

त्वरित सारांश (TL;DR)
अनुच्छेद 131 (उच्चतम न्यायालय की आरंभिक अधिकारिता (केंद्र-राज्य विवाद)): भारत के सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) की अधिकारिता, न्यायिक स्वतंत्रता और अपीलीय शक्तियों का प्रावधान।
संविधान के भाग V के अध्याय IV (संघ की न्यायपालिका) का अनुच्छेद 131 'उच्चतम न्यायालय की आरंभिक अधिकारिता (केंद्र-राज्य विवाद)' से संबंधित है। यह सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के न्यायाधीशों की सेवा शर्तों, अभिलेख न्यायालय (Court of Record) की शक्ति, केंद्र-राज्य विवादों की आरंभिक अधिकारिता, दीवानी व फौजदारी अपीलों, निर्णयों के पुनर्विलोकन (Review) तथा न्यायिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है।
संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद 131): Part V के अंतर्गत 'उच्चतम न्यायालय की आरंभिक अधिकारिता (केंद्र-राज्य विवाद)' के लिए बाध्यकारी कानूनी नियम तय करता है
इसमें 1 खंड (Clauses) व 3 उप-खंड तथा स्पष्ट संवैधानिक शर्तें (Provisos) दी गई हैं
सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) की स्वतंत्र न्यायिक निगरानी द्वारा संरक्षित
सर्वोच्च न्यायालय अपनी शक्तियों का प्रयोग संवैधानिक नियमों और न्यायिक प्रक्रिया के तहत पूर्णतः स्वतंत्र रूप से करता है।
यह सुप्रीम कोर्ट को संविधान का सर्वोच्च संरक्षक और हर नागरिक के लिए न्याय की अंतिम उम्मीद बनाता है।
और गहराई से पढ़ना चाहते हैं? आधिकारिक राजपत्रित मूल पाठ या सुप्रीम कोर्ट निर्णय व संविधान सभा बहस देखें:
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