संघ के और राज्यों के लेखाओं का प्ररूप
त्वरित सारांश (TL;DR)
अनुच्छेद 150 (संघ के और राज्यों के लेखाओं का प्ररूप): भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) द्वारा सरकारी खातों और जनता के धन के स्वतंत्र ऑडिट का प्रावधान।
सरल नागरिक भाषा में अर्थ
संविधान के भाग V के अध्याय V का अनुच्छेद 150 'संघ के और राज्यों के लेखाओं का प्ररूप' का उपबंध करता है। डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) को संविधान के अधीन सबसे महत्वपूर्ण अधिकारी बताया था। यह केंद्र और राज्य सरकारों के प्रत्येक रुपये के खर्च की स्वतंत्र जांच और उसकी ऑडिट रिपोर्ट संसद व विधानसभा के पटल पर रखने की अनिवार्यता तय करता है।
प्रमुख संवैधानिक उपबंध एवं बिंदु
संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद 150): Part V के अंतर्गत 'संघ के और राज्यों के लेखाओं का प्ररूप' के लिए बाध्यकारी कानूनी नियम तय करता है
यह एक सीधा और स्पष्ट संवैधानिक निर्देश है जिसका पालन करना सभी संबंधित प्राधिकारियों के लिए अनिवार्य है
इस अनुच्छेद के तहत संवैधानिक पद की शक्तियों का प्रयोग लोकतांत्रिक सलाह और संवैधानिक मर्यादाओं के भीतर ही होता है
अपवाद एवं युक्तियुक्त निर्बंधन (सीमाएं)
अनुच्छेद 148(4) के तहत CAG सेवानिवृत्ति के बाद भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन कोई और पद ग्रहण नहीं कर सकते ताकि उनकी निष्पक्षता बनी रहे।
दैनिक जीवन में यह क्यों महत्वपूर्ण है?
यह जनता के टैक्स के पैसे की चौकीदारी करता है और सरकारी खर्च में किसी भी घोटाले या अनियमितता को संसद व जनता के सामने उजागर करता है।
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