आपातकालीन नागरिक हेल्पलाइन

अनुच्छेद 319 Part XIV

आयोग के सदस्यों द्वारा ऐसे सदस्य न रहने पर पद धारण करने के संबंध में प्रतिषेध

त्वरित सारांश (TL;DR)
अनुच्छेद 319 (आयोग के सदस्यों द्वारा ऐसे सदस्य न रहने पर पद धारण करने के संबंध में प्रतिषेध): भाग XIV के तहत लोक सेवाओं (Civil Services) और संघ/राज्य लोक सेवा आयोग (UPSC/PSC) की निष्पक्षता व सुरक्षा।
संविधान के भाग XIV (संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं) का अनुच्छेद 319 'आयोग के सदस्यों द्वारा ऐसे सदस्य न रहने पर पद धारण करने के संबंध में प्रतिषेध' का प्रावधान करता है। यह सरकारी कर्मचारियों की भर्ती व सेवा शर्तों (309), बिना निष्पक्ष जांच के बर्खास्तगी से सुरक्षा (311), अखिल भारतीय सेवाओं (312), तथा संघ और राज्य लोक सेवा आयोगों (UPSC/State PSC, अनुच्छेद 315-323) की स्वतंत्रता और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली को सुनिश्चित करता है।
संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद 319): Part XIV के अंतर्गत 'आयोग के सदस्यों द्वारा ऐसे सदस्य न रहने पर पद धारण करने के संबंध में प्रतिषेध' के लिए बाध्यकारी कानूनी नियम तय करता है
इसमें 1 खंड (Clauses) व 4 उप-खंड के माध्यम से स्पष्ट प्रक्रिया तय की गई है
अनुच्छेद 319 के उल्लंघन में की गई किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई को हाई कोर्ट (अनुच्छेद 226) या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है
अनुच्छेद 319 के तहत लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष व सदस्यों को कार्यकाल के बाद सरकारी लाभ के पदों पर नियुक्त होने से रोका गया है ताकि भर्तियों में पूर्ण निष्पक्षता रहे।
यह युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों में योग्यता आधारित निष्पक्ष चयन और ईमानदार अधिकारियों को राजनीतिक दबाव से सुरक्षा की गारंटी देता है।
और गहराई से पढ़ना चाहते हैं? आधिकारिक राजपत्रित मूल पाठ या सुप्रीम कोर्ट निर्णय व संविधान सभा बहस देखें:
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