राज्य की राजभाषा या राजभाषाएं
त्वरित सारांश (TL;DR)
अनुच्छेद 345 (राज्य की राजभाषा या राजभाषाएं): भाग XVII के तहत संघ एवं राज्यों की राजभाषा, न्यायपालिका की भाषा और भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों का प्रावधान।
सरल नागरिक भाषा में अर्थ
संविधान के भाग XVII (राजभाषा) का अनुच्छेद 345 'राज्य की राजभाषा या राजभाषाएं' का उपबंध करता है। यह संघ की राजभाषा (343), राज्यों की अपनी आधिकारिक भाषाओं (345-347), सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट की न्यायिक भाषा (348), किसी भी भाषा में अपनी शिकायत/अभ्यावेदन देने के नागरिक अधिकार (350) और मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा की सुविधा (350A) को संरक्षित करता है।
प्रमुख संवैधानिक उपबंध एवं बिंदु
संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद 345): Part XVII के अंतर्गत 'राज्य की राजभाषा या राजभाषाएं' के लिए बाध्यकारी कानूनी नियम तय करता है
यह एक सीधा और स्पष्ट संवैधानिक निर्देश है जिसका पालन करना सभी संबंधित प्राधिकारियों के लिए अनिवार्य है
अनुच्छेद 345 के उल्लंघन में की गई किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई को हाई कोर्ट (अनुच्छेद 226) या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है
अपवाद एवं युक्तियुक्त निर्बंधन (सीमाएं)
अनुच्छेद 350 के तहत कोई भी सरकारी अधिकारी किसी नागरिक की शिकायत को केवल इस आधार पर खारिज नहीं कर सकता कि वह संघ या राज्य में प्रयुक्त किसी क्षेत्रीय भाषा में लिखी गई है।
दैनिक जीवन में यह क्यों महत्वपूर्ण है?
यह भारत की बहुभाषी संस्कृति का सम्मान करता है और नागरिकों को अपनी भाषा में शासन से संवाद करने का संवैधानिक हक देता है।
और गहराई से पढ़ना चाहते हैं? आधिकारिक राजपत्रित मूल पाठ या सुप्रीम कोर्ट निर्णय व संविधान सभा बहस देखें: