आपातकालीन नागरिक हेल्पलाइन

अनुच्छेद 370 Part XXI

जम्मू और कश्मीर राज्य के संबंध में अस्थायी उपबंध (2019 में निष्प्रभावी)

त्वरित सारांश (TL;DR)
मूल रूप से भाग XXI के तहत जम्मू और कश्मीर राज्य को अस्थायी विशेष स्वायत्त दर्जा प्रदान करता था; अगस्त 2019 में राष्ट्रपति के संवैधानिक आदेशों (C.O. 272 व 273) तथा पुनर्गठन अधिनियम द्वारा इसे निष्प्रभावी किया गया, जिसे दिसंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट की 5-जजों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से वैध ठहराया।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 370 अक्टूबर 1947 में महाराजा हरि सिंह द्वारा हस्ताक्षरित 'इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन' के बाद 1949 में एक 'अस्थायी प्रावधान' के रूप में शामिल किया गया था।

संवैधानिक रूपरेखा:
1. ऐतिहासिक स्थिति: संसद की शक्ति केवल रक्षा, विदेश मामले, संचार व वित्त तक सीमित थी। अन्य केंद्रीय कानूनों के लिए राज्य सरकार की सहमति अनिवार्य थी और राज्य का अपना अलग संविधान था (1956 में लागू)।

2. अगस्त 2019 का ऐतिहासिक बदलाव: 5-6 अगस्त 2019 को राष्ट्रपति द्वारा संवैधानिक आदेश (C.O. 272 व 273) जारी किए गए। इसके द्वारा अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी कर दिया गया और पूरे भारतीय संविधान को बिना किसी अपवाद के जम्मू-कश्मीर पर लागू किया गया।

3. राज्य पुनर्गठन: संसद ने जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 पारित किया, जिसके तहत राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर (विधानसभा सहित) और लद्दाख (बिना विधानसभा)—में विभाजित किया गया।

4. सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला (11 दिसंबर 2023): 5 जजों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से अनुच्छेद 370 के निरसन को वैध ठहराया और स्पष्ट किया कि भारत में विलय के बाद जम्मू-कश्मीर के पास कोई आंतरिक संप्रभुता नहीं थी, अनुच्छेद 370 हमेशा से अस्थायी था, और चुनाव कराने व राज्य का दर्जा बहाल करने का निर्देश दिया।
सार्वभौमिक मौलिक अधिकार: जम्मू-कश्मीर के सभी नागरिकों को संविधान के भाग III के तहत सभी मौलिक अधिकार (शिक्षा का अधिकार 21A, सूचना का अधिकार RTI, आरक्षण आदि) समान रूप से प्राप्त हैं
एकल राष्ट्रीय नागरिकता: सभी निवासियों के पास समान भारतीय नागरिकता है (पूर्व अनुच्छेद 35A के प्रतिबंध समाप्त)
लैंगिक समानता: राज्य से बाहर विवाह करने वाली महिलाओं के संपत्ति व उत्तराधिकार अधिकार सुरक्षित
केंद्रीय प्रगतिशील कानूनों का संरक्षण: पॉक्सो (POCSO), भ्रष्टाचार निवारण, तथा एससी/एसटी अत्याचार निवारण कानून अब पूर्णतः लागू
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356) के दौरान केंद्र की शक्तियां असीमित नहीं हैं और उन्हें संवैधानिक संतुलन बनाए रखना होगा। केंद्र राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए बाध्य है।
अनुच्छेद 370 का इतिहास भारतीय संघवाद, संप्रभुता और देश के हर नागरिक पर संविधान की सर्वोच्चता का सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण है।
और गहराई से पढ़ना चाहते हैं? आधिकारिक राजपत्रित मूल पाठ या सुप्रीम कोर्ट निर्णय व संविधान सभा बहस देखें:
Copied to clipboard!
EN-IN • STUDIO VOICE
Preparing studio neural voice...