फेडरल न्यायालय के न्यायाधीशों और फेडरल न्यायालय में लंबित कार्यवाहियों के बारे में उपबंध
त्वरित सारांश (TL;DR)
अनुच्छेद 374 (फेडरल न्यायालय के न्यायाधीशों और फेडरल न्यायालय में लंबित कार्यवाहियों के बारे में उपबंध): भाग XXI के तहत विभिन्न राज्यों के क्षेत्रीय विकास, जनजातीय संरक्षण और संक्रमणकालीन संवैधानिक उपबंध।
सरल नागरिक भाषा में अर्थ
संविधान के भाग XXI का अनुच्छेद 374 'फेडरल न्यायालय के न्यायाधीशों और फेडरल न्यायालय में लंबित कार्यवाहियों के बारे में उपबंध' का उपबंध करता है। यह विभिन्न राज्यों (अनुच्छेद 371 श्रृंखला: महाराष्ट्र, गुजरात, नगालैंड, असम, मणिपुर, आंध्र प्रदेश, सिक्किम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, गोवा आदि) के लिए विशेष क्षेत्रीय विकास व सांस्कृतिक संरक्षण, अथवा 1950 में संविधान लागू होने के समय प्रचलित कानूनों और न्यायिक संस्थाओं की निरंतरता (अनुच्छेद 372-392) को निर्धारित करता है।
प्रमुख संवैधानिक उपबंध एवं बिंदु
संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद 374): Part XXI के अंतर्गत 'फेडरल न्यायालय के न्यायाधीशों और फेडरल न्यायालय में लंबित कार्यवाहियों के बारे में उपबंध' के लिए बाध्यकारी कानूनी नियम तय करता है
इसमें 5 खंड (Clauses) के माध्यम से स्पष्ट प्रक्रिया तय की गई है
सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) की स्वतंत्र न्यायिक निगरानी द्वारा संरक्षित
अपवाद एवं युक्तियुक्त निर्बंधन (सीमाएं)
अनुच्छेद 372(1) के अनुसार संविधान से पहले के कानून तभी तक लागू रहते हैं जब तक वे संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन न करें।
दैनिक जीवन में यह क्यों महत्वपूर्ण है?
यह भारत की क्षेत्रीय विविधता का सम्मान करता है और विधिक व्यवस्था की निरंतरता सुनिश्चित करता है।
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