संसद के सदनों की अवधि
त्वरित सारांश (TL;DR)
अनुच्छेद 83 (संसद के सदनों की अवधि): भाग V के तहत भारतीय संसद (लोकसभा व राज्यसभा) की संरचना, कार्यप्रणाली व कानून निर्माण के नियम।
सरल नागरिक भाषा में अर्थ
संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 83 'संसद के सदनों की अवधि' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।
प्रमुख संवैधानिक उपबंध एवं बिंदु
संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद 83): Part V के अंतर्गत 'संसद के सदनों की अवधि' के लिए बाध्यकारी कानूनी नियम तय करता है
इसमें 2 खंड (Clauses) तथा स्पष्ट संवैधानिक शर्तें (Provisos) दी गई हैं
मनमाने प्रशासनिक आदेशों के बजाय संसद की लोकतांत्रिक प्रक्रिया और जवाबदेही को अनिवार्य बनाता है
अपवाद एवं युक्तियुक्त निर्बंधन (सीमाएं)
संसद की सभी विधायी कार्रवाइयां और नियम संविधान के प्रावधानों, मौलिक अधिकारों (अनुच्छेद 13) और मूल ढांचे के अधीन हैं।
दैनिक जीवन में यह क्यों महत्वपूर्ण है?
यह सुनिश्चित करता है कि देश का हर कानून और बजट खर्च जनता के चुने हुए सांसदों द्वारा तय संवैधानिक नियमों के तहत ही पास हो।
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