संघ का नाम और राज्यक्षेत्र
अनुच्छेद 1 स्पष्ट करता है कि "भारत, अर्थात इंडिया, राज्यों का संघ होगा।" यह देश की क्षेत्रीय सीमाओं और सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को एक अटूट सूत्र में बांधता है।
अनुच्छेद 1 स्पष्ट करता है कि "भारत, अर्थात इंडिया, राज्यों का संघ होगा।" यह देश की क्षेत्रीय सीमाओं और सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को एक अटूट सूत्र में बांधता है।
संविधान के Part I (संघ और उसका राज्यक्षेत्र) में स्थित अनुच्छेद 2 'नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना' का प्रावधान करता है। यह अनुच्छेद संसद को राज्यों के प्रवेश, पुनर्गठन और पहली तथा चौथी अनुसूची में आवश्यक संशोधनों की वैधानिक प्रक्रिया तय करने का अधिकार देता है।
संविधान के Part I (संघ और उसका राज्यक्षेत्र) में स्थित अनुच्छेद 3 'नए राज्यों का निर्माण और वर्तमान राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन' का प्रावधान करता है। यह अनुच्छेद संसद को राज्यों के प्रवेश, पुनर्गठन और पहली तथा चौथी अनुसूची में आवश्यक संशोधनों की वैधानिक प्रक्रिया तय करने का अधिकार देता है।
संविधान के Part I (संघ और उसका राज्यक्षेत्र) में स्थित अनुच्छेद 4 'पहली और चौथी अनुसूचियों के संशोधन तथा अनुपूरक विषयों का उपबंध करने के लिए अनुच्छेद 2 और 3 के अधीन बनाई गई विधियां' का प्रावधान करता है। यह अनुच्छेद संसद को राज्यों के प्रवेश, पुनर्गठन और पहली तथा चौथी अनुसूची में आवश्यक संशोधनों की वैधानिक प्रक्रिया तय करने का अधिकार देता है।
भारतीय प्रतिलिप्यधिकार अधिनियम (Copyright Act), 1957 की धारा 52(1)(q) के अंतर्गत भारत का संविधान, संसदीय अधिनियम, राजपत्र अधिसूचनाएं तथा उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों के निर्णय सार्वजनिक डोमेन (Public Domain) में हैं। यह पाठ विधायी विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय, भारत सरकार (India Code) के आधिकारिक अभिलेखों पर आधारित है।