क्या फीस बकाया होने पर स्कूल आपका ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) या मार्कशीट रोक सकता है?
सख्ती से मना है। विभिन्न हाईकोर्ट्स ने साफ किया है कि मार्कशीट और टीसी छात्र का अधिकार हैं; फीस विवाद में बच्चे का भविष्य बंधक नहीं बनाया जा सकता।
- • स्कूल बकाया फीस के लिए कानूनी रास्ता ले सकता है, लेकिन बच्चे की मार्कशीट नहीं रोक सकता।
- प्रिंसिपल को लिखित आवेदन दें और न मिलने पर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) में शिकायत करें।
यदि कॉलेज में सीनियर्स द्वारा रैगिंग की जाए तो कानून क्या कहता है?
कतई बर्दाश्त नहीं! सुप्रीम कोर्ट और यूजीसी के कड़े नियमों के अनुसार रैगिंग की शिकायत मिलने पर 24 घंटे में पुलिस एफआईआर दर्ज कराना और दोषी छात्रों को निलंबित करना अनिवार्य है।
- • कॉलेज प्रशासन यदि एफआईआर नहीं कराता तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
- • एंटी-रैगिंग टोल फ्री हेल्पलाइन: 1800-180-5522 चौबीसों घंटे सक्रिय रहती है।
- तुरंत राष्ट्रीय एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन 1800-180-5522 पर कॉल करें।
क्या स्कूल में टीचर बच्चे की पिटाई कर सकता है या शारीरिक दंड दे सकता है?
सख्ती से प्रतिबंधित है। शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम की धारा 17 के तहत किसी भी बच्चे को शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना देना कानूनन अपराध है।
- • बच्चों को पीटने वाले शिक्षक पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत 3 साल तक की जेल हो सकती है।
- बच्चे का तुरंत मेडिकल कराएं और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट में पुलिस में एफआईआर दर्ज कराएं।
क्या कोई निजी स्कूल गरीब और वंचित बच्चों के लिए 25% मुफ्त कोटे में दाखिला देने से मना कर सकता है?
सख्ती से मना है। आरटीई (RTE) एक्ट की धारा 12(1)(c) के तहत निजी स्कूलों को पहली कक्षा/प्री-स्कूल में 25% सीटें गरीब बच्चों के लिए मुफ्त में आरक्षित रखनी अनिवार्य हैं।
- • सरकार इन बच्चों की फीस सीधे स्कूल को अदा करती है। स्कूल कोई अतिरिक्त फीस या इंटरव्यू नहीं ले सकता।
- राज्य सरकार के आरटीई पोर्टल पर ऑनलाइन फॉर्म भरें और स्कूल मना करे तो जिला शिक्षा अधिकारी से शिकायत करें।