क्या मकान मालिक आपका सामान बाहर फेंक सकता है, ताला लगा सकता है या बिजली-पानी काट सकता है?
बिल्कुल नहीं! मकान मालिक जबरन बेदखल नहीं कर सकता और न ही बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं काट सकता है।
- • किराया बकाया होने पर भी मकान मालिक बिजली-पानी नहीं काट सकता। यह कानूनन अपराध है।
- • बेदखली के लिए कानूनी नोटिस और अदालत का आदेश अनिवार्य है।
- ताला लगाने या मारपीट करने पर तुरंत 112 पर फोन करें।
- रेंट कंट्रोलर के पास बुनियादी सुविधा बहाली की अर्जी दें।
क्या मकान मालिक किराया विवाद में आपकी बिजली या पानी की सप्लाई काट सकता है?
बिल्कुल नहीं! बिजली और पानी जीवन की अनिवार्य जरूरतें हैं। इन्हें काटने वाले मकान मालिक के खिलाफ कोर्ट तत्काल बहाली का आदेश और हर्जाना लगाती है।
- • मॉडल टेनेंसी एक्ट के तहत मकान मालिक को जरूरी सेवाएं रोकने की सख्त मनाही है।
- मकान मालिक को सूचित करें और रेंट कंट्रोलर के पास आपातकालीन अर्जी लगाएं।
सोसाइटी में पालतू कुत्ता: क्या रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) पालतू जानवरों पर रोक लगा सकती है?
पूर्णतः गैरकानूनी! भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) के नियमों और उच्च न्यायालय के आदेशानुसार, कोई भी RWA पालतू कुत्ते-बिल्लियों पर रोक नहीं लगा सकती, न ही लिफ्ट के उपयोग पर अतिरिक्त शुल्क या पाबंदी लगा सकती है।
- • 1. आरडब्ल्यूए को आम बैठक (AGM) में 100% बहुमत से भी पालतू जानवरों पर प्रतिबंध लगाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
- • 2. पालतू जानवर लिफ्ट का उपयोग कर सकते हैं; उन्हें सीढ़ियों से ले जाने के लिए मजबूर करना अवैध है।
- • 3. कुत्ते का कभी-कभार भौंकना कानूनी उपद्रव नहीं है; मालिक को सार्वजनिक स्थानों पर पट्टा (leash) बांधकर रखना चाहिए।
- 1. सोसाइटी के नोटिस का जवाब AWBI दिशानिर्देशों और संविधान के अनुच्छेद 51A(g) का हवाला देकर दें।
- 2. नगर निगम में कुत्ते का पंजीकरण कराएं और नियमित टीकाकरण कार्ड अपने पास रखें।
- 3. आरडब्ल्यूए द्वारा दुर्व्यवहार या लिफ्ट रोकने पर 112 पर फोन करें और पशु क्रूरता अधिनियम के तहत शिकायत करें।
- 4. सिविल कोर्ट से आरडब्ल्यूए के मनमाने नियमों पर रोक (Stay Order) प्राप्त करें।
पैतृक संपत्ति की बिक्री: क्या पिता बिना बेटे-बेटियों की सहमति के पैतृक जमीन या मकान बेच सकते हैं?
नहीं! हिंदू उत्तराधिकार कानून के अनुसार, पैतृक संपत्ति में बेटे और बेटियों दोनों का जन्म से समान अधिकार होता है। पिता बिना कानूनी विवशता (विधिक आवश्यकता) के बच्चों की सहमति बिना इसे नहीं बेच सकते।
- • 1. चार पीढ़ियों से चली आ रही पैतृक संपत्ति को परिवार का कोई एक सदस्य अपनी मर्जी से नहीं बेच सकता।
- • 2. 2005 के संशोधन और विनीता शर्मा निर्णय के बाद बेटियों को भी बेटों के बराबर जन्मसिद्ध अधिकार प्राप्त है।
- • 3. बिना सहमति के की गई बिक्री को दीवानी अदालत में चुनौती देकर निरस्त (Cancel) कराया जा सकता है।
- 1. खतौनी और जमाबंदी निकालकर साबित करें कि जमीन पैतृक है, पिता की स्वअर्जित नहीं।
- 2. सब-रजिस्ट्रार को विधिक नोटिस देकर रजिस्ट्री पर रोक लगाने की सूचना दें।
- 3. सिविल कोर्ट में बंटवारे (Partition Suit) और रोक का वाद दायर करें।
- 4. कोर्ट से जमीन की बिक्री और निर्माण पर तुरंत अंतरिम रोक (Stay) हासिल करें।
रजिस्टर्ड दान पत्र (Gift Deed) का निरस्तीकरण: क्या दानदाता संपत्ति दान करने के बाद उसे वापस ले सकता है?
नहीं! संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम की धारा 126 के तहत, एक बार स्वीकार किया गया रजिस्टर्ड गिफ्ट डीड स्थायी हो जाता है। दानदाता अपनी मर्जी से इसे रद्द नहीं कर सकता, जब तक कि धोखाधड़ी साबित न हो या वरिष्ठ नागरिक कानून लागू न हो।
- • 1. दान पत्र तभी पूर्ण होता है जब दानदाता के जीवनकाल में कब्जा और स्वीकृति पूरी हो जाए।
- • 2. सब-रजिस्ट्रार कोर्ट के आदेश के बिना एकतरफा रद्दीकरण डीड (Cancellation Deed) रजिस्टर नहीं कर सकते।
- • 3. अपवाद: यदि संतान बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल न करे, तो वरिष्ठ नागरिक अधिनियम की धारा 23 के तहत गिफ्ट डीड रद्द हो सकती है।
- 1. मूल रजिस्टर्ड गिफ्ट डीड और अपने नाम दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) की रसीद संभालकर रखें।
- 2. यदि दानदाता रद्द कराने की कोशिश करे, तो सब-रजिस्ट्रार को विधिक नोटिस देकर रोकें।
- 3. सिविल कोर्ट में संपत्ति के स्वामित्व की घोषणा (Declaration of Title) का केस करें।
- 4. बुजुर्ग माता-पिता भरण-पोषण न मिलने पर सीधे एसडीएम/मेंटिनेंस ट्रिब्यूनल में अर्जी लगाएं।