क्या कोई निजी अस्पताल एक्सीडेंट पीड़ित का इलाज करने से मना कर सकता है या पहले पुलिस रिपोर्ट मांग सकता है?
नहीं! हर अस्पताल को घायल या गंभीर मरीज को तुरंत आपातकालीन प्राथमिक उपचार देना अनिवार्य है, पुलिस का इंतजार नहीं करना होता।
- • परमानंद कटारा फैसले के अनुसार जीवन रक्षा सर्वोच्च है। पुलिस कार्यवाही का इंतजार किए बिना तुरंत इलाज शुरू करना अनिवार्य है।
- • अस्पताल पैसे या कागजी कार्रवाई के बहाने गंभीर मरीज को मना नहीं कर सकता।
- अस्पताल को सुप्रीम कोर्ट के परमानंद कटारा फैसले की याद दिलाएं और तुरंत 112 पर सूचना दें।
क्या कोई निजी अस्पताल अग्रिम पैसे न होने पर गंभीर मरीज का इलाज करने से मना कर सकता है?
सख्ती से मना है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार हर अस्पताल का पहला कर्तव्य गंभीर मरीज की जान बचाना है; पैसे की कमी के कारण इलाज नहीं रोका जा सकता।
- • क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत आपातकालीन स्थिति में मरीज का प्राथमिक इलाज अनिवार्य है।
- अस्पताल को परमानंद कटारा फैसले की याद दिलाएं और तुरंत इलाज शुरू करने को कहें।
क्या बकाया बिल के नाम पर अस्पताल मृतक का शव (Dead Body) रोक सकता है?
पूरी तरह गैरकानूनी! किसी भी अस्पताल को बकाया बिल के नाम पर शव बंधक बनाने का कोई हक नहीं है। यह मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है।
- • अस्पताल बिल वसूली के लिए अलग से कानूनी रास्ता अपना सकता है, लेकिन शव को नहीं रोक सकता।
- तुरंत 112 पर कॉल करके पुलिस को सूचना दें कि अस्पताल शव बंधक बना रहा है।
क्या मरीज को अस्पताल से अपनी पूरी केस शीट और मेडिकल रिकॉर्ड पाने का हक है?
हाँ। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग के नियमों के तहत अस्पताल को मरीज या उसके परिजनों के मांगने पर 72 घंटे में पूरे रिकॉर्ड देना अनिवार्य है।
- • अस्पताल को डॉक्टर के नोट्स, टेस्ट रिपोर्ट और दवाइयों का पूरा ब्योरा देना होता है।
- अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड विभाग (MRD) में लिखित आवेदन देकर रिसीविंग लें।
क्या ब्लड बैंक इमरजेंसी में डोनर न लाने पर खून देने से मना कर सकता है?
नहीं। राष्ट्रीय रक्त आधान परिषद (NBTC) के नियमों के अनुसार आपातकालीन स्थिति में ब्लड बैंक रिप्लेसमेंट डोनर लाने की शर्त नहीं थोप सकते।
- • इमरजेंसी में मरीज की जान बचाना प्राथमिकता है, डोनर की शर्त लगाना गलत है।
- डॉक्टर की अर्जेंट पर्ची दिखाएं और एनबीटीसी (NBTC) गाइडलाइंस का हवाला दें।