आपातकालीन नागरिक हेल्पलाइन

नागरिक विधिक सुरक्षा कवच • वास्तविक विधिक अधिकार

वास्तविक परिस्थितियों में आपके क्या कानूनी अधिकार हैं?

ट्रैफिक चेकिंग, फोन चेकिंग, गिरफ्तारी, महिला सुरक्षा, अस्पताल और उपभोक्ता विवाद — जानिए कानून क्या कहता है और शांत रहकर अपने अधिकार कैसे सुरक्षित रखें।

महिला सुरक्षा व अधिकार

दिखाए जा रहे हैं 1–8 कुल 14 अधिकार
रीसेट
📄 नागरिक पॉकेट विधिक सुरक्षा कार्ड (प्रिंट / ऑफलाइन सेव) बाइक की चाबी, फोन चेकिंग, महिला अधिकार और जीरो एफआईआर के 10 आवश्यक नियम 1 पेज पर प्रिंट करें।
कार्ड देखें →
Special Safeguard ⚠️ STRICT STATUTORY BAN 🌐 अखिल भारतीय कानून

क्या पुलिस किसी महिला को सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले गिरफ्तार कर सकती है?

नहीं! असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर बिना न्यायिक मजिस्ट्रेट की पूर्व लिखित अनुमति के शाम 6 से सुबह 6 के बीच गिरफ्तारी गैरकानूनी है।

लागू कानून व प्रावधान: Section 46(4) CrPC / Section 43(5) Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita (BNSS)
संबंधित अनुच्छेद: Article 21 (Dignity & Liberty), Article 15(3) (Special Provisions for Women) (अनुच्छेद 21 →) (अनुच्छेद 15 →)
अधिकारी से शांत एवं विनम्र भाषा में क्या बोलें:
🛡️ अनुच्छेद 21, 15 कवच
“अधिकारी महोदय, पूरे सम्मान के साथ, Section 46(4) CrPC / Section 43(5) Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita (BNSS) के अनुसार, कानून के अनुसार किसी भी महिला को शाम (सूर्यास्त) के बाद और सुबह (सूर्योदय) से पहले गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। संविधान के Article 21 (Dignity & Liberty), Article 15(3) (Special Provisions for Women) के तहत किसी भी प्रकार का भेदभाव या मनमानी कार्रवाई वर्जित है; कृपया लिखित नियमों के अनुसार ही कार्यवाही करें।”
कानून क्या कहता है
  • • कानून के अनुसार किसी भी महिला को शाम (सूर्यास्त) के बाद और सुबह (सूर्योदय) से पहले गिरफ्तार नहीं किया जा सकता।
  • • अत्यंत असाधारण मामलों में भी महिला पुलिसकर्मी का होना और न्यायिक मजिस्ट्रेट की लिखित अनुमति अनिवार्य है।
  • • पुरुष पुलिसकर्मी महिला को हाथ नहीं लगा सकता।
मौके पर क्या कहें और क्या करें
  1. पुलिस को CrPC धारा 46(4) / BNSS 43(5) का हवाला दें।
  2. न्यायिक मजिस्ट्रेट का लिखित आदेश दिखाने की मांग करें।
  3. महिला पुलिसकर्मी और अपने वकील की उपस्थिति पर जोर दें।
  4. तुरंत 112 या महिला हेल्पलाइन 1091 पर कॉल करें।
AI से पूछें (आगे क्या करें)
Home Interrogation ⛔ CANNOT CALL TO POLICE STATION 🌐 अखिल भारतीय कानून

क्या पुलिस किसी महिला, 15 साल से कम के बच्चे या बुजुर्ग को पूछताछ के लिए थाने बुला सकती है?

नहीं! कानूनन महिलाओं, 15 वर्ष से कम के बच्चों या 65 वर्ष से अधिक के बुजुर्गों को थाने बुलाने की मनाही है। पूछताछ उनके घर पर ही होगी।

लागू कानून व प्रावधान: Section 160(1) Proviso CrPC / Section 179(1) BNSS
संबंधित अनुच्छेद: Article 21 (Personal Dignity), Article 15(3) (अनुच्छेद 21 →) (अनुच्छेद 15 →)
अधिकारी से शांत एवं विनम्र भाषा में क्या बोलें:
🛡️ अनुच्छेद 21, 15 कवच
“धारा 160 के अनुसार महिलाओं को थाने नहीं बुलाया जा सकता। आप मेरे घर आकर बयान दर्ज करें। (संविधान के Article 21 (Personal Dignity), Article 15(3) के तहत सुरक्षित)।”
कानून क्या कहता है
  • • धारा 160 CrPC के अनुसार किसी भी महिला या 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चे को थाने आने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
  • • पूछताछ केवल उनके घर पर ही की जा सकती है।
मौके पर क्या कहें और क्या करें
  1. स्पष्ट कहें: "धारा 160 के अनुसार महिलाओं को थाने नहीं बुलाया जा सकता। आप मेरे घर आकर बयान दर्ज करें।
  2. 1091 या अपने वकील से संपर्क करें।
AI से पूछें (आगे क्या करें)
Home Safety ⚠️ IMMEDIATE PROTECTION BY LAW 🌐 अखिल भारतीय कानून

क्या पति या ससुराल वाले किसी महिला को ससुराल के घर से जबरन निकाल सकते हैं?

नहीं! घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत हर महिला को अपने साझा वैवाहिक घर में रहने का पूर्ण कानूनी अधिकार है।

लागू कानून व प्रावधान: Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 & Article 21
संबंधित अनुच्छेद: Article 21 (Right to Dignity), Article 15(3) (अनुच्छेद 21 →) (अनुच्छेद 15 →)
अधिकारी से शांत एवं विनम्र भाषा में क्या बोलें:
🛡️ अनुच्छेद 21, 15 कवच
“अधिकारी महोदय, पूरे सम्मान के साथ, Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 & Article 21 के अनुसार, घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत महिला को घर से बेदखल नहीं किया जा सकता, चाहे मकान किसी के भी नाम पर हो। संविधान के Article 21 (Right to Dignity), Article 15(3) के तहत किसी भी प्रकार का भेदभाव या मनमानी कार्रवाई वर्जित है; कृपया लिखित नियमों के अनुसार ही कार्यवाही करें।”
कानून क्या कहता है
  • • घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत महिला को घर से बेदखल नहीं किया जा सकता, चाहे मकान किसी के भी नाम पर हो।
  • • मजिस्ट्रेट तुरंत सुरक्षा आदेश और भरण-पोषण का आदेश दे सकते हैं।
मौके पर क्या कहें और क्या करें
  1. महिला हेल्पलाइन 1091 या 181 पर कॉल करें और मजिस्ट्रेट के समक्ष सुरक्षा अर्जी लगाएं।
AI से पूछें (आगे क्या करें)
Residence Right ✅ PROTECTED RIGHT 🌐 अखिल भारतीय कानून

क्या ससुराल वाले किसी महिला को वैवाहिक विवाद के दौरान घर से निकाल सकते हैं?

बिल्कुल नहीं! घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 17 के तहत हर महिला को साझा घर में रहने का अटूट अधिकार है, चाहे मकान सास-ससुर के नाम पर ही क्यों न हो।

लागू कानून व प्रावधान: Section 17 & 19, Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 & Satish Chander Ahuja v. Sneha Ahuja (2020)
संबंधित अनुच्छेद: Article 21 (Right to Shelter & Dignity) (अनुच्छेद 21 →)
अधिकारी से शांत एवं विनम्र भाषा में क्या बोलें:
🛡️ अनुच्छेद 21 कवच
“अधिकारी महोदय, पूरे सम्मान के साथ, Section 17 & 19, Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 & Satish Chander Ahuja v. Sneha Ahuja (2020) के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के अनुसार साझा घर में सास-ससुर की निजी संपत्ति भी शामिल है जहां महिला वैवाहिक जीवन में रही है। संविधान के Article 21 (Right to Shelter & Dignity) के तहत यह मेरा संवैधानिक अधिकार है; कृपया केवल निर्धारित विधिक प्रक्रिया व लिखित आदेश से ही कार्रवाई करें।”
कानून क्या कहता है
  • • सुप्रीम कोर्ट के अनुसार साझा घर में सास-ससुर की निजी संपत्ति भी शामिल है जहां महिला वैवाहिक जीवन में रही है।
मौके पर क्या कहें और क्या करें
  1. 181 महिला हेल्पलाइन पर फोन करें और कोर्ट से तुरंत निवास आदेश (Residence Order) प्राप्त करें।
AI से पूछें (आगे क्या करें)
Property Equality ⚠️ EQUAL COPARCENARY 🌐 अखिल भारतीय कानून

क्या पैतृक संपत्ति में बेटियों को बेटों के बराबर समान कानूनी अधिकार प्राप्त है?

हाँ। सुप्रीम कोर्ट ने विनीता शर्मा केस में स्पष्ट किया है कि बेटियों को जन्म से ही पैतृक संपत्ति में बेटों के बराबर अधिकार प्राप्त है।

लागू कानून व प्रावधान: Section 6, Hindu Succession (Amendment) Act, 2005 & Vineeta Sharma v. Rakesh Sharma (2020)
संबंधित अनुच्छेद: Article 14 (Gender Equality) & Article 15(1) (अनुच्छेद 14 →) (अनुच्छेद 15 →)
अधिकारी से शांत एवं विनम्र भाषा में क्या बोलें:
🛡️ अनुच्छेद 14, 15 कवच
“अधिकारी महोदय, पूरे सम्मान के साथ, Section 6, Hindu Succession (Amendment) Act, 2005 & Vineeta Sharma v. Rakesh Sharma (2020) के अनुसार, पिता के 2005 से पहले दिवंगत होने पर भी बेटी का पैतृक संपत्ति पर समान हक बना रहता है। संविधान के Article 14 (Gender Equality) & Article 15(1) के तहत किसी भी प्रकार का भेदभाव या मनमानी कार्रवाई वर्जित है; कृपया लिखित नियमों के अनुसार ही कार्यवाही करें।”
कानून क्या कहता है
  • • पिता के 2005 से पहले दिवंगत होने पर भी बेटी का पैतृक संपत्ति पर समान हक बना रहता है।
मौके पर क्या कहें और क्या करें
  1. राजस्व रिकॉर्ड निकालें और हक न मिलने पर दीवानी अदालत में बंटवारे (Partition Suit) का मुकदमा दाखिल करें।
AI से पूछें (आगे क्या करें)
Workplace Safety ✅ MANDATORY ICC 🌐 अखिल भारतीय कानून

क्या हर कंपनी में महिला सुरक्षा के लिए आंतरिक शिकायत समिति (ICC) होना अनिवार्य है?

हाँ। 10 या अधिक कर्मचारियों वाले प्रत्येक संस्थान में वरिष्ठ महिला की अध्यक्षता में आंतरिक शिकायत समिति (ICC) होना कानूनी रूप से अनिवार्य है।

लागू कानून व प्रावधान: Sexual Harassment of Women at Workplace (Prevention, Prohibition and Redressal) Act, 2013 (POSH Act)
संबंधित अनुच्छेद: Article 14, Article 19(1)(g) & Article 21 (Safe Working Environment) (अनुच्छेद 14 →) (अनुच्छेद 19 →) (अनुच्छेद 21 →)
अधिकारी से शांत एवं विनम्र भाषा में क्या बोलें:
🛡️ अनुच्छेद 14, 19, 21 कवच
“अधिकारी महोदय, पूरे सम्मान के साथ, Sexual Harassment of Women at Workplace (Prevention, Prohibition and Redressal) Act, 2013 (POSH Act) के अनुसार, समिति में कम से कम 50% महिला सदस्य और एक बाहरी सामाजिक संस्था का सदस्य होना अनिवार्य है। संविधान के Article 14, Article 19(1)(g) & Article 21 (Safe Working Environment) के तहत यह मेरी मौलिक स्वतंत्रता है; यदि कोई रोक है तो कृपया सक्षम अधिकारी का लिखित आदेश दिखाएं।”
कानून क्या कहता है
  • • समिति में कम से कम 50% महिला सदस्य और एक बाहरी सामाजिक संस्था का सदस्य होना अनिवार्य है।
मौके पर क्या कहें और क्या करें
  1. घटना के 3 महीने के भीतर समिति को लिखित शिकायत दें। 90 दिनों में जांच पूरी होना अनिवार्य है।
AI से पूछें (आगे क्या करें)
Bodily Autonomy ✅ REPRODUCTIVE RIGHT 🌐 अखिल भारतीय कानून

क्या बालिग महिला बिना पति की अनुमति के 24 सप्ताह तक गर्भपात (Abortion) करा सकती है?

हाँ। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार प्रजनन का अधिकार केवल महिला का है; कानूनी सीमा (24 सप्ताह) में गर्भपात के लिए पति या ससुराल वालों की सहमति की आवश्यकता नहीं है।

लागू कानून व प्रावधान: Medical Termination of Pregnancy (Amendment) Act, 2021 & Supreme Court Landmark Ruling (2022)
संबंधित अनुच्छेद: Article 21 (Right to Bodily Autonomy & Reproductive Choice) (अनुच्छेद 21 →)
अधिकारी से शांत एवं विनम्र भाषा में क्या बोलें:
🛡️ अनुच्छेद 21 कवच
“अधिकारी महोदय, पूरे सम्मान के साथ, Medical Termination of Pregnancy (Amendment) Act, 2021 & Supreme Court Landmark Ruling (2022) के अनुसार, यह अधिकार विवाहित और अविवाहित सभी महिलाओं को समान रूप से प्राप्त है। संविधान के Article 21 (Right to Bodily Autonomy & Reproductive Choice) के तहत यह मेरा संवैधानिक अधिकार है; कृपया केवल निर्धारित विधिक प्रक्रिया व लिखित आदेश से ही कार्रवाई करें।”
कानून क्या कहता है
  • • यह अधिकार विवाहित और अविवाहित सभी महिलाओं को समान रूप से प्राप्त है।
मौके पर क्या कहें और क्या करें
  1. सरकारी या मान्यता प्राप्त अस्पताल में डॉक्टर से परामर्श लें, केवल आपकी सहमति पर्याप्त है।
AI से पूछें (आगे क्या करें)
Livelihood Shield ⚠️ INTERIM RELIEF IN 60 DAYS 🌐 अखिल भारतीय कानून

क्या अलग रह रही या तलाकशुदा महिला 60 दिनों में अंतरिम गुजारा भत्ता (Maintenance) पा सकती है?

हाँ। धारा 125 (BNSS 144) के तहत पति से गुजारा भत्ता पाना पत्नी और बच्चों का कानूनी अधिकार है और 60 दिनों में अंतरिम फैसला होना अनिवार्य है।

लागू कानून व प्रावधान: Section 125 CrPC / Section 144 Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 & Rajnesh v. Neha (2020)
संबंधित अनुच्छेद: Article 15(3) & Article 21 (Protection of Women & Children) (अनुच्छेद 15 →) (अनुच्छेद 21 →)
अधिकारी से शांत एवं विनम्र भाषा में क्या बोलें:
🛡️ अनुच्छेद 15, 21 कवच
“अधिकारी महोदय, पूरे सम्मान के साथ, Section 125 CrPC / Section 144 Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 & Rajnesh v. Neha (2020) के अनुसार, पति को अपनी संपत्ति और आय का पूरा हलफनामा कोर्ट में जमा करना होता है। संविधान के Article 15(3) & Article 21 (Protection of Women & Children) के तहत किसी भी प्रकार का भेदभाव या मनमानी कार्रवाई वर्जित है; कृपया लिखित नियमों के अनुसार ही कार्यवाही करें।”
कानून क्या कहता है
  • • पति को अपनी संपत्ति और आय का पूरा हलफनामा कोर्ट में जमा करना होता है।
  • • गुजारा भत्ता न देने पर पति की संपत्ति कुर्क की जा सकती है या जेल भेजा जा सकता है।
मौके पर क्या कहें और क्या करें
  1. फैमिली कोर्ट में धारा 125 के तहत भरण-पोषण की अर्जी लगाएं।
AI से पूछें (आगे क्या करें)
← पिछला 1 2 अगला →
EN-IN • STUDIO VOICE
Preparing studio neural voice...