मातृत्व अवकाश के बाद काम पर लौटी महिला: क्या नियोक्ता द्वारा नर्सिंग ब्रेक और क्रेच सुविधा अनिवार्य है?
अनिवार्य है! मातृत्व लाभ अधिनियम की धारा 11 के तहत, काम पर लौटने वाली महिला कर्मचारी को बच्चे के 15 महीने का होने तक सामान्य लंच के अलावा प्रतिदिन 2 वैतनिक नर्सिंग ब्रेक पाने का कानूनी अधिकार है।
- • 1. बच्चे के 15 महीने का होने तक रोजाना 2 नर्सिंग ब्रेक मिलेंगे, इसके लिए वेतन में कोई कटौती नहीं की जा सकती।
- • 2. 50 या अधिक कर्मचारियों वाले हर संस्थान में 500 मीटर के दायरे में क्रेच (शिशुगृह) होना अनिवार्य है।
- • 3. मां को दिन भर में कम से कम 4 बार क्रेच जाकर बच्चे की देखभाल करने की अनुमति देना अनिवार्य है।
- 1. मातृत्व अवकाश के बाद काम शुरू करते समय एचआर को धारा 11 के तहत लिखित सूचना दें।
- 2. अपने 2 नर्सिंग ब्रेक का समय ईमेल में स्पष्ट रूप से बताएं।
- 3. कंपनी मना करे, तो श्रम आयुक्त (Labour Commissioner) को औपचारिक शिकायत दर्ज कराएं।
- 4. मातृत्व नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के निदेशकों को 1 साल तक की जेल हो सकती है।
एसिड अटैक पीड़िता: क्या निजी और सरकारी अस्पताल 100% मुफ्त इलाज और सर्जरी करने के लिए बाध्य हैं?
अनिवार्य है! बीएनएसएस की धारा 397 और सुप्रीम कोर्ट (लक्ष्मी बनाम भारत संघ) के अनुसार, सभी निजी और सरकारी अस्पतालों को एसिड अटैक पीड़िता को तुरंत भर्ती कर मुफ्त प्राथमिक उपचार, सर्जरी और दवाएं देना अनिवार्य है।
- • 1. कोई भी निजी अस्पताल एसिड अटैक पीड़िता को भर्ती करने से मना नहीं कर सकता और न ही अग्रिम पैसे मांग सकता है।
- • 2. इलाज में मुफ्त सर्जरी, आईसीयू बेड, दवाइयां और पुनर्वास सहायता शामिल है।
- • 3. इलाज से इंकार करने वाले अस्पताल प्रशासन के खिलाफ धारा 198 BNS के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज होता है।
- 1. पीड़िता को तुरंत नजदीकी अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में लेकर जाएं।
- 2. ड्यूटी डॉक्टर से कहें: "सुप्रीम कोर्ट के लक्ष्मी निर्णय के अनुसार इलाज पूरी तरह मुफ्त और कैशलेस होगा।\"
- 3. पुलिस को सूचना देकर धारा 124 BNS के तहत एफआईआर और एमएलसी बनवाएं।
- 4. जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) से पीड़िता मुआवजा योजना के तहत सहायता प्राप्त करें।
सफर में महिला से अपराध: क्या भारत के किसी भी थाने में जीरो एफआईआर (Zero FIR) दर्ज हो सकती है?
हाँ! बीएनएसएस की धारा 173(1) और गृह मंत्रालय के आदेशानुसार, महिला अपराध स्थल की चिंता किए बिना देश के किसी भी थाने में "जीरो एफआईआर" दर्ज करा सकती है। पुलिस क्षेत्राधिकार का बहाना बनाकर मना नहीं कर सकती।
- • 1. जीरो एफआईआर को '0' नंबर दिया जाता है और बिना क्षेत्राधिकार की बहस के तुरंत दर्ज किया जाता है।
- • 2. संबंधित थाना प्राथमिक साक्ष्य एकत्र कर और मेडिकल कराकर केस उचित थाने को ट्रांसफर करता है।
- • 3. जीरो एफआईआर दर्ज करने से इंकार करने वाले अधिकारी पर धारा 199 BNS के तहत जेल का प्रावधान है।
- 1. निकटतम थाने में जाएं और महिला हेल्प डेस्क अधिकारी से संपर्क करें।
- 2. कहें: "बीएनएसएस की धारा 173(1) के तहत मेरी जीरो एफआईआर दर्ज कर पावती पर्ची दी जाए।\"
- 3. यौन अपराध के मामलों में बयान केवल महिला पुलिस अधिकारी ही दर्ज करेगी।
- 4. थाने से निकलने से पहले जीरो एफआईआर की प्रमाणित मुफ्त प्रति प्राप्त करें।
वैवाहिक अलगाव या तलाक: क्या स्त्रीधन (सोना, उपहार, नकदी) पर महिला का पूर्ण और एकमात्र अधिकार होता है?
पूर्ण और एकमात्र अधिकार! सुप्रीम कोर्ट (प्रतिभा रानी केस) के अनुसार, स्त्रीधन (सोना, आभूषण, उपहार) पर केवल और केवल महिला का हक है। पति या ससुराल वाले यदि इसे रोकने की कोशिश करें तो यह आपराधिक विश्वासघात (धारा 316 BNS) का जुर्म है।
- • 1. स्त्रीधन में शादी में माता-पिता, रिश्तेदारों या ससुराल पक्ष द्वारा दिए गए सभी जेवर, कपड़े और उपहार शामिल हैं।
- • 2. पति या ससुराल वाले स्त्रीधन के केवल संरक्षक (ट्रस्टी) होते हैं, उनका इस पर कोई मालिकाना हक नहीं होता।
- • 3. मांगने पर स्त्रीधन वापस न करना धारा 316 BNS के तहत 3 साल की जेल वाला संज्ञेय अपराध है।
- 1. सभी गहनों, बिलों और शादी के फोटो की विस्तृत सूची (इन्वेंट्री) तैयार करें।
- 2. वकील के माध्यम से ससुराल वालों को 15 दिनों में स्त्रीधन वापस करने का लीगल नोटिस भेजें।
- 3. वापस न करने पर घरेलू हिंसा कानून (DV Act) की धारा 12 के तहत कोर्ट में अर्जी लगाएं।
- 4. संबंधित थाने में धारा 316 BNS (आपराधिक अमानत में खयानत) के तहत एफआईआर दर्ज कराएं।
कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न: क्या सहकर्मी या तीसरा व्यक्ति पीड़िता की ओर से पॉश (POSH) शिकायत दर्ज करा सकता है?
हाँ! पॉश अधिनियम 2013 के अनुसार, यदि पीड़िता शारीरिक या मानसिक आघात के कारण स्वयं शिकायत नहीं कर पा रही है, तो उसकी लिखित सहमति से कोई भी सहकर्मी, रिश्तेदार या मित्र आंतरिक शिकायत समिति (ICC) में शिकायत कर सकता है।
- • 1. आंतरिक शिकायत समिति (ICC) केवल इस आधार पर शिकायत खारिज नहीं कर सकती कि यह सहकर्मी द्वारा दी गई है।
- • 2. समिति को 7 दिनों में जांच शुरू कर 90 दिनों के भीतर पूरी जांच रिपोर्ट सौंपना अनिवार्य है।
- • 3. शिकायतकर्ता को नौकरी से निकाले जाने या अप्रेजल खराब किए जाने के खिलाफ कानूनन पूर्ण संरक्षण प्राप्त है।
- 1. तारीख, स्थान, गवाहों और उत्पीड़न की घटनाओं का विवरण लिखकर आंतरिक समिति (ICC) को ईमेल भेजें।
- 2. यदि पीड़िता की ओर से भेज रहे हैं तो उसकी लिखित सहमति पत्र संलग्न करें।
- 3. धारा 12 के तहत आरोपी का तबादला या पीड़िता के लिए वर्क फ्रॉम होम जैसी अंतरिम राहत की मांग करें।
- 4. कंपनी में समिति न होने पर जिले के लोकल कंप्लेंट्स कमेटी (LCC) में शिकायत दर्ज कराएं।
नाइट शिफ्ट में काम करने वाली महिलाएं (शाम 7 से सुबह 6): क्या कंपनी द्वारा घर तक कैब और सुरक्षा गार्ड अनिवार्य है?
अनिवार्य है! दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान नियमों के अनुसार, शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे के बीच महिला कर्मचारियों को काम पर रखने वाली कंपनियों को जीपीएस युक्त कैब, सुरक्षा गार्ड और घर के दरवाजे तक सुरक्षित छोड़ने की व्यवस्था करना अनिवार्य है।
- • 1. कंपनियां रात में महिलाओं को अपने साधन से आने-जाने के लिए मजबूर नहीं कर सकतीं, कैब की जिम्मेदारी कंपनी की है।
- • 2. कैब में चालू जीपीएस ट्रैकर और आपातकालीन एसओएस (SOS) बटन होना अनिवार्य है।
- • 3. यदि महिला कर्मचारी कैब में पहली पिक-अप या आखिरी ड्रॉप है, तो कैब में सुरक्षा गार्ड का होना अनिवार्य है।
- 1. रात में कैब न मिलने पर एचआर और ट्रांसपोर्ट विभाग को लिखित शिकायत भेजें।
- 2. कंपनी ऐप पर ड्राइवर का पुलिस वेरिफिकेशन और जीपीएस लोकेशन जरूर चेक करें।
- 3. रात में असुरक्षित महसूस होने पर तुरंत 112 डायल कर पुलिस पेट्रोलिंग की मदद लें।
- 4. श्रम आयुक्त (Labour Commissioner) को सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की शिकायत करें।