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Maternity Rights
✅ 26 WEEKS MANDATORY
🌐 अखिल भारतीय कानून
क्या कंपनी किसी गर्भवती महिला को नौकरी से निकाल सकती है या 26 सप्ताह की सवैतनिक मैटरनिटी लीव देने से मना कर सकती है?
सख्ती से गैरकानूनी! मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत हर महिला को 26 सप्ताह की पूरी तनख्वाह के साथ छुट्टी पाने का हक है। गर्भावस्था के दौरान नौकरी से निकालना संगीन अपराध है।
लागू कानून व प्रावधान:
Section 5 & Section 12, Maternity Benefit (Amendment) Act, 2017
अधिकारी से शांत एवं विनम्र भाषा में क्या बोलें:
🛡️ अनुच्छेद 15, 42 कवच
“एचआर / प्रबंधन महोदय, Section 5 & Section 12, Maternity Benefit (Amendment) Act, 2017 के अनुसार, छुट्टी के दौरान नौकरी से निकालना या वेतन रोकना कानूनन अपराध है। संविधान के Article 15(3) & Article 42 (Maternity Relief) के तहत वैध पारिश्रमिक, मातृत्व लाभ या मूल दस्तावेज रोकना असंवैधानिक है; कृपया नियमानुसार निपटान करें।”
कानून क्या कहता है
- • छुट्टी के दौरान नौकरी से निकालना या वेतन रोकना कानूनन अपराध है।
मौके पर क्या कहें और क्या करें
- एचआर को लिखित मेडिकल प्रमाण पत्र दें और छंटनी होने पर लेबर कमिश्नर में शिकायत करें।
Statutory Benefit
✅ MANDATORY AFTER 5 YEARS
🌐 अखिल भारतीय कानून
क्या 5 साल की निरंतर सेवा पूरी होने के बाद कंपनी ग्रेच्युटी देने से इनकार कर सकती है?
नहीं। 5 साल की सेवा पूरी होने पर ग्रेच्युटी पाना कर्मचारी का वैधानिक अधिकार है। कंपनी इसे अपनी मर्जी से रोक नहीं सकती।
लागू कानून व प्रावधान:
Payment of Gratuity Act, 1972 (Section 4)
संबंधित अनुच्छेद:
Article 21 (Social Security & Livelihood)
(अनुच्छेद 21 →)
अधिकारी से शांत एवं विनम्र भाषा में क्या बोलें:
🛡️ अनुच्छेद 21 कवच
“एचआर / प्रबंधन महोदय, Payment of Gratuity Act, 1972 (Section 4) के अनुसार, 30 दिनों से अधिक की देरी होने पर कंपनी को ब्याज सहित भुगतान करना होगा। संविधान के Article 21 (Social Security & Livelihood) के तहत यह मेरा संवैधानिक अधिकार है; कृपया केवल निर्धारित विधिक प्रक्रिया व लिखित आदेश से ही कार्रवाई करें।”
कानून क्या कहता है
- • 30 दिनों से अधिक की देरी होने पर कंपनी को ब्याज सहित भुगतान करना होगा।
मौके पर क्या कहें और क्या करें
- इस्तीफे के बाद फॉर्म I भरकर कंपनी को दें और न मिलने पर लेबर कोर्ट में फॉर्म N जमा करें।