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🇮🇳 भारत का सर्वोच्च विधान • 26 जनवरी 1950 को लागू

भारत का संपूर्ण संविधान: डिजिटल नागरिक महाग्रंथ

विश्व के सबसे विस्तृत लिखित संविधान के 395 अनुच्छेदों, 25 भागों और 12 अनुसूचियों का अध्ययन करें सरल नागरिक भाषा, संविधान सभा के ऐतिहासिक विमर्श और सर्वोच्च अदालत के फैसलों के साथ।

395+
अनुच्छेद (Articles)
25
भाग (Thematic Parts)
12
अनुसूचियां (Schedules)
106
संशोधन (Amendments)
📜 उद्देशिका “हम, भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व-सम्पन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए...”
“हम, भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व-सम्पन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को: सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय; विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता; प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर, 1949 ईस्वी को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।”
Page 14 • सरल नागरिक भाषा में
अनुच्छेद 325
Part XV

धर्म, मूलवंश, जाति या लिंग के आधार पर किसी व्यक्ति का निर्वाचक-नामावली में सम्मिलित किए जाने के लिए अपात्र न होना

संविधान के भाग XV (निर्वाचन) का अनुच्छेद 325 'धर्म, मूलवंश, जाति या लिंग के आधार पर किसी व्यक्ति का निर्वाचक-नामावली में सम्मिलित किए जाने के लिए अपात्र न होना' का प्रावधान करता है। यह स्वतंत्र निर्वाचन आयोग (324), धर्म, मूलवंश, जाति या लिंग के आधार पर मतदाता सूची में किसी भी भेदभाव पर रोक (325), 18 वर्ष के प्रत्येक नागरिक के मताधिकार (326), चुनाव कानून बनाने की शक्ति (327-328) और निर्वाचन याचिकाओं की प्रक्रिया (329) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 326
Part XV

लोक सभा और राज्यों की विधान सभाओं के लिए निर्वाचनों का वयस्क मताधिकार (18+ वोट के अधिकार) के आधार पर होना

जब 1950 में भारतीय संविधान लागू हुआ, तो अनुच्छेद 326 ने मानव इतिहास का सबसे साहसी लोकतांत्रिक प्रयोग किया: जहां पश्चिमी देशों को महिलाओं और गरीबों को वोट का अधिकार देने में सदियां लग गईं, वहीं भारत ने पहले ही दिन से हर वयस्क नागरिक—चाहे वह पुरुष हो या महिला, उद्योगपति हो या दिहाड़ी मजदूर, पढ़ा-लिखा हो या निरक्षर—को बराबर का मताधिकार दिया। मूल रूप से मतदान की आयु 21 वर्ष थी, जिसे 61वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1988 द्वारा घटाकर 18 वर्ष कर दिया गया। अनुच्छेद 325 (जो धर्म, जाति या लिंग के आधार पर मतदाता सूची से बाहर करने पर रोक लगाता है) के साथ मिलकर अनुच्छेद 326 डॉ. आंबेडकर के 'एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य' के सिद्धांत को जीवंत करता है।

अनुच्छेद 327
Part XV

विधान-मंडलों के लिए निर्वाचनों के संबंध में उपबंध करने की संसद की शक्ति

संविधान के भाग XV (निर्वाचन) का अनुच्छेद 327 'विधान-मंडलों के लिए निर्वाचनों के संबंध में उपबंध करने की संसद की शक्ति' का प्रावधान करता है। यह स्वतंत्र निर्वाचन आयोग (324), धर्म, मूलवंश, जाति या लिंग के आधार पर मतदाता सूची में किसी भी भेदभाव पर रोक (325), 18 वर्ष के प्रत्येक नागरिक के मताधिकार (326), चुनाव कानून बनाने की शक्ति (327-328) और निर्वाचन याचिकाओं की प्रक्रिया (329) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 328
Part XV

किसी राज्य के विधान-मंडल के लिए निर्वाचनों के संबंध में उपबंध करने की उस विधान-मंडल की शक्ति

संविधान के भाग XV (निर्वाचन) का अनुच्छेद 328 'किसी राज्य के विधान-मंडल के लिए निर्वाचनों के संबंध में उपबंध करने की उस विधान-मंडल की शक्ति' का प्रावधान करता है। यह स्वतंत्र निर्वाचन आयोग (324), धर्म, मूलवंश, जाति या लिंग के आधार पर मतदाता सूची में किसी भी भेदभाव पर रोक (325), 18 वर्ष के प्रत्येक नागरिक के मताधिकार (326), चुनाव कानून बनाने की शक्ति (327-328) और निर्वाचन याचिकाओं की प्रक्रिया (329) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 329
Part XV

निर्वाचन संबंधी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप का वर्जन

संविधान के भाग XV (निर्वाचन) का अनुच्छेद 329 'निर्वाचन संबंधी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप का वर्जन' का प्रावधान करता है। यह स्वतंत्र निर्वाचन आयोग (324), धर्म, मूलवंश, जाति या लिंग के आधार पर मतदाता सूची में किसी भी भेदभाव पर रोक (325), 18 वर्ष के प्रत्येक नागरिक के मताधिकार (326), चुनाव कानून बनाने की शक्ति (327-328) और निर्वाचन याचिकाओं की प्रक्रिया (329) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 330
Part XVI

लोक सभा में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थानों का आरक्षण

संविधान के भाग XVI का अनुच्छेद 330 'लोक सभा में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थानों का आरक्षण' का उपबंध करता है। यह लोकसभा (330) और राज्य विधानसभाओं (332) में अनुसूचित जातियों (SC) व अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए सीटों के आरक्षण, सेवाओं में दावों (335), तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (338), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (338A) और पिछड़े वर्गों के संवैधानिक संरक्षण को सुनिश्चित करता है। Note: 104वें संविधान संशोधन (2019) द्वारा एंग्लो-इंडियन नामांकन को आगे नहीं बढ़ाया गया।

अनुच्छेद 331
Part XVI

लोक सभा में आंग्ल-भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व

संविधान के भाग XVI का अनुच्छेद 331 'लोक सभा में आंग्ल-भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व' का उपबंध करता है। यह लोकसभा (330) और राज्य विधानसभाओं (332) में अनुसूचित जातियों (SC) व अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए सीटों के आरक्षण, सेवाओं में दावों (335), तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (338), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (338A) और पिछड़े वर्गों के संवैधानिक संरक्षण को सुनिश्चित करता है। Note: 104वें संविधान संशोधन (2019) द्वारा एंग्लो-इंडियन नामांकन को आगे नहीं बढ़ाया गया।

अनुच्छेद 332
Part XVI

राज्यों की विधान सभाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थानों का आरक्षण

संविधान के भाग XVI का अनुच्छेद 332 'राज्यों की विधान सभाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थानों का आरक्षण' का उपबंध करता है। यह लोकसभा (330) और राज्य विधानसभाओं (332) में अनुसूचित जातियों (SC) व अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए सीटों के आरक्षण, सेवाओं में दावों (335), तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (338), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (338A) और पिछड़े वर्गों के संवैधानिक संरक्षण को सुनिश्चित करता है। Note: 104वें संविधान संशोधन (2019) द्वारा एंग्लो-इंडियन नामांकन को आगे नहीं बढ़ाया गया।

अनुच्छेद 333
Part XVI

राज्यों की विधान सभाओं में आंग्ल-भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व

संविधान के भाग XVI का अनुच्छेद 333 'राज्यों की विधान सभाओं में आंग्ल-भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व' का उपबंध करता है। यह लोकसभा (330) और राज्य विधानसभाओं (332) में अनुसूचित जातियों (SC) व अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए सीटों के आरक्षण, सेवाओं में दावों (335), तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (338), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (338A) और पिछड़े वर्गों के संवैधानिक संरक्षण को सुनिश्चित करता है। Note: 104वें संविधान संशोधन (2019) द्वारा एंग्लो-इंडियन नामांकन को आगे नहीं बढ़ाया गया।

अनुच्छेद 334
Part XVI

स्थानों के आरक्षण और विशेष प्रतिनिधित्व का निश्चित अवधि के पश्चात् न रहना

संविधान के भाग XVI का अनुच्छेद 334 'स्थानों के आरक्षण और विशेष प्रतिनिधित्व का निश्चित अवधि के पश्चात् न रहना' का उपबंध करता है। यह लोकसभा (330) और राज्य विधानसभाओं (332) में अनुसूचित जातियों (SC) व अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए सीटों के आरक्षण, सेवाओं में दावों (335), तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (338), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (338A) और पिछड़े वर्गों के संवैधानिक संरक्षण को सुनिश्चित करता है। Note: 104वें संविधान संशोधन (2019) द्वारा एंग्लो-इंडियन नामांकन को आगे नहीं बढ़ाया गया।

अनुच्छेद 335
Part XVI

सेवाओं और पदों के लिए अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के दावे

संविधान के भाग XVI का अनुच्छेद 335 'सेवाओं और पदों के लिए अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के दावे' का उपबंध करता है। यह लोकसभा (330) और राज्य विधानसभाओं (332) में अनुसूचित जातियों (SC) व अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए सीटों के आरक्षण, सेवाओं में दावों (335), तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (338), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (338A) और पिछड़े वर्गों के संवैधानिक संरक्षण को सुनिश्चित करता है। Note: 104वें संविधान संशोधन (2019) द्वारा एंग्लो-इंडियन नामांकन को आगे नहीं बढ़ाया गया।

अनुच्छेद 336
Part XVI

कुछ सेवाओं में आंग्ल-भारतीय समुदाय के लिए विशेष उपबंध

संविधान के भाग XVI का अनुच्छेद 336 'कुछ सेवाओं में आंग्ल-भारतीय समुदाय के लिए विशेष उपबंध' का उपबंध करता है। यह लोकसभा (330) और राज्य विधानसभाओं (332) में अनुसूचित जातियों (SC) व अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए सीटों के आरक्षण, सेवाओं में दावों (335), तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (338), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (338A) और पिछड़े वर्गों के संवैधानिक संरक्षण को सुनिश्चित करता है। Note: 104वें संविधान संशोधन (2019) द्वारा एंग्लो-इंडियन नामांकन को आगे नहीं बढ़ाया गया।

अनुच्छेद 337
Part XVI

आंग्ल-भारतीय समुदाय के फायदे के लिए शैक्षिक अनुदान के लिए विशेष उपबंध

संविधान के भाग XVI का अनुच्छेद 337 'आंग्ल-भारतीय समुदाय के फायदे के लिए शैक्षिक अनुदान के लिए विशेष उपबंध' का उपबंध करता है। यह लोकसभा (330) और राज्य विधानसभाओं (332) में अनुसूचित जातियों (SC) व अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए सीटों के आरक्षण, सेवाओं में दावों (335), तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (338), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (338A) और पिछड़े वर्गों के संवैधानिक संरक्षण को सुनिश्चित करता है। Note: 104वें संविधान संशोधन (2019) द्वारा एंग्लो-इंडियन नामांकन को आगे नहीं बढ़ाया गया।

अनुच्छेद 338
Part XVI

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC)

संविधान के भाग XVI का अनुच्छेद 338 'राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC)' का उपबंध करता है। यह लोकसभा (330) और राज्य विधानसभाओं (332) में अनुसूचित जातियों (SC) व अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए सीटों के आरक्षण, सेवाओं में दावों (335), तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (338), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (338A) और पिछड़े वर्गों के संवैधानिक संरक्षण को सुनिश्चित करता है। Note: 104वें संविधान संशोधन (2019) द्वारा एंग्लो-इंडियन नामांकन को आगे नहीं बढ़ाया गया।

अनुच्छेद 338A
Part XVI

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST)

संविधान के भाग XVI का अनुच्छेद 338A 'राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST)' का उपबंध करता है। यह लोकसभा (330) और राज्य विधानसभाओं (332) में अनुसूचित जातियों (SC) व अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए सीटों के आरक्षण, सेवाओं में दावों (335), तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (338), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (338A) और पिछड़े वर्गों के संवैधानिक संरक्षण को सुनिश्चित करता है। Note: 104वें संविधान संशोधन (2019) द्वारा एंग्लो-इंडियन नामांकन को आगे नहीं बढ़ाया गया।

अनुच्छेद 339
Part XVI

अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन और अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के बारे में संघ का नियंत्रण

संविधान के भाग XVI का अनुच्छेद 339 'अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन और अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के बारे में संघ का नियंत्रण' का उपबंध करता है। यह लोकसभा (330) और राज्य विधानसभाओं (332) में अनुसूचित जातियों (SC) व अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए सीटों के आरक्षण, सेवाओं में दावों (335), तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (338), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (338A) और पिछड़े वर्गों के संवैधानिक संरक्षण को सुनिश्चित करता है। Note: 104वें संविधान संशोधन (2019) द्वारा एंग्लो-इंडियन नामांकन को आगे नहीं बढ़ाया गया।

अनुच्छेद 340
Part XVI

पिछड़े वर्गों की दशाओं के अन्वेषण के लिए आयोग की नियुक्ति

संविधान के भाग XVI का अनुच्छेद 340 'पिछड़े वर्गों की दशाओं के अन्वेषण के लिए आयोग की नियुक्ति' का उपबंध करता है। यह लोकसभा (330) और राज्य विधानसभाओं (332) में अनुसूचित जातियों (SC) व अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए सीटों के आरक्षण, सेवाओं में दावों (335), तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (338), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (338A) और पिछड़े वर्गों के संवैधानिक संरक्षण को सुनिश्चित करता है। Note: 104वें संविधान संशोधन (2019) द्वारा एंग्लो-इंडियन नामांकन को आगे नहीं बढ़ाया गया।

अनुच्छेद 341
Part XVI

अनुसूचित जातियां (Scheduled Castes)

संविधान के भाग XVI का अनुच्छेद 341 'अनुसूचित जातियां (Scheduled Castes)' का उपबंध करता है। यह लोकसभा (330) और राज्य विधानसभाओं (332) में अनुसूचित जातियों (SC) व अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए सीटों के आरक्षण, सेवाओं में दावों (335), तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (338), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (338A) और पिछड़े वर्गों के संवैधानिक संरक्षण को सुनिश्चित करता है। Note: 104वें संविधान संशोधन (2019) द्वारा एंग्लो-इंडियन नामांकन को आगे नहीं बढ़ाया गया।

अनुच्छेद 342
Part XVI

अनुसूचित जनजातियां (Scheduled Tribes)

संविधान के भाग XVI का अनुच्छेद 342 'अनुसूचित जनजातियां (Scheduled Tribes)' का उपबंध करता है। यह लोकसभा (330) और राज्य विधानसभाओं (332) में अनुसूचित जातियों (SC) व अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए सीटों के आरक्षण, सेवाओं में दावों (335), तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (338), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (338A) और पिछड़े वर्गों के संवैधानिक संरक्षण को सुनिश्चित करता है। Note: 104वें संविधान संशोधन (2019) द्वारा एंग्लो-इंडियन नामांकन को आगे नहीं बढ़ाया गया।

अनुच्छेद 343
Part XVII

संघ की राजभाषा

संविधान के भाग XVII (राजभाषा) का अनुच्छेद 343 'संघ की राजभाषा' का उपबंध करता है। यह संघ की राजभाषा (343), राज्यों की अपनी आधिकारिक भाषाओं (345-347), सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट की न्यायिक भाषा (348), किसी भी भाषा में अपनी शिकायत/अभ्यावेदन देने के नागरिक अधिकार (350) और मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा की सुविधा (350A) को संरक्षित करता है।

अनुच्छेद 344
Part XVII

राजभाषा के संबंध में आयोग और संसद की समिति

संविधान के भाग XVII (राजभाषा) का अनुच्छेद 344 'राजभाषा के संबंध में आयोग और संसद की समिति' का उपबंध करता है। यह संघ की राजभाषा (343), राज्यों की अपनी आधिकारिक भाषाओं (345-347), सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट की न्यायिक भाषा (348), किसी भी भाषा में अपनी शिकायत/अभ्यावेदन देने के नागरिक अधिकार (350) और मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा की सुविधा (350A) को संरक्षित करता है।

अनुच्छेद 345
Part XVII

राज्य की राजभाषा या राजभाषाएं

संविधान के भाग XVII (राजभाषा) का अनुच्छेद 345 'राज्य की राजभाषा या राजभाषाएं' का उपबंध करता है। यह संघ की राजभाषा (343), राज्यों की अपनी आधिकारिक भाषाओं (345-347), सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट की न्यायिक भाषा (348), किसी भी भाषा में अपनी शिकायत/अभ्यावेदन देने के नागरिक अधिकार (350) और मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा की सुविधा (350A) को संरक्षित करता है।

अनुच्छेद 346
Part XVII

एक राज्य और दूसरे राज्य के बीच या किसी राज्य और संघ के बीच पत्रादि की राजभाषा

संविधान के भाग XVII (राजभाषा) का अनुच्छेद 346 'एक राज्य और दूसरे राज्य के बीच या किसी राज्य और संघ के बीच पत्रादि की राजभाषा' का उपबंध करता है। यह संघ की राजभाषा (343), राज्यों की अपनी आधिकारिक भाषाओं (345-347), सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट की न्यायिक भाषा (348), किसी भी भाषा में अपनी शिकायत/अभ्यावेदन देने के नागरिक अधिकार (350) और मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा की सुविधा (350A) को संरक्षित करता है।

अनुच्छेद 347
Part XVII

किसी राज्य की जनसंख्या के किसी अनुभाग द्वारा बोली जाने वाली भाषा के संबंध में विशेष उपबंध

संविधान के भाग XVII (राजभाषा) का अनुच्छेद 347 'किसी राज्य की जनसंख्या के किसी अनुभाग द्वारा बोली जाने वाली भाषा के संबंध में विशेष उपबंध' का उपबंध करता है। यह संघ की राजभाषा (343), राज्यों की अपनी आधिकारिक भाषाओं (345-347), सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट की न्यायिक भाषा (348), किसी भी भाषा में अपनी शिकायत/अभ्यावेदन देने के नागरिक अधिकार (350) और मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा की सुविधा (350A) को संरक्षित करता है।

अनुच्छेद 348
Part XVII

उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों में और अधिनियमों, विधेयकों आदि के लिए प्रयोग की जाने वाली भाषा

संविधान के भाग XVII (राजभाषा) का अनुच्छेद 348 'उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों में और अधिनियमों, विधेयकों आदि के लिए प्रयोग की जाने वाली भाषा' का उपबंध करता है। यह संघ की राजभाषा (343), राज्यों की अपनी आधिकारिक भाषाओं (345-347), सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट की न्यायिक भाषा (348), किसी भी भाषा में अपनी शिकायत/अभ्यावेदन देने के नागरिक अधिकार (350) और मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा की सुविधा (350A) को संरक्षित करता है।

अनुच्छेद 349
Part XVII

भाषा से संबंधित कुछ विधियां अधिनियमित करने के लिए विशेष प्रक्रिया

संविधान के भाग XVII (राजभाषा) का अनुच्छेद 349 'भाषा से संबंधित कुछ विधियां अधिनियमित करने के लिए विशेष प्रक्रिया' का उपबंध करता है। यह संघ की राजभाषा (343), राज्यों की अपनी आधिकारिक भाषाओं (345-347), सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट की न्यायिक भाषा (348), किसी भी भाषा में अपनी शिकायत/अभ्यावेदन देने के नागरिक अधिकार (350) और मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा की सुविधा (350A) को संरक्षित करता है।

अनुच्छेद 350
Part XVII

व्यथा के निवारण के लिए अभ्यावेदन में प्रयोग की जाने वाली भाषा

संविधान के भाग XVII (राजभाषा) का अनुच्छेद 350 'व्यथा के निवारण के लिए अभ्यावेदन में प्रयोग की जाने वाली भाषा' का उपबंध करता है। यह संघ की राजभाषा (343), राज्यों की अपनी आधिकारिक भाषाओं (345-347), सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट की न्यायिक भाषा (348), किसी भी भाषा में अपनी शिकायत/अभ्यावेदन देने के नागरिक अधिकार (350) और मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा की सुविधा (350A) को संरक्षित करता है।

अनुच्छेद 350A
Part XVII

प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा की सुविधाएं

संविधान के भाग XVII (राजभाषा) का अनुच्छेद 350A 'प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा की सुविधाएं' का उपबंध करता है। यह संघ की राजभाषा (343), राज्यों की अपनी आधिकारिक भाषाओं (345-347), सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट की न्यायिक भाषा (348), किसी भी भाषा में अपनी शिकायत/अभ्यावेदन देने के नागरिक अधिकार (350) और मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा की सुविधा (350A) को संरक्षित करता है।

अनुच्छेद 350B
Part XVII

भाषाई अल्पसंख्यक-वर्गों के लिए विशेष अधिकारी

संविधान के भाग XVII (राजभाषा) का अनुच्छेद 350B 'भाषाई अल्पसंख्यक-वर्गों के लिए विशेष अधिकारी' का उपबंध करता है। यह संघ की राजभाषा (343), राज्यों की अपनी आधिकारिक भाषाओं (345-347), सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट की न्यायिक भाषा (348), किसी भी भाषा में अपनी शिकायत/अभ्यावेदन देने के नागरिक अधिकार (350) और मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा की सुविधा (350A) को संरक्षित करता है।

अनुच्छेद 351
Part XVII

हिंदी भाषा के विकास के लिए निदेश

संविधान के भाग XVII (राजभाषा) का अनुच्छेद 351 'हिंदी भाषा के विकास के लिए निदेश' का उपबंध करता है। यह संघ की राजभाषा (343), राज्यों की अपनी आधिकारिक भाषाओं (345-347), सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट की न्यायिक भाषा (348), किसी भी भाषा में अपनी शिकायत/अभ्यावेदन देने के नागरिक अधिकार (350) और मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा की सुविधा (350A) को संरक्षित करता है।

सार्वजनिक डोमेन (Public Domain) एवं वैधानिक प्रामाणिकता सूचना

भारतीय प्रतिलिप्यधिकार अधिनियम (Copyright Act), 1957 की धारा 52(1)(q) के अंतर्गत भारत का संविधान, संसदीय अधिनियम, राजपत्र अधिसूचनाएं तथा उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों के निर्णय सार्वजनिक डोमेन (Public Domain) में हैं। यह पाठ विधायी विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय, भारत सरकार (India Code) के आधिकारिक अभिलेखों पर आधारित है।

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