संविधान के भाग XV (निर्वाचन) का अनुच्छेद 325 'धर्म, मूलवंश, जाति या लिंग के आधार पर किसी व्यक्ति का निर्वाचक-नामावली में सम्मिलित किए जाने के लिए अपात्र न होना' का प्रावधान करता है। यह स्वतंत्र निर्वाचन आयोग (324), धर्म, मूलवंश, जाति या लिंग के आधार पर मतदाता सूची में किसी भी भेदभाव पर रोक (325), 18 वर्ष के प्रत्येक नागरिक के मताधिकार (326), चुनाव कानून बनाने की शक्ति (327-328) और निर्वाचन याचिकाओं की प्रक्रिया (329) को सुनिश्चित करता है।
जब 1950 में भारतीय संविधान लागू हुआ, तो अनुच्छेद 326 ने मानव इतिहास का सबसे साहसी लोकतांत्रिक प्रयोग किया: जहां पश्चिमी देशों को महिलाओं और गरीबों को वोट का अधिकार देने में सदियां लग गईं, वहीं भारत ने पहले ही दिन से हर वयस्क नागरिक—चाहे वह पुरुष हो या महिला, उद्योगपति हो या दिहाड़ी मजदूर, पढ़ा-लिखा हो या निरक्षर—को बराबर का मताधिकार दिया।
मूल रूप से मतदान की आयु 21 वर्ष थी, जिसे 61वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1988 द्वारा घटाकर 18 वर्ष कर दिया गया। अनुच्छेद 325 (जो धर्म, जाति या लिंग के आधार पर मतदाता सूची से बाहर करने पर रोक लगाता है) के साथ मिलकर अनुच्छेद 326 डॉ. आंबेडकर के 'एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य' के सिद्धांत को जीवंत करता है।
संविधान के भाग XV (निर्वाचन) का अनुच्छेद 327 'विधान-मंडलों के लिए निर्वाचनों के संबंध में उपबंध करने की संसद की शक्ति' का प्रावधान करता है। यह स्वतंत्र निर्वाचन आयोग (324), धर्म, मूलवंश, जाति या लिंग के आधार पर मतदाता सूची में किसी भी भेदभाव पर रोक (325), 18 वर्ष के प्रत्येक नागरिक के मताधिकार (326), चुनाव कानून बनाने की शक्ति (327-328) और निर्वाचन याचिकाओं की प्रक्रिया (329) को सुनिश्चित करता है।
संविधान के भाग XV (निर्वाचन) का अनुच्छेद 328 'किसी राज्य के विधान-मंडल के लिए निर्वाचनों के संबंध में उपबंध करने की उस विधान-मंडल की शक्ति' का प्रावधान करता है। यह स्वतंत्र निर्वाचन आयोग (324), धर्म, मूलवंश, जाति या लिंग के आधार पर मतदाता सूची में किसी भी भेदभाव पर रोक (325), 18 वर्ष के प्रत्येक नागरिक के मताधिकार (326), चुनाव कानून बनाने की शक्ति (327-328) और निर्वाचन याचिकाओं की प्रक्रिया (329) को सुनिश्चित करता है।
संविधान के भाग XV (निर्वाचन) का अनुच्छेद 329 'निर्वाचन संबंधी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप का वर्जन' का प्रावधान करता है। यह स्वतंत्र निर्वाचन आयोग (324), धर्म, मूलवंश, जाति या लिंग के आधार पर मतदाता सूची में किसी भी भेदभाव पर रोक (325), 18 वर्ष के प्रत्येक नागरिक के मताधिकार (326), चुनाव कानून बनाने की शक्ति (327-328) और निर्वाचन याचिकाओं की प्रक्रिया (329) को सुनिश्चित करता है।
संविधान के भाग XVI का अनुच्छेद 330 'लोक सभा में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थानों का आरक्षण' का उपबंध करता है। यह लोकसभा (330) और राज्य विधानसभाओं (332) में अनुसूचित जातियों (SC) व अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए सीटों के आरक्षण, सेवाओं में दावों (335), तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (338), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (338A) और पिछड़े वर्गों के संवैधानिक संरक्षण को सुनिश्चित करता है। Note: 104वें संविधान संशोधन (2019) द्वारा एंग्लो-इंडियन नामांकन को आगे नहीं बढ़ाया गया।
संविधान के भाग XVI का अनुच्छेद 331 'लोक सभा में आंग्ल-भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व' का उपबंध करता है। यह लोकसभा (330) और राज्य विधानसभाओं (332) में अनुसूचित जातियों (SC) व अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए सीटों के आरक्षण, सेवाओं में दावों (335), तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (338), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (338A) और पिछड़े वर्गों के संवैधानिक संरक्षण को सुनिश्चित करता है। Note: 104वें संविधान संशोधन (2019) द्वारा एंग्लो-इंडियन नामांकन को आगे नहीं बढ़ाया गया।
संविधान के भाग XVI का अनुच्छेद 332 'राज्यों की विधान सभाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थानों का आरक्षण' का उपबंध करता है। यह लोकसभा (330) और राज्य विधानसभाओं (332) में अनुसूचित जातियों (SC) व अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए सीटों के आरक्षण, सेवाओं में दावों (335), तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (338), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (338A) और पिछड़े वर्गों के संवैधानिक संरक्षण को सुनिश्चित करता है। Note: 104वें संविधान संशोधन (2019) द्वारा एंग्लो-इंडियन नामांकन को आगे नहीं बढ़ाया गया।
संविधान के भाग XVI का अनुच्छेद 333 'राज्यों की विधान सभाओं में आंग्ल-भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व' का उपबंध करता है। यह लोकसभा (330) और राज्य विधानसभाओं (332) में अनुसूचित जातियों (SC) व अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए सीटों के आरक्षण, सेवाओं में दावों (335), तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (338), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (338A) और पिछड़े वर्गों के संवैधानिक संरक्षण को सुनिश्चित करता है। Note: 104वें संविधान संशोधन (2019) द्वारा एंग्लो-इंडियन नामांकन को आगे नहीं बढ़ाया गया।
संविधान के भाग XVI का अनुच्छेद 334 'स्थानों के आरक्षण और विशेष प्रतिनिधित्व का निश्चित अवधि के पश्चात् न रहना' का उपबंध करता है। यह लोकसभा (330) और राज्य विधानसभाओं (332) में अनुसूचित जातियों (SC) व अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए सीटों के आरक्षण, सेवाओं में दावों (335), तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (338), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (338A) और पिछड़े वर्गों के संवैधानिक संरक्षण को सुनिश्चित करता है। Note: 104वें संविधान संशोधन (2019) द्वारा एंग्लो-इंडियन नामांकन को आगे नहीं बढ़ाया गया।
संविधान के भाग XVI का अनुच्छेद 335 'सेवाओं और पदों के लिए अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के दावे' का उपबंध करता है। यह लोकसभा (330) और राज्य विधानसभाओं (332) में अनुसूचित जातियों (SC) व अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए सीटों के आरक्षण, सेवाओं में दावों (335), तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (338), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (338A) और पिछड़े वर्गों के संवैधानिक संरक्षण को सुनिश्चित करता है। Note: 104वें संविधान संशोधन (2019) द्वारा एंग्लो-इंडियन नामांकन को आगे नहीं बढ़ाया गया।
संविधान के भाग XVI का अनुच्छेद 336 'कुछ सेवाओं में आंग्ल-भारतीय समुदाय के लिए विशेष उपबंध' का उपबंध करता है। यह लोकसभा (330) और राज्य विधानसभाओं (332) में अनुसूचित जातियों (SC) व अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए सीटों के आरक्षण, सेवाओं में दावों (335), तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (338), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (338A) और पिछड़े वर्गों के संवैधानिक संरक्षण को सुनिश्चित करता है। Note: 104वें संविधान संशोधन (2019) द्वारा एंग्लो-इंडियन नामांकन को आगे नहीं बढ़ाया गया।
संविधान के भाग XVI का अनुच्छेद 337 'आंग्ल-भारतीय समुदाय के फायदे के लिए शैक्षिक अनुदान के लिए विशेष उपबंध' का उपबंध करता है। यह लोकसभा (330) और राज्य विधानसभाओं (332) में अनुसूचित जातियों (SC) व अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए सीटों के आरक्षण, सेवाओं में दावों (335), तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (338), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (338A) और पिछड़े वर्गों के संवैधानिक संरक्षण को सुनिश्चित करता है। Note: 104वें संविधान संशोधन (2019) द्वारा एंग्लो-इंडियन नामांकन को आगे नहीं बढ़ाया गया।
संविधान के भाग XVI का अनुच्छेद 338 'राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC)' का उपबंध करता है। यह लोकसभा (330) और राज्य विधानसभाओं (332) में अनुसूचित जातियों (SC) व अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए सीटों के आरक्षण, सेवाओं में दावों (335), तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (338), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (338A) और पिछड़े वर्गों के संवैधानिक संरक्षण को सुनिश्चित करता है। Note: 104वें संविधान संशोधन (2019) द्वारा एंग्लो-इंडियन नामांकन को आगे नहीं बढ़ाया गया।
संविधान के भाग XVI का अनुच्छेद 338A 'राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST)' का उपबंध करता है। यह लोकसभा (330) और राज्य विधानसभाओं (332) में अनुसूचित जातियों (SC) व अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए सीटों के आरक्षण, सेवाओं में दावों (335), तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (338), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (338A) और पिछड़े वर्गों के संवैधानिक संरक्षण को सुनिश्चित करता है। Note: 104वें संविधान संशोधन (2019) द्वारा एंग्लो-इंडियन नामांकन को आगे नहीं बढ़ाया गया।
संविधान के भाग XVI का अनुच्छेद 339 'अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन और अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के बारे में संघ का नियंत्रण' का उपबंध करता है। यह लोकसभा (330) और राज्य विधानसभाओं (332) में अनुसूचित जातियों (SC) व अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए सीटों के आरक्षण, सेवाओं में दावों (335), तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (338), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (338A) और पिछड़े वर्गों के संवैधानिक संरक्षण को सुनिश्चित करता है। Note: 104वें संविधान संशोधन (2019) द्वारा एंग्लो-इंडियन नामांकन को आगे नहीं बढ़ाया गया।
संविधान के भाग XVI का अनुच्छेद 340 'पिछड़े वर्गों की दशाओं के अन्वेषण के लिए आयोग की नियुक्ति' का उपबंध करता है। यह लोकसभा (330) और राज्य विधानसभाओं (332) में अनुसूचित जातियों (SC) व अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए सीटों के आरक्षण, सेवाओं में दावों (335), तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (338), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (338A) और पिछड़े वर्गों के संवैधानिक संरक्षण को सुनिश्चित करता है। Note: 104वें संविधान संशोधन (2019) द्वारा एंग्लो-इंडियन नामांकन को आगे नहीं बढ़ाया गया।
संविधान के भाग XVI का अनुच्छेद 341 'अनुसूचित जातियां (Scheduled Castes)' का उपबंध करता है। यह लोकसभा (330) और राज्य विधानसभाओं (332) में अनुसूचित जातियों (SC) व अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए सीटों के आरक्षण, सेवाओं में दावों (335), तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (338), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (338A) और पिछड़े वर्गों के संवैधानिक संरक्षण को सुनिश्चित करता है। Note: 104वें संविधान संशोधन (2019) द्वारा एंग्लो-इंडियन नामांकन को आगे नहीं बढ़ाया गया।
संविधान के भाग XVI का अनुच्छेद 342 'अनुसूचित जनजातियां (Scheduled Tribes)' का उपबंध करता है। यह लोकसभा (330) और राज्य विधानसभाओं (332) में अनुसूचित जातियों (SC) व अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए सीटों के आरक्षण, सेवाओं में दावों (335), तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (338), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (338A) और पिछड़े वर्गों के संवैधानिक संरक्षण को सुनिश्चित करता है। Note: 104वें संविधान संशोधन (2019) द्वारा एंग्लो-इंडियन नामांकन को आगे नहीं बढ़ाया गया।
संविधान के भाग XVII (राजभाषा) का अनुच्छेद 343 'संघ की राजभाषा' का उपबंध करता है। यह संघ की राजभाषा (343), राज्यों की अपनी आधिकारिक भाषाओं (345-347), सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट की न्यायिक भाषा (348), किसी भी भाषा में अपनी शिकायत/अभ्यावेदन देने के नागरिक अधिकार (350) और मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा की सुविधा (350A) को संरक्षित करता है।
संविधान के भाग XVII (राजभाषा) का अनुच्छेद 344 'राजभाषा के संबंध में आयोग और संसद की समिति' का उपबंध करता है। यह संघ की राजभाषा (343), राज्यों की अपनी आधिकारिक भाषाओं (345-347), सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट की न्यायिक भाषा (348), किसी भी भाषा में अपनी शिकायत/अभ्यावेदन देने के नागरिक अधिकार (350) और मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा की सुविधा (350A) को संरक्षित करता है।
संविधान के भाग XVII (राजभाषा) का अनुच्छेद 345 'राज्य की राजभाषा या राजभाषाएं' का उपबंध करता है। यह संघ की राजभाषा (343), राज्यों की अपनी आधिकारिक भाषाओं (345-347), सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट की न्यायिक भाषा (348), किसी भी भाषा में अपनी शिकायत/अभ्यावेदन देने के नागरिक अधिकार (350) और मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा की सुविधा (350A) को संरक्षित करता है।
संविधान के भाग XVII (राजभाषा) का अनुच्छेद 346 'एक राज्य और दूसरे राज्य के बीच या किसी राज्य और संघ के बीच पत्रादि की राजभाषा' का उपबंध करता है। यह संघ की राजभाषा (343), राज्यों की अपनी आधिकारिक भाषाओं (345-347), सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट की न्यायिक भाषा (348), किसी भी भाषा में अपनी शिकायत/अभ्यावेदन देने के नागरिक अधिकार (350) और मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा की सुविधा (350A) को संरक्षित करता है।
संविधान के भाग XVII (राजभाषा) का अनुच्छेद 347 'किसी राज्य की जनसंख्या के किसी अनुभाग द्वारा बोली जाने वाली भाषा के संबंध में विशेष उपबंध' का उपबंध करता है। यह संघ की राजभाषा (343), राज्यों की अपनी आधिकारिक भाषाओं (345-347), सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट की न्यायिक भाषा (348), किसी भी भाषा में अपनी शिकायत/अभ्यावेदन देने के नागरिक अधिकार (350) और मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा की सुविधा (350A) को संरक्षित करता है।
संविधान के भाग XVII (राजभाषा) का अनुच्छेद 348 'उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों में और अधिनियमों, विधेयकों आदि के लिए प्रयोग की जाने वाली भाषा' का उपबंध करता है। यह संघ की राजभाषा (343), राज्यों की अपनी आधिकारिक भाषाओं (345-347), सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट की न्यायिक भाषा (348), किसी भी भाषा में अपनी शिकायत/अभ्यावेदन देने के नागरिक अधिकार (350) और मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा की सुविधा (350A) को संरक्षित करता है।
संविधान के भाग XVII (राजभाषा) का अनुच्छेद 349 'भाषा से संबंधित कुछ विधियां अधिनियमित करने के लिए विशेष प्रक्रिया' का उपबंध करता है। यह संघ की राजभाषा (343), राज्यों की अपनी आधिकारिक भाषाओं (345-347), सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट की न्यायिक भाषा (348), किसी भी भाषा में अपनी शिकायत/अभ्यावेदन देने के नागरिक अधिकार (350) और मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा की सुविधा (350A) को संरक्षित करता है।
संविधान के भाग XVII (राजभाषा) का अनुच्छेद 350 'व्यथा के निवारण के लिए अभ्यावेदन में प्रयोग की जाने वाली भाषा' का उपबंध करता है। यह संघ की राजभाषा (343), राज्यों की अपनी आधिकारिक भाषाओं (345-347), सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट की न्यायिक भाषा (348), किसी भी भाषा में अपनी शिकायत/अभ्यावेदन देने के नागरिक अधिकार (350) और मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा की सुविधा (350A) को संरक्षित करता है।
संविधान के भाग XVII (राजभाषा) का अनुच्छेद 350A 'प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा की सुविधाएं' का उपबंध करता है। यह संघ की राजभाषा (343), राज्यों की अपनी आधिकारिक भाषाओं (345-347), सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट की न्यायिक भाषा (348), किसी भी भाषा में अपनी शिकायत/अभ्यावेदन देने के नागरिक अधिकार (350) और मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा की सुविधा (350A) को संरक्षित करता है।
संविधान के भाग XVII (राजभाषा) का अनुच्छेद 350B 'भाषाई अल्पसंख्यक-वर्गों के लिए विशेष अधिकारी' का उपबंध करता है। यह संघ की राजभाषा (343), राज्यों की अपनी आधिकारिक भाषाओं (345-347), सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट की न्यायिक भाषा (348), किसी भी भाषा में अपनी शिकायत/अभ्यावेदन देने के नागरिक अधिकार (350) और मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा की सुविधा (350A) को संरक्षित करता है।
संविधान के भाग XVII (राजभाषा) का अनुच्छेद 351 'हिंदी भाषा के विकास के लिए निदेश' का उपबंध करता है। यह संघ की राजभाषा (343), राज्यों की अपनी आधिकारिक भाषाओं (345-347), सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट की न्यायिक भाषा (348), किसी भी भाषा में अपनी शिकायत/अभ्यावेदन देने के नागरिक अधिकार (350) और मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा की सुविधा (350A) को संरक्षित करता है।