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🇮🇳 भारत का सर्वोच्च विधान • 26 जनवरी 1950 को लागू

भारत का संपूर्ण संविधान: डिजिटल नागरिक महाग्रंथ

विश्व के सबसे विस्तृत लिखित संविधान के 395 अनुच्छेदों, 25 भागों और 12 अनुसूचियों का अध्ययन करें सरल नागरिक भाषा, संविधान सभा के ऐतिहासिक विमर्श और सर्वोच्च अदालत के फैसलों के साथ।

395+
अनुच्छेद (Articles)
25
भाग (Thematic Parts)
12
अनुसूचियां (Schedules)
106
संशोधन (Amendments)
📜 उद्देशिका “हम, भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व-सम्पन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए...”
“हम, भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व-सम्पन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को: सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय; विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता; प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर, 1949 ईस्वी को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।”
Page 9 • सरल नागरिक भाषा में
अनुच्छेद 227
Part VI

सभी न्यायालयों के अधीक्षण की उच्च न्यायालय की शक्ति

संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 227 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'सभी न्यायालयों के अधीक्षण की उच्च न्यायालय की शक्ति' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 228
Part VI

कुछ मामलों का उच्च न्यायालय को अंतरण

संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 228 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'कुछ मामलों का उच्च न्यायालय को अंतरण' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 229
Part VI

उच्च न्यायालयों के अधिकारी और सेवक तथा व्यय

संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 229 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'उच्च न्यायालयों के अधिकारी और सेवक तथा व्यय' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 230
Part VI

उच्च न्यायालयों की अधिकारिता का संघ राज्यक्षेत्रों पर विस्तार

संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 230 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'उच्च न्यायालयों की अधिकारिता का संघ राज्यक्षेत्रों पर विस्तार' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 231
Part VI

दो या अधिक राज्यों के लिए एक ही उच्च न्यायालय की स्थापना

संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 231 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'दो या अधिक राज्यों के लिए एक ही उच्च न्यायालय की स्थापना' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 233
Part VI

जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति

संविधान के भाग VI के अध्याय VI (अधीनस्थ न्यायालय) का अनुच्छेद 233 'जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति' का प्रावधान करता है। यह जिला जजों और निचली अदालतों के न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति, पदोन्नति और नियंत्रण को राज्य सरकार की राजनीति से अलग रखकर सीधे उच्च न्यायालय (High Court) के अधीन रखता है।

अनुच्छेद 233A
Part VI

कुछ जिला न्यायाधीशों की नियुक्तियों का और उनके द्वारा दिए गए निर्णयों आदि का विधिमान्यकरण

संविधान के भाग VI के अध्याय VI (अधीनस्थ न्यायालय) का अनुच्छेद 233A 'कुछ जिला न्यायाधीशों की नियुक्तियों का और उनके द्वारा दिए गए निर्णयों आदि का विधिमान्यकरण' का प्रावधान करता है। यह जिला जजों और निचली अदालतों के न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति, पदोन्नति और नियंत्रण को राज्य सरकार की राजनीति से अलग रखकर सीधे उच्च न्यायालय (High Court) के अधीन रखता है।

अनुच्छेद 234
Part VI

न्यायिक सेवा में जिला न्यायाधीशों से भिन्न व्यक्तियों की भर्ती

संविधान के भाग VI के अध्याय VI (अधीनस्थ न्यायालय) का अनुच्छेद 234 'न्यायिक सेवा में जिला न्यायाधीशों से भिन्न व्यक्तियों की भर्ती' का प्रावधान करता है। यह जिला जजों और निचली अदालतों के न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति, पदोन्नति और नियंत्रण को राज्य सरकार की राजनीति से अलग रखकर सीधे उच्च न्यायालय (High Court) के अधीन रखता है।

अनुच्छेद 235
Part VI

अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण

संविधान के भाग VI के अध्याय VI (अधीनस्थ न्यायालय) का अनुच्छेद 235 'अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण' का प्रावधान करता है। यह जिला जजों और निचली अदालतों के न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति, पदोन्नति और नियंत्रण को राज्य सरकार की राजनीति से अलग रखकर सीधे उच्च न्यायालय (High Court) के अधीन रखता है।

अनुच्छेद 236
Part VI

निर्वचन (न्यायिक सेवा संबंधी परिभाषाएं)

संविधान के भाग VI के अध्याय VI (अधीनस्थ न्यायालय) का अनुच्छेद 236 'निर्वचन (न्यायिक सेवा संबंधी परिभाषाएं)' का प्रावधान करता है। यह जिला जजों और निचली अदालतों के न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति, पदोन्नति और नियंत्रण को राज्य सरकार की राजनीति से अलग रखकर सीधे उच्च न्यायालय (High Court) के अधीन रखता है।

अनुच्छेद 237
Part VI

कुछ वर्ग या वर्गों के मजिस्ट्रेटों पर इस अध्याय के उपबंधों का लागू होना

संविधान के भाग VI के अध्याय VI (अधीनस्थ न्यायालय) का अनुच्छेद 237 'कुछ वर्ग या वर्गों के मजिस्ट्रेटों पर इस अध्याय के उपबंधों का लागू होना' का प्रावधान करता है। यह जिला जजों और निचली अदालतों के न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति, पदोन्नति और नियंत्रण को राज्य सरकार की राजनीति से अलग रखकर सीधे उच्च न्यायालय (High Court) के अधीन रखता है।

अनुच्छेद 238
Part VII

पहली अनुसूची के भाग ख के राज्यों पर भाग 6 के उपबंधों का लागू होना (7वें संशोधन द्वारा निरसित)

अनुच्छेद 238 (पहली अनुसूची के भाग ख के राज्यों पर भाग 6 के उपबंधों का लागू होना (7वें संशोधन द्वारा निरसित)) संविधान के Part VII में शामिल था, किंतु संसद ने संविधान (Seventh Amendment (1956)) अधिनियम द्वारा इसे निरसित (Omitted/Repealed) कर दिया है। संवैधानिक क्रम और ऐतिहासिक संदर्भ बनाए रखने के लिए मूल संहिता में इसका क्रमांक सुरक्षित रखा गया है।

अनुच्छेद 239
Part VIII

संघ राज्यक्षेत्रों का प्रशासन

संविधान के भाग VIII (संघ राज्यक्षेत्र / केंद्र शासित प्रदेश) का अनुच्छेद 239 'संघ राज्यक्षेत्रों का प्रशासन' का उपबंध करता है। यह प्रशासकों/उपराज्यपालों के माध्यम से केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन, पुडुचेरी (239A) व राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (239AA) में निर्वाचित विधानसभा व मंत्रिपरिषद, तथा केंद्र शासित प्रदेशों के लिए हाई कोर्ट (241) की व्यवस्था तय करता है।

अनुच्छेद 239A
Part VIII

कुछ संघ राज्यक्षेत्रों के लिए स्थानीय विधान-मंडलों या मंत्रिपरिषदों का या दोनों का सृजन

संविधान के भाग VIII (संघ राज्यक्षेत्र / केंद्र शासित प्रदेश) का अनुच्छेद 239A 'कुछ संघ राज्यक्षेत्रों के लिए स्थानीय विधान-मंडलों या मंत्रिपरिषदों का या दोनों का सृजन' का उपबंध करता है। यह प्रशासकों/उपराज्यपालों के माध्यम से केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन, पुडुचेरी (239A) व राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (239AA) में निर्वाचित विधानसभा व मंत्रिपरिषद, तथा केंद्र शासित प्रदेशों के लिए हाई कोर्ट (241) की व्यवस्था तय करता है।

अनुच्छेद 239B
Part VIII

विधान-मंडल के विश्रांतिकाल में अध्यादेश प्रख्यापित करने की प्रशासक की शक्ति

संविधान के भाग VIII (संघ राज्यक्षेत्र / केंद्र शासित प्रदेश) का अनुच्छेद 239B 'विधान-मंडल के विश्रांतिकाल में अध्यादेश प्रख्यापित करने की प्रशासक की शक्ति' का उपबंध करता है। यह प्रशासकों/उपराज्यपालों के माध्यम से केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन, पुडुचेरी (239A) व राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (239AA) में निर्वाचित विधानसभा व मंत्रिपरिषद, तथा केंद्र शासित प्रदेशों के लिए हाई कोर्ट (241) की व्यवस्था तय करता है।

अनुच्छेद 239AA
Part VIII

दिल्ली के संबंध में विशेष उपबंध (राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र)

संविधान के भाग VIII (संघ राज्यक्षेत्र / केंद्र शासित प्रदेश) का अनुच्छेद 239AA 'दिल्ली के संबंध में विशेष उपबंध (राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र)' का उपबंध करता है। यह प्रशासकों/उपराज्यपालों के माध्यम से केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन, पुडुचेरी (239A) व राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (239AA) में निर्वाचित विधानसभा व मंत्रिपरिषद, तथा केंद्र शासित प्रदेशों के लिए हाई कोर्ट (241) की व्यवस्था तय करता है।

अनुच्छेद 239AB
Part VIII

सांविधानिक तंत्र के विफल हो जाने की दशा में उपबंध

संविधान के भाग VIII (संघ राज्यक्षेत्र / केंद्र शासित प्रदेश) का अनुच्छेद 239AB 'सांविधानिक तंत्र के विफल हो जाने की दशा में उपबंध' का उपबंध करता है। यह प्रशासकों/उपराज्यपालों के माध्यम से केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन, पुडुचेरी (239A) व राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (239AA) में निर्वाचित विधानसभा व मंत्रिपरिषद, तथा केंद्र शासित प्रदेशों के लिए हाई कोर्ट (241) की व्यवस्था तय करता है।

अनुच्छेद 240
Part VIII

कुछ संघ राज्यक्षेत्रों के लिए विनियम बनाने की राष्ट्रपति की शक्ति

संविधान के भाग VIII (संघ राज्यक्षेत्र / केंद्र शासित प्रदेश) का अनुच्छेद 240 'कुछ संघ राज्यक्षेत्रों के लिए विनियम बनाने की राष्ट्रपति की शक्ति' का उपबंध करता है। यह प्रशासकों/उपराज्यपालों के माध्यम से केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन, पुडुचेरी (239A) व राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (239AA) में निर्वाचित विधानसभा व मंत्रिपरिषद, तथा केंद्र शासित प्रदेशों के लिए हाई कोर्ट (241) की व्यवस्था तय करता है।

अनुच्छेद 241
Part VIII

संघ राज्यक्षेत्रों के लिए उच्च न्यायालय

संविधान के भाग VIII (संघ राज्यक्षेत्र / केंद्र शासित प्रदेश) का अनुच्छेद 241 'संघ राज्यक्षेत्रों के लिए उच्च न्यायालय' का उपबंध करता है। यह प्रशासकों/उपराज्यपालों के माध्यम से केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन, पुडुचेरी (239A) व राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (239AA) में निर्वाचित विधानसभा व मंत्रिपरिषद, तथा केंद्र शासित प्रदेशों के लिए हाई कोर्ट (241) की व्यवस्था तय करता है।

अनुच्छेद 243
Part IX

पंचायती राज संबंधी परिभाषाएं

73वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा जोड़े गए भाग IX (पंचायतें) का अनुच्छेद 243 'पंचायती राज संबंधी परिभाषाएं' से संबंधित है। यह ग्राम सभा, त्रिस्तरीय पंचायतों के गठन, महिलाओं व SC/ST के लिए सीटों के आरक्षण, 5 वर्ष के निश्चित कार्यकाल, राज्य वित्त आयोग या राज्य निर्वाचन आयोग के माध्यम से निष्पक्ष पंचायत चुनावों को संवैधानिक गारंटी देता है।

अनुच्छेद 243A
Part IX

ग्राम सभा

73वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा जोड़े गए भाग IX (पंचायतें) का अनुच्छेद 243A 'ग्राम सभा' से संबंधित है। यह ग्राम सभा, त्रिस्तरीय पंचायतों के गठन, महिलाओं व SC/ST के लिए सीटों के आरक्षण, 5 वर्ष के निश्चित कार्यकाल, राज्य वित्त आयोग या राज्य निर्वाचन आयोग के माध्यम से निष्पक्ष पंचायत चुनावों को संवैधानिक गारंटी देता है।

अनुच्छेद 243B
Part IX

पंचायतों का गठन

73वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा जोड़े गए भाग IX (पंचायतें) का अनुच्छेद 243B 'पंचायतों का गठन' से संबंधित है। यह ग्राम सभा, त्रिस्तरीय पंचायतों के गठन, महिलाओं व SC/ST के लिए सीटों के आरक्षण, 5 वर्ष के निश्चित कार्यकाल, राज्य वित्त आयोग या राज्य निर्वाचन आयोग के माध्यम से निष्पक्ष पंचायत चुनावों को संवैधानिक गारंटी देता है।

अनुच्छेद 243C
Part IX

पंचायतों की संरचना

73वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा जोड़े गए भाग IX (पंचायतें) का अनुच्छेद 243C 'पंचायतों की संरचना' से संबंधित है। यह ग्राम सभा, त्रिस्तरीय पंचायतों के गठन, महिलाओं व SC/ST के लिए सीटों के आरक्षण, 5 वर्ष के निश्चित कार्यकाल, राज्य वित्त आयोग या राज्य निर्वाचन आयोग के माध्यम से निष्पक्ष पंचायत चुनावों को संवैधानिक गारंटी देता है।

अनुच्छेद 243D
Part IX

पंचायतों में स्थानों का आरक्षण (महिलाओं, SC/ST के लिए)

73वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा जोड़े गए भाग IX (पंचायतें) का अनुच्छेद 243D 'पंचायतों में स्थानों का आरक्षण (महिलाओं, SC/ST के लिए)' से संबंधित है। यह ग्राम सभा, त्रिस्तरीय पंचायतों के गठन, महिलाओं व SC/ST के लिए सीटों के आरक्षण, 5 वर्ष के निश्चित कार्यकाल, राज्य वित्त आयोग या राज्य निर्वाचन आयोग के माध्यम से निष्पक्ष पंचायत चुनावों को संवैधानिक गारंटी देता है।

अनुच्छेद 243E
Part IX

पंचायतों की अवधि आदि (5 वर्ष का कार्यकाल)

73वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा जोड़े गए भाग IX (पंचायतें) का अनुच्छेद 243E 'पंचायतों की अवधि आदि (5 वर्ष का कार्यकाल)' से संबंधित है। यह ग्राम सभा, त्रिस्तरीय पंचायतों के गठन, महिलाओं व SC/ST के लिए सीटों के आरक्षण, 5 वर्ष के निश्चित कार्यकाल, राज्य वित्त आयोग या राज्य निर्वाचन आयोग के माध्यम से निष्पक्ष पंचायत चुनावों को संवैधानिक गारंटी देता है।

अनुच्छेद 243F
Part IX

सदस्यता के लिए निरर्हताएं

73वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा जोड़े गए भाग IX (पंचायतें) का अनुच्छेद 243F 'सदस्यता के लिए निरर्हताएं' से संबंधित है। यह ग्राम सभा, त्रिस्तरीय पंचायतों के गठन, महिलाओं व SC/ST के लिए सीटों के आरक्षण, 5 वर्ष के निश्चित कार्यकाल, राज्य वित्त आयोग या राज्य निर्वाचन आयोग के माध्यम से निष्पक्ष पंचायत चुनावों को संवैधानिक गारंटी देता है।

अनुच्छेद 243G
Part IX

पंचायतों की शक्तियां, प्राधिकार और उत्तरदायित्व

73वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा जोड़े गए भाग IX (पंचायतें) का अनुच्छेद 243G 'पंचायतों की शक्तियां, प्राधिकार और उत्तरदायित्व' से संबंधित है। यह ग्राम सभा, त्रिस्तरीय पंचायतों के गठन, महिलाओं व SC/ST के लिए सीटों के आरक्षण, 5 वर्ष के निश्चित कार्यकाल, राज्य वित्त आयोग या राज्य निर्वाचन आयोग के माध्यम से निष्पक्ष पंचायत चुनावों को संवैधानिक गारंटी देता है।

अनुच्छेद 243H
Part IX

पंचायतों द्वारा कर अधिरोपित करने की शक्तियां और उनकी निधियां

73वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा जोड़े गए भाग IX (पंचायतें) का अनुच्छेद 243H 'पंचायतों द्वारा कर अधिरोपित करने की शक्तियां और उनकी निधियां' से संबंधित है। यह ग्राम सभा, त्रिस्तरीय पंचायतों के गठन, महिलाओं व SC/ST के लिए सीटों के आरक्षण, 5 वर्ष के निश्चित कार्यकाल, राज्य वित्त आयोग या राज्य निर्वाचन आयोग के माध्यम से निष्पक्ष पंचायत चुनावों को संवैधानिक गारंटी देता है।

अनुच्छेद 243I
Part IX

वित्तीय स्थिति के पुनर्विलोकन के लिए राज्य वित्त आयोग का गठन

73वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा जोड़े गए भाग IX (पंचायतें) का अनुच्छेद 243I 'वित्तीय स्थिति के पुनर्विलोकन के लिए राज्य वित्त आयोग का गठन' से संबंधित है। यह ग्राम सभा, त्रिस्तरीय पंचायतों के गठन, महिलाओं व SC/ST के लिए सीटों के आरक्षण, 5 वर्ष के निश्चित कार्यकाल, राज्य वित्त आयोग या राज्य निर्वाचन आयोग के माध्यम से निष्पक्ष पंचायत चुनावों को संवैधानिक गारंटी देता है।

अनुच्छेद 243J
Part IX

पंचायतों के लेखाओं की संपरीक्षा (Audit)

73वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा जोड़े गए भाग IX (पंचायतें) का अनुच्छेद 243J 'पंचायतों के लेखाओं की संपरीक्षा (Audit)' से संबंधित है। यह ग्राम सभा, त्रिस्तरीय पंचायतों के गठन, महिलाओं व SC/ST के लिए सीटों के आरक्षण, 5 वर्ष के निश्चित कार्यकाल, राज्य वित्त आयोग या राज्य निर्वाचन आयोग के माध्यम से निष्पक्ष पंचायत चुनावों को संवैधानिक गारंटी देता है।

सार्वजनिक डोमेन (Public Domain) एवं वैधानिक प्रामाणिकता सूचना

भारतीय प्रतिलिप्यधिकार अधिनियम (Copyright Act), 1957 की धारा 52(1)(q) के अंतर्गत भारत का संविधान, संसदीय अधिनियम, राजपत्र अधिसूचनाएं तथा उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों के निर्णय सार्वजनिक डोमेन (Public Domain) में हैं। यह पाठ विधायी विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय, भारत सरकार (India Code) के आधिकारिक अभिलेखों पर आधारित है।

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