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🇮🇳 भारत का सर्वोच्च विधान • 26 जनवरी 1950 को लागू

भारत का संपूर्ण संविधान: डिजिटल नागरिक महाग्रंथ

विश्व के सबसे विस्तृत लिखित संविधान के 395 अनुच्छेदों, 25 भागों और 12 अनुसूचियों का अध्ययन करें सरल नागरिक भाषा, संविधान सभा के ऐतिहासिक विमर्श और सर्वोच्च अदालत के फैसलों के साथ।

395+
अनुच्छेद (Articles)
25
भाग (Thematic Parts)
12
अनुसूचियां (Schedules)
106
संशोधन (Amendments)
📜 उद्देशिका “हम, भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व-सम्पन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए...”
“हम, भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व-सम्पन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को: सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय; विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता; प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर, 1949 ईस्वी को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।”
Page 1 • सरल नागरिक भाषा में
अनुच्छेद 52
Part V

भारत के राष्ट्रपति

संविधान के भाग V (संघ की कार्यपालिका) का अनुच्छेद 52 'भारत के राष्ट्रपति' को निर्धारित करता है। यह राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्रिपरिषद के निर्वाचन, पदावधि, शपथ, पात्रता या संवैधानिक कर्तव्यों की स्पष्ट प्रक्रिया तय करता है ताकि संघ सरकार संविधान के दायरे में रहकर कार्य करे।

अनुच्छेद 53
Part V

संघ की कार्यपालिका शक्ति

संविधान के भाग V (संघ की कार्यपालिका) का अनुच्छेद 53 'संघ की कार्यपालिका शक्ति' को निर्धारित करता है। यह राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्रिपरिषद के निर्वाचन, पदावधि, शपथ, पात्रता या संवैधानिक कर्तव्यों की स्पष्ट प्रक्रिया तय करता है ताकि संघ सरकार संविधान के दायरे में रहकर कार्य करे।

अनुच्छेद 54
Part V

राष्ट्रपति का निर्वाचन

संविधान के भाग V (संघ की कार्यपालिका) का अनुच्छेद 54 'राष्ट्रपति का निर्वाचन' को निर्धारित करता है। यह राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्रिपरिषद के निर्वाचन, पदावधि, शपथ, पात्रता या संवैधानिक कर्तव्यों की स्पष्ट प्रक्रिया तय करता है ताकि संघ सरकार संविधान के दायरे में रहकर कार्य करे।

अनुच्छेद 55
Part V

राष्ट्रपति के निर्वाचन की रीति

संविधान के भाग V (संघ की कार्यपालिका) का अनुच्छेद 55 'राष्ट्रपति के निर्वाचन की रीति' को निर्धारित करता है। यह राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्रिपरिषद के निर्वाचन, पदावधि, शपथ, पात्रता या संवैधानिक कर्तव्यों की स्पष्ट प्रक्रिया तय करता है ताकि संघ सरकार संविधान के दायरे में रहकर कार्य करे।

अनुच्छेद 56
Part V

राष्ट्रपति की पदावधि

संविधान के भाग V (संघ की कार्यपालिका) का अनुच्छेद 56 'राष्ट्रपति की पदावधि' को निर्धारित करता है। यह राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्रिपरिषद के निर्वाचन, पदावधि, शपथ, पात्रता या संवैधानिक कर्तव्यों की स्पष्ट प्रक्रिया तय करता है ताकि संघ सरकार संविधान के दायरे में रहकर कार्य करे।

अनुच्छेद 57
Part V

पुनर्निर्वाचन के लिए पात्रता

संविधान के भाग V (संघ की कार्यपालिका) का अनुच्छेद 57 'पुनर्निर्वाचन के लिए पात्रता' को निर्धारित करता है। यह राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्रिपरिषद के निर्वाचन, पदावधि, शपथ, पात्रता या संवैधानिक कर्तव्यों की स्पष्ट प्रक्रिया तय करता है ताकि संघ सरकार संविधान के दायरे में रहकर कार्य करे।

अनुच्छेद 58
Part V

राष्ट्रपति निर्वाचित होने के लिए अर्हताएं (योग्यताएं)

संविधान के भाग V (संघ की कार्यपालिका) का अनुच्छेद 58 'राष्ट्रपति निर्वाचित होने के लिए अर्हताएं (योग्यताएं)' को निर्धारित करता है। यह राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्रिपरिषद के निर्वाचन, पदावधि, शपथ, पात्रता या संवैधानिक कर्तव्यों की स्पष्ट प्रक्रिया तय करता है ताकि संघ सरकार संविधान के दायरे में रहकर कार्य करे।

अनुच्छेद 59
Part V

राष्ट्रपति के पद के लिए शर्तें

संविधान के भाग V (संघ की कार्यपालिका) का अनुच्छेद 59 'राष्ट्रपति के पद के लिए शर्तें' को निर्धारित करता है। यह राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्रिपरिषद के निर्वाचन, पदावधि, शपथ, पात्रता या संवैधानिक कर्तव्यों की स्पष्ट प्रक्रिया तय करता है ताकि संघ सरकार संविधान के दायरे में रहकर कार्य करे।

अनुच्छेद 60
Part V

राष्ट्रपति द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान

संविधान के भाग V (संघ की कार्यपालिका) का अनुच्छेद 60 'राष्ट्रपति द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान' को निर्धारित करता है। यह राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्रिपरिषद के निर्वाचन, पदावधि, शपथ, पात्रता या संवैधानिक कर्तव्यों की स्पष्ट प्रक्रिया तय करता है ताकि संघ सरकार संविधान के दायरे में रहकर कार्य करे।

अनुच्छेद 61
Part V

राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया

संविधान के भाग V (संघ की कार्यपालिका) का अनुच्छेद 61 'राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया' को निर्धारित करता है। यह राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्रिपरिषद के निर्वाचन, पदावधि, शपथ, पात्रता या संवैधानिक कर्तव्यों की स्पष्ट प्रक्रिया तय करता है ताकि संघ सरकार संविधान के दायरे में रहकर कार्य करे।

अनुच्छेद 62
Part V

राष्ट्रपति के पद में रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचन करने का समय और आकस्मिक रिक्ति को भरने वाले व्यक्ति की पदावधि

संविधान के भाग V (संघ की कार्यपालिका) का अनुच्छेद 62 'राष्ट्रपति के पद में रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचन करने का समय और आकस्मिक रिक्ति को भरने वाले व्यक्ति की पदावधि' को निर्धारित करता है। यह राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्रिपरिषद के निर्वाचन, पदावधि, शपथ, पात्रता या संवैधानिक कर्तव्यों की स्पष्ट प्रक्रिया तय करता है ताकि संघ सरकार संविधान के दायरे में रहकर कार्य करे।

अनुच्छेद 63
Part V

भारत का उपराष्ट्रपति

संविधान के भाग V (संघ की कार्यपालिका) का अनुच्छेद 63 'भारत का उपराष्ट्रपति' को निर्धारित करता है। यह राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्रिपरिषद के निर्वाचन, पदावधि, शपथ, पात्रता या संवैधानिक कर्तव्यों की स्पष्ट प्रक्रिया तय करता है ताकि संघ सरकार संविधान के दायरे में रहकर कार्य करे।

अनुच्छेद 64
Part V

उपराष्ट्रपति का राज्य सभा का पदेन सभापति होना

संविधान के भाग V (संघ की कार्यपालिका) का अनुच्छेद 64 'उपराष्ट्रपति का राज्य सभा का पदेन सभापति होना' को निर्धारित करता है। यह राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्रिपरिषद के निर्वाचन, पदावधि, शपथ, पात्रता या संवैधानिक कर्तव्यों की स्पष्ट प्रक्रिया तय करता है ताकि संघ सरकार संविधान के दायरे में रहकर कार्य करे।

अनुच्छेद 65
Part V

राष्ट्रपति के पद में आकस्मिक रिक्ति के दौरान या उनकी अनुपस्थिति में उपराष्ट्रपति का राष्ट्रपति के रूप में कार्य करना

संविधान के भाग V (संघ की कार्यपालिका) का अनुच्छेद 65 'राष्ट्रपति के पद में आकस्मिक रिक्ति के दौरान या उनकी अनुपस्थिति में उपराष्ट्रपति का राष्ट्रपति के रूप में कार्य करना' को निर्धारित करता है। यह राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्रिपरिषद के निर्वाचन, पदावधि, शपथ, पात्रता या संवैधानिक कर्तव्यों की स्पष्ट प्रक्रिया तय करता है ताकि संघ सरकार संविधान के दायरे में रहकर कार्य करे।

अनुच्छेद 66
Part V

उपराष्ट्रपति का निर्वाचन

संविधान के भाग V (संघ की कार्यपालिका) का अनुच्छेद 66 'उपराष्ट्रपति का निर्वाचन' को निर्धारित करता है। यह राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्रिपरिषद के निर्वाचन, पदावधि, शपथ, पात्रता या संवैधानिक कर्तव्यों की स्पष्ट प्रक्रिया तय करता है ताकि संघ सरकार संविधान के दायरे में रहकर कार्य करे।

अनुच्छेद 67
Part V

उपराष्ट्रपति की पदावधि

संविधान के भाग V (संघ की कार्यपालिका) का अनुच्छेद 67 'उपराष्ट्रपति की पदावधि' को निर्धारित करता है। यह राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्रिपरिषद के निर्वाचन, पदावधि, शपथ, पात्रता या संवैधानिक कर्तव्यों की स्पष्ट प्रक्रिया तय करता है ताकि संघ सरकार संविधान के दायरे में रहकर कार्य करे।

अनुच्छेद 68
Part V

उपराष्ट्रपति के पद में रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचन करने का समय और आकस्मिक रिक्ति को भरने वाले व्यक्ति की पदावधि

संविधान के भाग V (संघ की कार्यपालिका) का अनुच्छेद 68 'उपराष्ट्रपति के पद में रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचन करने का समय और आकस्मिक रिक्ति को भरने वाले व्यक्ति की पदावधि' को निर्धारित करता है। यह राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्रिपरिषद के निर्वाचन, पदावधि, शपथ, पात्रता या संवैधानिक कर्तव्यों की स्पष्ट प्रक्रिया तय करता है ताकि संघ सरकार संविधान के दायरे में रहकर कार्य करे।

अनुच्छेद 69
Part V

उपराष्ट्रपति द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान

संविधान के भाग V (संघ की कार्यपालिका) का अनुच्छेद 69 'उपराष्ट्रपति द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान' को निर्धारित करता है। यह राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्रिपरिषद के निर्वाचन, पदावधि, शपथ, पात्रता या संवैधानिक कर्तव्यों की स्पष्ट प्रक्रिया तय करता है ताकि संघ सरकार संविधान के दायरे में रहकर कार्य करे।

अनुच्छेद 70
Part V

अन्य आकस्मिकताओं में राष्ट्रपति के कृत्यों का निर्वहन

संविधान के भाग V (संघ की कार्यपालिका) का अनुच्छेद 70 'अन्य आकस्मिकताओं में राष्ट्रपति के कृत्यों का निर्वहन' को निर्धारित करता है। यह राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्रिपरिषद के निर्वाचन, पदावधि, शपथ, पात्रता या संवैधानिक कर्तव्यों की स्पष्ट प्रक्रिया तय करता है ताकि संघ सरकार संविधान के दायरे में रहकर कार्य करे।

अनुच्छेद 71
Part V

राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से संबंधित या संसक्त विषय

संविधान के भाग V (संघ की कार्यपालिका) का अनुच्छेद 71 'राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से संबंधित या संसक्त विषय' को निर्धारित करता है। यह राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्रिपरिषद के निर्वाचन, पदावधि, शपथ, पात्रता या संवैधानिक कर्तव्यों की स्पष्ट प्रक्रिया तय करता है ताकि संघ सरकार संविधान के दायरे में रहकर कार्य करे।

अनुच्छेद 72
Part V

क्षमा आदि की और कुछ मामलों में दंडादेश के निलंबन, परिहार या लघुकरण की राष्ट्रपति की शक्ति

अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति मृत्युदंड या अन्य गंभीर सजा पाए दोषियों की दया याचिका (Mercy Petition) पर फैसला लेते हैं। यह शक्ति राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह पर इस्तेमाल करते हैं। यह कोई साधारण अपील नहीं, बल्कि न्याय प्रणाली में दया और त्रुटि-सुधार का सर्वोच्च संवैधानिक तंत्र है।

अनुच्छेद 73
Part V

संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार

संविधान के भाग V (संघ की कार्यपालिका) का अनुच्छेद 73 'संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार' को निर्धारित करता है। यह राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्रिपरिषद के निर्वाचन, पदावधि, शपथ, पात्रता या संवैधानिक कर्तव्यों की स्पष्ट प्रक्रिया तय करता है ताकि संघ सरकार संविधान के दायरे में रहकर कार्य करे।

अनुच्छेद 74
Part V

राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद

संविधान के भाग V (संघ की कार्यपालिका) का अनुच्छेद 74 'राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद' को निर्धारित करता है। यह राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्रिपरिषद के निर्वाचन, पदावधि, शपथ, पात्रता या संवैधानिक कर्तव्यों की स्पष्ट प्रक्रिया तय करता है ताकि संघ सरकार संविधान के दायरे में रहकर कार्य करे।

अनुच्छेद 75
Part V

मंत्रियों के बारे में अन्य उपबंध (प्रधानमंत्री की नियुक्ति और सामूहिक उत्तरदायित्व)

संविधान के भाग V (संघ की कार्यपालिका) का अनुच्छेद 75 'मंत्रियों के बारे में अन्य उपबंध (प्रधानमंत्री की नियुक्ति और सामूहिक उत्तरदायित्व)' को निर्धारित करता है। यह राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्रिपरिषद के निर्वाचन, पदावधि, शपथ, पात्रता या संवैधानिक कर्तव्यों की स्पष्ट प्रक्रिया तय करता है ताकि संघ सरकार संविधान के दायरे में रहकर कार्य करे।

अनुच्छेद 76
Part V

भारत का महान्यायवादी (Attorney-General)

संविधान के भाग V (संघ की कार्यपालिका) का अनुच्छेद 76 'भारत का महान्यायवादी (Attorney-General)' को निर्धारित करता है। यह राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्रिपरिषद के निर्वाचन, पदावधि, शपथ, पात्रता या संवैधानिक कर्तव्यों की स्पष्ट प्रक्रिया तय करता है ताकि संघ सरकार संविधान के दायरे में रहकर कार्य करे।

अनुच्छेद 77
Part V

भारत सरकार के कार्य का संचालन

संविधान के भाग V (संघ की कार्यपालिका) का अनुच्छेद 77 'भारत सरकार के कार्य का संचालन' को निर्धारित करता है। यह राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्रिपरिषद के निर्वाचन, पदावधि, शपथ, पात्रता या संवैधानिक कर्तव्यों की स्पष्ट प्रक्रिया तय करता है ताकि संघ सरकार संविधान के दायरे में रहकर कार्य करे।

अनुच्छेद 78
Part V

राष्ट्रपति को जानकारी देने आदि के संबंध में प्रधानमंत्री के कर्तव्य

संविधान के भाग V (संघ की कार्यपालिका) का अनुच्छेद 78 'राष्ट्रपति को जानकारी देने आदि के संबंध में प्रधानमंत्री के कर्तव्य' को निर्धारित करता है। यह राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्रिपरिषद के निर्वाचन, पदावधि, शपथ, पात्रता या संवैधानिक कर्तव्यों की स्पष्ट प्रक्रिया तय करता है ताकि संघ सरकार संविधान के दायरे में रहकर कार्य करे।

अनुच्छेद 79
Part V

संसद का गठन

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 79 'संसद का गठन' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 80
Part V

राज्य सभा की संरचना

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 80 'राज्य सभा की संरचना' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 81
Part V

लोक सभा की संरचना

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 81 'लोक सभा की संरचना' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 82
Part V

प्रत्येक जनगणना के पश्चात् पुनः समायोजन (परिसीमन)

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 82 'प्रत्येक जनगणना के पश्चात् पुनः समायोजन (परिसीमन)' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 83
Part V

संसद के सदनों की अवधि

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 83 'संसद के सदनों की अवधि' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 84
Part V

संसद की सदस्यता के लिए अर्हता (योग्यता)

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 84 'संसद की सदस्यता के लिए अर्हता (योग्यता)' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 85
Part V

संसद के सत्र, सत्रावसान और विघटन

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 85 'संसद के सत्र, सत्रावसान और विघटन' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 86
Part V

सदनों में अभिभाषण का और उनको संदेश भेजने का राष्ट्रपति का अधिकार

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 86 'सदनों में अभिभाषण का और उनको संदेश भेजने का राष्ट्रपति का अधिकार' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 87
Part V

राष्ट्रपति का विशेष अभिभाषण

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 87 'राष्ट्रपति का विशेष अभिभाषण' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 88
Part V

सदनों के बारे में मंत्रियों और महान्यायवादी के अधिकार

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 88 'सदनों के बारे में मंत्रियों और महान्यायवादी के अधिकार' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 89
Part V

राज्य सभा का सभापति और उपसभापति

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 89 'राज्य सभा का सभापति और उपसभापति' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 90
Part V

उपसभापति का पद रिक्त होना, पदत्याग और पद से हटाया जाना

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 90 'उपसभापति का पद रिक्त होना, पदत्याग और पद से हटाया जाना' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 91
Part V

सभापति के पद के कर्तव्यों का पालन करने या सभापति के रूप में कार्य करने की उपसभापति या अन्य व्यक्ति की शक्ति

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 91 'सभापति के पद के कर्तव्यों का पालन करने या सभापति के रूप में कार्य करने की उपसभापति या अन्य व्यक्ति की शक्ति' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 92
Part V

जब सभापति या उपसभापति को पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन है तब उसका पीठासीन न होना

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 92 'जब सभापति या उपसभापति को पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन है तब उसका पीठासीन न होना' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 93
Part V

लोक सभा का अध्यक्ष (Speaker) और उपाध्यक्ष (Deputy Speaker)

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 93 'लोक सभा का अध्यक्ष (Speaker) और उपाध्यक्ष (Deputy Speaker)' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 94
Part V

अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का पद रिक्त होना, पदत्याग और पद से हटाया जाना

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 94 'अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का पद रिक्त होना, पदत्याग और पद से हटाया जाना' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 95
Part V

अध्यक्ष के पद के कर्तव्यों का पालन करने या अध्यक्ष के रूप में कार्य करने की उपाध्यक्ष या अन्य व्यक्ति की शक्ति

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 95 'अध्यक्ष के पद के कर्तव्यों का पालन करने या अध्यक्ष के रूप में कार्य करने की उपाध्यक्ष या अन्य व्यक्ति की शक्ति' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 96
Part V

जब अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन है तब उसका पीठासीन न होना

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 96 'जब अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन है तब उसका पीठासीन न होना' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 97
Part V

सभापति और उपसभापति तथा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन और भत्ते

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 97 'सभापति और उपसभापति तथा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन और भत्ते' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 98
Part V

संसद का सचिवालय

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 98 'संसद का सचिवालय' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 99
Part V

सदस्यों द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 99 'सदस्यों द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 100
Part V

सदनों में मतदान, रिक्तियों के होते हुए भी सदनों की कार्य करने की शक्ति और गणपूर्ति (Quorum)

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 100 'सदनों में मतदान, रिक्तियों के होते हुए भी सदनों की कार्य करने की शक्ति और गणपूर्ति (Quorum)' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 101
Part V

स्थानों का रिक्त होना

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 101 'स्थानों का रिक्त होना' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 102
Part V

सदस्यता के लिए निरर्हताएं (अयोग्यताएं)

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 102 'सदस्यता के लिए निरर्हताएं (अयोग्यताएं)' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 103
Part V

सदस्यों की निरर्हताओं से संबंधित प्रश्नों पर विनिश्चय

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 103 'सदस्यों की निरर्हताओं से संबंधित प्रश्नों पर विनिश्चय' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 104
Part V

अनुच्छेद 99 के अधीन शपथ लेने या प्रतिज्ञान करने से पहले या अर्हित न होते हुए या निरर्हित किए जाने पर बैठने और मत देने के लिए शास्ति

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 104 'अनुच्छेद 99 के अधीन शपथ लेने या प्रतिज्ञान करने से पहले या अर्हित न होते हुए या निरर्हित किए जाने पर बैठने और मत देने के लिए शास्ति' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 105
Part V

संसद के सदनों की तथा उनके सदस्यों और समितियों की शक्तियां, विशेषाधिकार आदि

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 105 'संसद के सदनों की तथा उनके सदस्यों और समितियों की शक्तियां, विशेषाधिकार आदि' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 106
Part V

सदस्यों के वेतन और भत्ते

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 106 'सदस्यों के वेतन और भत्ते' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 107
Part V

विधेयकों के पुरःस्थापन और पारित किए जाने के संबंध में उपबंध

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 107 'विधेयकों के पुरःस्थापन और पारित किए जाने के संबंध में उपबंध' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 108
Part V

कुछ दशाओं में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 108 'कुछ दशाओं में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 109
Part V

धन विधेयकों के संबंध में विशेष प्रक्रिया

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 109 'धन विधेयकों के संबंध में विशेष प्रक्रिया' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 110
Part V

धन विधेयक (Money Bill) की परिभाषा

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 110 'धन विधेयक (Money Bill) की परिभाषा' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 111
Part V

विधेयकों पर अनुमति (राष्ट्रपति की स्वीकृति)

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 111 'विधेयकों पर अनुमति (राष्ट्रपति की स्वीकृति)' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 112
Part V

वार्षिक वित्तीय विवरण (केंद्रीय बजट)

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 112 'वार्षिक वित्तीय विवरण (केंद्रीय बजट)' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 113
Part V

संसद में प्राक्कलनों (Estimates) के संबंध में प्रक्रिया

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 113 'संसद में प्राक्कलनों (Estimates) के संबंध में प्रक्रिया' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 114
Part V

विनियोग विधेयक (Appropriation Bills)

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 114 'विनियोग विधेयक (Appropriation Bills)' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 115
Part V

अनुपूरक, अतिरिक्त या अधिक अनुदान

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 115 'अनुपूरक, अतिरिक्त या अधिक अनुदान' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 116
Part V

लेखानुदान, प्रत्ययानुदान और अपवादानुदान

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 116 'लेखानुदान, प्रत्ययानुदान और अपवादानुदान' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 117
Part V

वित्त विधेयकों के बारे में विशेष उपबंध

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 117 'वित्त विधेयकों के बारे में विशेष उपबंध' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 118
Part V

प्रक्रिया के नियम

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 118 'प्रक्रिया के नियम' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 119
Part V

संसद में वित्तीय कार्य संबंधी प्रक्रिया का विधि द्वारा विनियमन

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 119 'संसद में वित्तीय कार्य संबंधी प्रक्रिया का विधि द्वारा विनियमन' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 120
Part V

संसद में प्रयोग की जाने वाली भाषा

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 120 'संसद में प्रयोग की जाने वाली भाषा' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 121
Part V

संसद में चर्चा पर निर्बंधन (न्यायाधीशों के आचरण पर चर्चा नहीं)

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 121 'संसद में चर्चा पर निर्बंधन (न्यायाधीशों के आचरण पर चर्चा नहीं)' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 122
Part V

न्यायालयों द्वारा संसद की कार्यवाहियों की जांच न किया जाना

संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 122 'न्यायालयों द्वारा संसद की कार्यवाहियों की जांच न किया जाना' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।

अनुच्छेद 123
Part V

संसद के विश्रांतिकाल में अध्यादेश प्रख्यापित करने की राष्ट्रपति की शक्ति

संविधान के Part V में स्थित अनुच्छेद 123 'संसद के विश्रांतिकाल में अध्यादेश प्रख्यापित करने की राष्ट्रपति की शक्ति' के संबंध में स्पष्ट संवैधानिक नियम और प्रक्रियात्मक सीमाएं निर्धारित करता है।

अनुच्छेद 124
Part V

उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) की स्थापना और गठन

अनुच्छेद 124 देश के सबसे बड़े न्यायालय—सुप्रीम कोर्ट—की स्थापना करता है। यह न्यायपालिका को राजनीतिक दबाव से पूरी तरह स्वतंत्र रखता है। किसी भी जज को सरकार अपनी मर्जी से नहीं हटा सकती; उन्हें केवल संसद में महाभियोग (दो-तिहाई बहुमत) द्वारा ही साबित कदाचार पर हटाया जा सकता है।

अनुच्छेद 125
Part V

न्यायाधीशों के वेतन आदि

संविधान के भाग V के अध्याय IV (संघ की न्यायपालिका) का अनुच्छेद 125 'न्यायाधीशों के वेतन आदि' से संबंधित है। यह सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के न्यायाधीशों की सेवा शर्तों, अभिलेख न्यायालय (Court of Record) की शक्ति, केंद्र-राज्य विवादों की आरंभिक अधिकारिता, दीवानी व फौजदारी अपीलों, निर्णयों के पुनर्विलोकन (Review) तथा न्यायिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 126
Part V

कार्यकारी मुख्य न्यायमूर्ति की नियुक्ति

संविधान के भाग V के अध्याय IV (संघ की न्यायपालिका) का अनुच्छेद 126 'कार्यकारी मुख्य न्यायमूर्ति की नियुक्ति' से संबंधित है। यह सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के न्यायाधीशों की सेवा शर्तों, अभिलेख न्यायालय (Court of Record) की शक्ति, केंद्र-राज्य विवादों की आरंभिक अधिकारिता, दीवानी व फौजदारी अपीलों, निर्णयों के पुनर्विलोकन (Review) तथा न्यायिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 127
Part V

तदर्थ (Ad hoc) न्यायाधीशों की नियुक्ति

संविधान के भाग V के अध्याय IV (संघ की न्यायपालिका) का अनुच्छेद 127 'तदर्थ (Ad hoc) न्यायाधीशों की नियुक्ति' से संबंधित है। यह सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के न्यायाधीशों की सेवा शर्तों, अभिलेख न्यायालय (Court of Record) की शक्ति, केंद्र-राज्य विवादों की आरंभिक अधिकारिता, दीवानी व फौजदारी अपीलों, निर्णयों के पुनर्विलोकन (Review) तथा न्यायिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 128
Part V

उच्चतम न्यायालय की बैठकों में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की उपस्थिति

संविधान के भाग V के अध्याय IV (संघ की न्यायपालिका) का अनुच्छेद 128 'उच्चतम न्यायालय की बैठकों में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की उपस्थिति' से संबंधित है। यह सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के न्यायाधीशों की सेवा शर्तों, अभिलेख न्यायालय (Court of Record) की शक्ति, केंद्र-राज्य विवादों की आरंभिक अधिकारिता, दीवानी व फौजदारी अपीलों, निर्णयों के पुनर्विलोकन (Review) तथा न्यायिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 129
Part V

उच्चतम न्यायालय का अभिलेख न्यायालय (Court of Record) होना

संविधान के भाग V के अध्याय IV (संघ की न्यायपालिका) का अनुच्छेद 129 'उच्चतम न्यायालय का अभिलेख न्यायालय (Court of Record) होना' से संबंधित है। यह सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के न्यायाधीशों की सेवा शर्तों, अभिलेख न्यायालय (Court of Record) की शक्ति, केंद्र-राज्य विवादों की आरंभिक अधिकारिता, दीवानी व फौजदारी अपीलों, निर्णयों के पुनर्विलोकन (Review) तथा न्यायिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 130
Part V

उच्चतम न्यायालय का स्थान

संविधान के भाग V के अध्याय IV (संघ की न्यायपालिका) का अनुच्छेद 130 'उच्चतम न्यायालय का स्थान' से संबंधित है। यह सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के न्यायाधीशों की सेवा शर्तों, अभिलेख न्यायालय (Court of Record) की शक्ति, केंद्र-राज्य विवादों की आरंभिक अधिकारिता, दीवानी व फौजदारी अपीलों, निर्णयों के पुनर्विलोकन (Review) तथा न्यायिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 131
Part V

उच्चतम न्यायालय की आरंभिक अधिकारिता (केंद्र-राज्य विवाद)

संविधान के भाग V के अध्याय IV (संघ की न्यायपालिका) का अनुच्छेद 131 'उच्चतम न्यायालय की आरंभिक अधिकारिता (केंद्र-राज्य विवाद)' से संबंधित है। यह सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के न्यायाधीशों की सेवा शर्तों, अभिलेख न्यायालय (Court of Record) की शक्ति, केंद्र-राज्य विवादों की आरंभिक अधिकारिता, दीवानी व फौजदारी अपीलों, निर्णयों के पुनर्विलोकन (Review) तथा न्यायिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 132
Part V

कुछ मामलों में उच्च न्यायालयों से अपीलों में उच्चतम न्यायालय की अपीलीय अधिकारिता

संविधान के भाग V के अध्याय IV (संघ की न्यायपालिका) का अनुच्छेद 132 'कुछ मामलों में उच्च न्यायालयों से अपीलों में उच्चतम न्यायालय की अपीलीय अधिकारिता' से संबंधित है। यह सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के न्यायाधीशों की सेवा शर्तों, अभिलेख न्यायालय (Court of Record) की शक्ति, केंद्र-राज्य विवादों की आरंभिक अधिकारिता, दीवानी व फौजदारी अपीलों, निर्णयों के पुनर्विलोकन (Review) तथा न्यायिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 133
Part V

सिविल विषयों से संबंधित उच्च न्यायालयों से अपीलों में उच्चतम न्यायालय की अपीलीय अधिकारिता

संविधान के भाग V के अध्याय IV (संघ की न्यायपालिका) का अनुच्छेद 133 'सिविल विषयों से संबंधित उच्च न्यायालयों से अपीलों में उच्चतम न्यायालय की अपीलीय अधिकारिता' से संबंधित है। यह सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के न्यायाधीशों की सेवा शर्तों, अभिलेख न्यायालय (Court of Record) की शक्ति, केंद्र-राज्य विवादों की आरंभिक अधिकारिता, दीवानी व फौजदारी अपीलों, निर्णयों के पुनर्विलोकन (Review) तथा न्यायिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 134
Part V

दांडिक (आपराधिक) विषयों में उच्चतम न्यायालय की अपीलीय अधिकारिता

संविधान के भाग V के अध्याय IV (संघ की न्यायपालिका) का अनुच्छेद 134 'दांडिक (आपराधिक) विषयों में उच्चतम न्यायालय की अपीलीय अधिकारिता' से संबंधित है। यह सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के न्यायाधीशों की सेवा शर्तों, अभिलेख न्यायालय (Court of Record) की शक्ति, केंद्र-राज्य विवादों की आरंभिक अधिकारिता, दीवानी व फौजदारी अपीलों, निर्णयों के पुनर्विलोकन (Review) तथा न्यायिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 134A
Part V

उच्चतम न्यायालय में अपील के लिए प्रमाणपत्र

संविधान के भाग V के अध्याय IV (संघ की न्यायपालिका) का अनुच्छेद 134A 'उच्चतम न्यायालय में अपील के लिए प्रमाणपत्र' से संबंधित है। यह सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के न्यायाधीशों की सेवा शर्तों, अभिलेख न्यायालय (Court of Record) की शक्ति, केंद्र-राज्य विवादों की आरंभिक अधिकारिता, दीवानी व फौजदारी अपीलों, निर्णयों के पुनर्विलोकन (Review) तथा न्यायिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 135
Part V

विद्यमान विधि के अधीन फेडरल न्यायालय की अधिकारिता और शक्तियों का उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रयोक्तव्य होना

संविधान के भाग V के अध्याय IV (संघ की न्यायपालिका) का अनुच्छेद 135 'विद्यमान विधि के अधीन फेडरल न्यायालय की अधिकारिता और शक्तियों का उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रयोक्तव्य होना' से संबंधित है। यह सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के न्यायाधीशों की सेवा शर्तों, अभिलेख न्यायालय (Court of Record) की शक्ति, केंद्र-राज्य विवादों की आरंभिक अधिकारिता, दीवानी व फौजदारी अपीलों, निर्णयों के पुनर्विलोकन (Review) तथा न्यायिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 136
Part V

अपील के लिए उच्चतम न्यायालय की विशेष इजाजत (Special Leave Petition - SLP)

संविधान के भाग V के अध्याय IV (संघ की न्यायपालिका) का अनुच्छेद 136 'अपील के लिए उच्चतम न्यायालय की विशेष इजाजत (Special Leave Petition - SLP)' से संबंधित है। यह सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के न्यायाधीशों की सेवा शर्तों, अभिलेख न्यायालय (Court of Record) की शक्ति, केंद्र-राज्य विवादों की आरंभिक अधिकारिता, दीवानी व फौजदारी अपीलों, निर्णयों के पुनर्विलोकन (Review) तथा न्यायिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 137
Part V

उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्णयों या आदेशों का पुनर्विलोकन (Review)

संविधान के भाग V के अध्याय IV (संघ की न्यायपालिका) का अनुच्छेद 137 'उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्णयों या आदेशों का पुनर्विलोकन (Review)' से संबंधित है। यह सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के न्यायाधीशों की सेवा शर्तों, अभिलेख न्यायालय (Court of Record) की शक्ति, केंद्र-राज्य विवादों की आरंभिक अधिकारिता, दीवानी व फौजदारी अपीलों, निर्णयों के पुनर्विलोकन (Review) तथा न्यायिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 138
Part V

उच्चतम न्यायालय की अधिकारिता की वृद्धि

संविधान के भाग V के अध्याय IV (संघ की न्यायपालिका) का अनुच्छेद 138 'उच्चतम न्यायालय की अधिकारिता की वृद्धि' से संबंधित है। यह सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के न्यायाधीशों की सेवा शर्तों, अभिलेख न्यायालय (Court of Record) की शक्ति, केंद्र-राज्य विवादों की आरंभिक अधिकारिता, दीवानी व फौजदारी अपीलों, निर्णयों के पुनर्विलोकन (Review) तथा न्यायिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 139
Part V

कुछ रिट निकालने की शक्तियों का उच्चतम न्यायालय को प्रदत्त किया जाना

संविधान के भाग V के अध्याय IV (संघ की न्यायपालिका) का अनुच्छेद 139 'कुछ रिट निकालने की शक्तियों का उच्चतम न्यायालय को प्रदत्त किया जाना' से संबंधित है। यह सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के न्यायाधीशों की सेवा शर्तों, अभिलेख न्यायालय (Court of Record) की शक्ति, केंद्र-राज्य विवादों की आरंभिक अधिकारिता, दीवानी व फौजदारी अपीलों, निर्णयों के पुनर्विलोकन (Review) तथा न्यायिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 139A
Part V

कुछ मामलों का अंतरण (Transfer of Cases)

संविधान के भाग V के अध्याय IV (संघ की न्यायपालिका) का अनुच्छेद 139A 'कुछ मामलों का अंतरण (Transfer of Cases)' से संबंधित है। यह सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के न्यायाधीशों की सेवा शर्तों, अभिलेख न्यायालय (Court of Record) की शक्ति, केंद्र-राज्य विवादों की आरंभिक अधिकारिता, दीवानी व फौजदारी अपीलों, निर्णयों के पुनर्विलोकन (Review) तथा न्यायिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 140
Part V

उच्चतम न्यायालय की आनुषंगिक शक्तियां

संविधान के भाग V के अध्याय IV (संघ की न्यायपालिका) का अनुच्छेद 140 'उच्चतम न्यायालय की आनुषंगिक शक्तियां' से संबंधित है। यह सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के न्यायाधीशों की सेवा शर्तों, अभिलेख न्यायालय (Court of Record) की शक्ति, केंद्र-राज्य विवादों की आरंभिक अधिकारिता, दीवानी व फौजदारी अपीलों, निर्णयों के पुनर्विलोकन (Review) तथा न्यायिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 141
Part V

उच्चतम न्यायालय द्वारा घोषित विधि का सभी न्यायालयों पर आबद्धकर होना

अनुच्छेद 141 घोषणा करता है कि 'उच्चतम न्यायालय द्वारा घोषित विधि भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर सभी न्यायालयों पर आबद्धकर (Binding) होगी।' इसी अनुच्छेद की शक्ति से सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले—जैसे डी.के. बसु के गिरफ्तारी नियम, अर्नेश कुमार के जमानत नियम, ललिता कुमारी का अनिवार्य FIR नियम या बुलडोजर कार्रवाई पर रोक—देश के हर थाने, तहसील और निचली अदालत पर कानून की तरह तुरंत लागू होते हैं।

अनुच्छेद 142
Part V

पूर्ण न्याय (Complete Justice) करने के लिए उच्चतम न्यायालय की डिक्रियों और आदेशों का प्रवर्तन

अनुच्छेद 142(1) सुप्रीम कोर्ट को एक असाधारण और अद्वितीय शक्ति देता है: जब किसी मामले में मौजूदा कानून मौन हो या तकनीकी पेचीदगियों के कारण पीड़ित को इंसाफ न मिल पा रहा हो, तब सुप्रीम कोर्ट 'पूर्ण न्याय' (Complete Justice) करने के लिए कोई भी आवश्यक आदेश पारित कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 का उपयोग करके अनेक ऐतिहासिक काम किए हैं—जैसे कानून बनने से पहले कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए 'विशाखा गाइडलाइंस (1997)' जारी करना, भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों को मुआवजा दिलाना, गवाहों की सुरक्षा योजना लागू करना, और आपसी सहमति से तलाक के मामलों में 6 महीने की अनिवार्य प्रतीक्षा अवधि को समाप्त कर तुरंत राहत देना (शिल्पा शैलेश केस, 2023)।

अनुच्छेद 143
Part V

उच्चतम न्यायालय से परामर्श करने की राष्ट्रपति की शक्ति (Presidential Reference)

संविधान के भाग V के अध्याय IV (संघ की न्यायपालिका) का अनुच्छेद 143 'उच्चतम न्यायालय से परामर्श करने की राष्ट्रपति की शक्ति (Presidential Reference)' से संबंधित है। यह सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के न्यायाधीशों की सेवा शर्तों, अभिलेख न्यायालय (Court of Record) की शक्ति, केंद्र-राज्य विवादों की आरंभिक अधिकारिता, दीवानी व फौजदारी अपीलों, निर्णयों के पुनर्विलोकन (Review) तथा न्यायिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 144
Part V

सिविल और न्यायिक प्राधिकारियों द्वारा उच्चतम न्यायालय की सहायता में कार्य किया जाना

संविधान के भाग V के अध्याय IV (संघ की न्यायपालिका) का अनुच्छेद 144 'सिविल और न्यायिक प्राधिकारियों द्वारा उच्चतम न्यायालय की सहायता में कार्य किया जाना' से संबंधित है। यह सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के न्यायाधीशों की सेवा शर्तों, अभिलेख न्यायालय (Court of Record) की शक्ति, केंद्र-राज्य विवादों की आरंभिक अधिकारिता, दीवानी व फौजदारी अपीलों, निर्णयों के पुनर्विलोकन (Review) तथा न्यायिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 145
Part V

न्यायालय के नियम आदि

संविधान के भाग V के अध्याय IV (संघ की न्यायपालिका) का अनुच्छेद 145 'न्यायालय के नियम आदि' से संबंधित है। यह सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के न्यायाधीशों की सेवा शर्तों, अभिलेख न्यायालय (Court of Record) की शक्ति, केंद्र-राज्य विवादों की आरंभिक अधिकारिता, दीवानी व फौजदारी अपीलों, निर्णयों के पुनर्विलोकन (Review) तथा न्यायिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 146
Part V

उच्चतम न्यायालय के अधिकारी और सेवक तथा व्यय

संविधान के भाग V के अध्याय IV (संघ की न्यायपालिका) का अनुच्छेद 146 'उच्चतम न्यायालय के अधिकारी और सेवक तथा व्यय' से संबंधित है। यह सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के न्यायाधीशों की सेवा शर्तों, अभिलेख न्यायालय (Court of Record) की शक्ति, केंद्र-राज्य विवादों की आरंभिक अधिकारिता, दीवानी व फौजदारी अपीलों, निर्णयों के पुनर्विलोकन (Review) तथा न्यायिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 147
Part V

निर्वचन (व्याख्या)

संविधान के भाग V के अध्याय IV (संघ की न्यायपालिका) का अनुच्छेद 147 'निर्वचन (व्याख्या)' से संबंधित है। यह सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के न्यायाधीशों की सेवा शर्तों, अभिलेख न्यायालय (Court of Record) की शक्ति, केंद्र-राज्य विवादों की आरंभिक अधिकारिता, दीवानी व फौजदारी अपीलों, निर्णयों के पुनर्विलोकन (Review) तथा न्यायिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 148
Part V

भारत का नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG)

संविधान के भाग V के अध्याय V का अनुच्छेद 148 'भारत का नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG)' का उपबंध करता है। डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) को संविधान के अधीन सबसे महत्वपूर्ण अधिकारी बताया था। यह केंद्र और राज्य सरकारों के प्रत्येक रुपये के खर्च की स्वतंत्र जांच और उसकी ऑडिट रिपोर्ट संसद व विधानसभा के पटल पर रखने की अनिवार्यता तय करता है।

अनुच्छेद 149
Part V

नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के कर्तव्य और शक्तियां

संविधान के भाग V के अध्याय V का अनुच्छेद 149 'नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के कर्तव्य और शक्तियां' का उपबंध करता है। डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) को संविधान के अधीन सबसे महत्वपूर्ण अधिकारी बताया था। यह केंद्र और राज्य सरकारों के प्रत्येक रुपये के खर्च की स्वतंत्र जांच और उसकी ऑडिट रिपोर्ट संसद व विधानसभा के पटल पर रखने की अनिवार्यता तय करता है।

अनुच्छेद 150
Part V

संघ के और राज्यों के लेखाओं का प्ररूप

संविधान के भाग V के अध्याय V का अनुच्छेद 150 'संघ के और राज्यों के लेखाओं का प्ररूप' का उपबंध करता है। डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) को संविधान के अधीन सबसे महत्वपूर्ण अधिकारी बताया था। यह केंद्र और राज्य सरकारों के प्रत्येक रुपये के खर्च की स्वतंत्र जांच और उसकी ऑडिट रिपोर्ट संसद व विधानसभा के पटल पर रखने की अनिवार्यता तय करता है।

अनुच्छेद 151
Part V

संपरीक्षा प्रतिवेदन (Audit Reports)

संविधान के भाग V के अध्याय V का अनुच्छेद 151 'संपरीक्षा प्रतिवेदन (Audit Reports)' का उपबंध करता है। डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) को संविधान के अधीन सबसे महत्वपूर्ण अधिकारी बताया था। यह केंद्र और राज्य सरकारों के प्रत्येक रुपये के खर्च की स्वतंत्र जांच और उसकी ऑडिट रिपोर्ट संसद व विधानसभा के पटल पर रखने की अनिवार्यता तय करता है।

Part V (102 अनुच्छेदs)
सार्वजनिक डोमेन (Public Domain) एवं वैधानिक प्रामाणिकता सूचना

भारतीय प्रतिलिप्यधिकार अधिनियम (Copyright Act), 1957 की धारा 52(1)(q) के अंतर्गत भारत का संविधान, संसदीय अधिनियम, राजपत्र अधिसूचनाएं तथा उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों के निर्णय सार्वजनिक डोमेन (Public Domain) में हैं। यह पाठ विधायी विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय, भारत सरकार (India Code) के आधिकारिक अभिलेखों पर आधारित है।

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