संविधान के भाग XXI का अनुच्छेद 369 'राज्य सूची के कुछ विषयों के संबंध में विधि बनाने की संसद की अस्थायी शक्ति' का उपबंध करता है। यह विभिन्न राज्यों (अनुच्छेद 371 श्रृंखला: महाराष्ट्र, गुजरात, नगालैंड, असम, मणिपुर, आंध्र प्रदेश, सिक्किम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, गोवा आदि) के लिए विशेष क्षेत्रीय विकास व सांस्कृतिक संरक्षण, अथवा 1950 में संविधान लागू होने के समय प्रचलित कानूनों और न्यायिक संस्थाओं की निरंतरता (अनुच्छेद 372-392) को निर्धारित करता है।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 370 अक्टूबर 1947 में महाराजा हरि सिंह द्वारा हस्ताक्षरित 'इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन' के बाद 1949 में एक 'अस्थायी प्रावधान' के रूप में शामिल किया गया था।
संवैधानिक रूपरेखा:
1. ऐतिहासिक स्थिति: संसद की शक्ति केवल रक्षा, विदेश मामले, संचार व वित्त तक सीमित थी। अन्य केंद्रीय कानूनों के लिए राज्य सरकार की सहमति अनिवार्य थी और राज्य का अपना अलग संविधान था (1956 में लागू)।
2. अगस्त 2019 का ऐतिहासिक बदलाव: 5-6 अगस्त 2019 को राष्ट्रपति द्वारा संवैधानिक आदेश (C.O. 272 व 273) जारी किए गए। इसके द्वारा अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी कर दिया गया और पूरे भारतीय संविधान को बिना किसी अपवाद के जम्मू-कश्मीर पर लागू किया गया।
3. राज्य पुनर्गठन: संसद ने जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 पारित किया, जिसके तहत राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर (विधानसभा सहित) और लद्दाख (बिना विधानसभा)—में विभाजित किया गया।
4. सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला (11 दिसंबर 2023): 5 जजों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से अनुच्छेद 370 के निरसन को वैध ठहराया और स्पष्ट किया कि भारत में विलय के बाद जम्मू-कश्मीर के पास कोई आंतरिक संप्रभुता नहीं थी, अनुच्छेद 370 हमेशा से अस्थायी था, और चुनाव कराने व राज्य का दर्जा बहाल करने का निर्देश दिया।
संविधान के भाग XXI का अनुच्छेद 371 'महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों के संबंध में विशेष उपबंध' का उपबंध करता है। यह विभिन्न राज्यों (अनुच्छेद 371 श्रृंखला: महाराष्ट्र, गुजरात, नगालैंड, असम, मणिपुर, आंध्र प्रदेश, सिक्किम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, गोवा आदि) के लिए विशेष क्षेत्रीय विकास व सांस्कृतिक संरक्षण, अथवा 1950 में संविधान लागू होने के समय प्रचलित कानूनों और न्यायिक संस्थाओं की निरंतरता (अनुच्छेद 372-392) को निर्धारित करता है।
संविधान के भाग XXI का अनुच्छेद 371A 'नागालैंड राज्य के संबंध में विशेष उपबंध' का उपबंध करता है। यह विभिन्न राज्यों (अनुच्छेद 371 श्रृंखला: महाराष्ट्र, गुजरात, नगालैंड, असम, मणिपुर, आंध्र प्रदेश, सिक्किम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, गोवा आदि) के लिए विशेष क्षेत्रीय विकास व सांस्कृतिक संरक्षण, अथवा 1950 में संविधान लागू होने के समय प्रचलित कानूनों और न्यायिक संस्थाओं की निरंतरता (अनुच्छेद 372-392) को निर्धारित करता है।
संविधान के भाग XXI का अनुच्छेद 371B 'असम राज्य के संबंध में विशेष उपबंध' का उपबंध करता है। यह विभिन्न राज्यों (अनुच्छेद 371 श्रृंखला: महाराष्ट्र, गुजरात, नगालैंड, असम, मणिपुर, आंध्र प्रदेश, सिक्किम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, गोवा आदि) के लिए विशेष क्षेत्रीय विकास व सांस्कृतिक संरक्षण, अथवा 1950 में संविधान लागू होने के समय प्रचलित कानूनों और न्यायिक संस्थाओं की निरंतरता (अनुच्छेद 372-392) को निर्धारित करता है।
संविधान के भाग XXI का अनुच्छेद 371C 'मणिपुर राज्य के संबंध में विशेष उपबंध' का उपबंध करता है। यह विभिन्न राज्यों (अनुच्छेद 371 श्रृंखला: महाराष्ट्र, गुजरात, नगालैंड, असम, मणिपुर, आंध्र प्रदेश, सिक्किम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, गोवा आदि) के लिए विशेष क्षेत्रीय विकास व सांस्कृतिक संरक्षण, अथवा 1950 में संविधान लागू होने के समय प्रचलित कानूनों और न्यायिक संस्थाओं की निरंतरता (अनुच्छेद 372-392) को निर्धारित करता है।
संविधान के भाग XXI का अनुच्छेद 371D 'आंध्र प्रदेश या तेलंगाना राज्य के संबंध में विशेष उपबंध' का उपबंध करता है। यह विभिन्न राज्यों (अनुच्छेद 371 श्रृंखला: महाराष्ट्र, गुजरात, नगालैंड, असम, मणिपुर, आंध्र प्रदेश, सिक्किम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, गोवा आदि) के लिए विशेष क्षेत्रीय विकास व सांस्कृतिक संरक्षण, अथवा 1950 में संविधान लागू होने के समय प्रचलित कानूनों और न्यायिक संस्थाओं की निरंतरता (अनुच्छेद 372-392) को निर्धारित करता है।
संविधान के भाग XXI का अनुच्छेद 371E 'आंध्र प्रदेश में केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना' का उपबंध करता है। यह विभिन्न राज्यों (अनुच्छेद 371 श्रृंखला: महाराष्ट्र, गुजरात, नगालैंड, असम, मणिपुर, आंध्र प्रदेश, सिक्किम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, गोवा आदि) के लिए विशेष क्षेत्रीय विकास व सांस्कृतिक संरक्षण, अथवा 1950 में संविधान लागू होने के समय प्रचलित कानूनों और न्यायिक संस्थाओं की निरंतरता (अनुच्छेद 372-392) को निर्धारित करता है।
संविधान के भाग XXI का अनुच्छेद 371F 'सिक्किम राज्य के संबंध में विशेष उपबंध' का उपबंध करता है। यह विभिन्न राज्यों (अनुच्छेद 371 श्रृंखला: महाराष्ट्र, गुजरात, नगालैंड, असम, मणिपुर, आंध्र प्रदेश, सिक्किम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, गोवा आदि) के लिए विशेष क्षेत्रीय विकास व सांस्कृतिक संरक्षण, अथवा 1950 में संविधान लागू होने के समय प्रचलित कानूनों और न्यायिक संस्थाओं की निरंतरता (अनुच्छेद 372-392) को निर्धारित करता है।
संविधान के भाग XXI का अनुच्छेद 371G 'मिजोरम राज्य के संबंध में विशेष उपबंध' का उपबंध करता है। यह विभिन्न राज्यों (अनुच्छेद 371 श्रृंखला: महाराष्ट्र, गुजरात, नगालैंड, असम, मणिपुर, आंध्र प्रदेश, सिक्किम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, गोवा आदि) के लिए विशेष क्षेत्रीय विकास व सांस्कृतिक संरक्षण, अथवा 1950 में संविधान लागू होने के समय प्रचलित कानूनों और न्यायिक संस्थाओं की निरंतरता (अनुच्छेद 372-392) को निर्धारित करता है।
संविधान के भाग XXI का अनुच्छेद 371H 'अरुणाचल प्रदेश राज्य के संबंध में विशेष उपबंध' का उपबंध करता है। यह विभिन्न राज्यों (अनुच्छेद 371 श्रृंखला: महाराष्ट्र, गुजरात, नगालैंड, असम, मणिपुर, आंध्र प्रदेश, सिक्किम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, गोवा आदि) के लिए विशेष क्षेत्रीय विकास व सांस्कृतिक संरक्षण, अथवा 1950 में संविधान लागू होने के समय प्रचलित कानूनों और न्यायिक संस्थाओं की निरंतरता (अनुच्छेद 372-392) को निर्धारित करता है।
संविधान के भाग XXI का अनुच्छेद 371I 'गोवा राज्य के संबंध में विशेष उपबंध' का उपबंध करता है। यह विभिन्न राज्यों (अनुच्छेद 371 श्रृंखला: महाराष्ट्र, गुजरात, नगालैंड, असम, मणिपुर, आंध्र प्रदेश, सिक्किम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, गोवा आदि) के लिए विशेष क्षेत्रीय विकास व सांस्कृतिक संरक्षण, अथवा 1950 में संविधान लागू होने के समय प्रचलित कानूनों और न्यायिक संस्थाओं की निरंतरता (अनुच्छेद 372-392) को निर्धारित करता है।
संविधान के भाग XXI का अनुच्छेद 372 'विद्यमान विधियों का प्रवृत्त बने रहना और उनका अनुकूलन' का उपबंध करता है। यह विभिन्न राज्यों (अनुच्छेद 371 श्रृंखला: महाराष्ट्र, गुजरात, नगालैंड, असम, मणिपुर, आंध्र प्रदेश, सिक्किम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, गोवा आदि) के लिए विशेष क्षेत्रीय विकास व सांस्कृतिक संरक्षण, अथवा 1950 में संविधान लागू होने के समय प्रचलित कानूनों और न्यायिक संस्थाओं की निरंतरता (अनुच्छेद 372-392) को निर्धारित करता है।
संविधान के भाग XXI का अनुच्छेद 372A 'विधियों का अनुकूलन करने की राष्ट्रपति की शक्ति' का उपबंध करता है। यह विभिन्न राज्यों (अनुच्छेद 371 श्रृंखला: महाराष्ट्र, गुजरात, नगालैंड, असम, मणिपुर, आंध्र प्रदेश, सिक्किम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, गोवा आदि) के लिए विशेष क्षेत्रीय विकास व सांस्कृतिक संरक्षण, अथवा 1950 में संविधान लागू होने के समय प्रचलित कानूनों और न्यायिक संस्थाओं की निरंतरता (अनुच्छेद 372-392) को निर्धारित करता है।
संविधान के भाग XXI का अनुच्छेद 373 'निवारक निरोध में रखे गए व्यक्तियों के संबंध में कुछ दशाओं में आदेश करने की राष्ट्रपति की शक्ति' का उपबंध करता है। यह विभिन्न राज्यों (अनुच्छेद 371 श्रृंखला: महाराष्ट्र, गुजरात, नगालैंड, असम, मणिपुर, आंध्र प्रदेश, सिक्किम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, गोवा आदि) के लिए विशेष क्षेत्रीय विकास व सांस्कृतिक संरक्षण, अथवा 1950 में संविधान लागू होने के समय प्रचलित कानूनों और न्यायिक संस्थाओं की निरंतरता (अनुच्छेद 372-392) को निर्धारित करता है।
संविधान के भाग XXI का अनुच्छेद 374 'फेडरल न्यायालय के न्यायाधीशों और फेडरल न्यायालय में लंबित कार्यवाहियों के बारे में उपबंध' का उपबंध करता है। यह विभिन्न राज्यों (अनुच्छेद 371 श्रृंखला: महाराष्ट्र, गुजरात, नगालैंड, असम, मणिपुर, आंध्र प्रदेश, सिक्किम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, गोवा आदि) के लिए विशेष क्षेत्रीय विकास व सांस्कृतिक संरक्षण, अथवा 1950 में संविधान लागू होने के समय प्रचलित कानूनों और न्यायिक संस्थाओं की निरंतरता (अनुच्छेद 372-392) को निर्धारित करता है।
संविधान के भाग XXI का अनुच्छेद 375 'संविधान के उपबंधों के अधीन रहते हुए न्यायालयों, प्राधिकारियों और अधिकारियों का कृत्य करते रहना' का उपबंध करता है। यह विभिन्न राज्यों (अनुच्छेद 371 श्रृंखला: महाराष्ट्र, गुजरात, नगालैंड, असम, मणिपुर, आंध्र प्रदेश, सिक्किम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, गोवा आदि) के लिए विशेष क्षेत्रीय विकास व सांस्कृतिक संरक्षण, अथवा 1950 में संविधान लागू होने के समय प्रचलित कानूनों और न्यायिक संस्थाओं की निरंतरता (अनुच्छेद 372-392) को निर्धारित करता है।
संविधान के भाग XXI का अनुच्छेद 376 'उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के बारे में उपबंध' का उपबंध करता है। यह विभिन्न राज्यों (अनुच्छेद 371 श्रृंखला: महाराष्ट्र, गुजरात, नगालैंड, असम, मणिपुर, आंध्र प्रदेश, सिक्किम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, गोवा आदि) के लिए विशेष क्षेत्रीय विकास व सांस्कृतिक संरक्षण, अथवा 1950 में संविधान लागू होने के समय प्रचलित कानूनों और न्यायिक संस्थाओं की निरंतरता (अनुच्छेद 372-392) को निर्धारित करता है।
संविधान के भाग XXI का अनुच्छेद 377 'भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के बारे में उपबंध' का उपबंध करता है। यह विभिन्न राज्यों (अनुच्छेद 371 श्रृंखला: महाराष्ट्र, गुजरात, नगालैंड, असम, मणिपुर, आंध्र प्रदेश, सिक्किम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, गोवा आदि) के लिए विशेष क्षेत्रीय विकास व सांस्कृतिक संरक्षण, अथवा 1950 में संविधान लागू होने के समय प्रचलित कानूनों और न्यायिक संस्थाओं की निरंतरता (अनुच्छेद 372-392) को निर्धारित करता है।
संविधान के भाग XXI का अनुच्छेद 378 'लोक सेवा आयोगों के बारे में उपबंध' का उपबंध करता है। यह विभिन्न राज्यों (अनुच्छेद 371 श्रृंखला: महाराष्ट्र, गुजरात, नगालैंड, असम, मणिपुर, आंध्र प्रदेश, सिक्किम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, गोवा आदि) के लिए विशेष क्षेत्रीय विकास व सांस्कृतिक संरक्षण, अथवा 1950 में संविधान लागू होने के समय प्रचलित कानूनों और न्यायिक संस्थाओं की निरंतरता (अनुच्छेद 372-392) को निर्धारित करता है।
संविधान के भाग XXI का अनुच्छेद 378A 'आंध्र प्रदेश विधान सभा की अवधि के बारे में विशेष उपबंध' का उपबंध करता है। यह विभिन्न राज्यों (अनुच्छेद 371 श्रृंखला: महाराष्ट्र, गुजरात, नगालैंड, असम, मणिपुर, आंध्र प्रदेश, सिक्किम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, गोवा आदि) के लिए विशेष क्षेत्रीय विकास व सांस्कृतिक संरक्षण, अथवा 1950 में संविधान लागू होने के समय प्रचलित कानूनों और न्यायिक संस्थाओं की निरंतरता (अनुच्छेद 372-392) को निर्धारित करता है।
संविधान के भाग XXI का अनुच्छेद 392 'कठिनाइयों को दूर करने की राष्ट्रपति की शक्ति' का उपबंध करता है। यह विभिन्न राज्यों (अनुच्छेद 371 श्रृंखला: महाराष्ट्र, गुजरात, नगालैंड, असम, मणिपुर, आंध्र प्रदेश, सिक्किम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, गोवा आदि) के लिए विशेष क्षेत्रीय विकास व सांस्कृतिक संरक्षण, अथवा 1950 में संविधान लागू होने के समय प्रचलित कानूनों और न्यायिक संस्थाओं की निरंतरता (अनुच्छेद 372-392) को निर्धारित करता है।