यदि नियोक्ता वेतन रोक ले, बिना वेतन ओवरटाइम कराए या मजदूरी न दे तो क्या अधिकार हैं?
वेतन रोकना या न्यूनतम मजदूरी से कम देना संविधान के अनुच्छेद 23 के तहत बलात्श्रम (बंधुआ मजदूरी) की श्रेणी में आता है।
- • सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के अनुसार कमाई हुई मजदूरी न देना संविधान के अनुच्छेद 23 का सीधा उल्लंघन है।
- • कंपनी या मालिक कर्मचारी के मूल प्रमाण पत्र जब्त नहीं कर सकता।
- कंपनी को लिखित नोटिस भेजें और लेबर कमिश्नर कार्यालय में शिकायत दर्ज कराएं।
क्या कंपनी नोटिस पीरियड पूरा होने के बाद भी आपका रिलीविंग लेटर या अनुभव प्रमाण पत्र रोक सकती है?
नहीं। नोटिस पूरा होने पर अनुभव प्रमाण पत्र रोकना आजीविका के अधिकार (अनुच्छेद 21) और रोजगार की स्वतंत्रता का सीधा उल्लंघन है।
- • हाईकोर्ट ने माना है कि अनुभव प्रमाण पत्र कर्मचारी का वैधानिक अधिकार है।
- एचआर को लिखित ईमेल भेजें और न मिलने पर लेबर कमिश्नर या वकील के जरिए लीगल नोटिस भिजवाएं।
क्या कंपनी नौकरी छोड़ने के बाद प्रतिद्वंद्वी कंपनी में काम करने पर 1-2 साल का प्रतिबंध लगा सकती है?
पूरी तरह अमान्य और शून्य! भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 27 के तहत किसी भी नागरिक को उसकी पसंद का रोजगार करने से रोकने वाला कोई भी बॉन्ड कानूनन शून्य (Void) होता है।
- • नौकरी समाप्त होने के बाद लगाया गया कोई भी नॉन-कम्पीट प्रतिबंध भारतीय अदालतों में टिक नहीं सकता।
- कंपनी के नॉन-कम्पीट बॉन्ड की धमकियों से न डरें। केवल कंपनी का गोपनीय डेटा या कोड साथ न ले जाएं।
क्या कंपनी किसी गर्भवती महिला को नौकरी से निकाल सकती है या 26 सप्ताह की सवैतनिक मैटरनिटी लीव देने से मना कर सकती है?
सख्ती से गैरकानूनी! मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत हर महिला को 26 सप्ताह की पूरी तनख्वाह के साथ छुट्टी पाने का हक है। गर्भावस्था के दौरान नौकरी से निकालना संगीन अपराध है।
- • छुट्टी के दौरान नौकरी से निकालना या वेतन रोकना कानूनन अपराध है।
- एचआर को लिखित मेडिकल प्रमाण पत्र दें और छंटनी होने पर लेबर कमिश्नर में शिकायत करें।
क्या 5 साल की निरंतर सेवा पूरी होने के बाद कंपनी ग्रेच्युटी देने से इनकार कर सकती है?
नहीं। 5 साल की सेवा पूरी होने पर ग्रेच्युटी पाना कर्मचारी का वैधानिक अधिकार है। कंपनी इसे अपनी मर्जी से रोक नहीं सकती।
- • 30 दिनों से अधिक की देरी होने पर कंपनी को ब्याज सहित भुगतान करना होगा।
- इस्तीफे के बाद फॉर्म I भरकर कंपनी को दें और न मिलने पर लेबर कोर्ट में फॉर्म N जमा करें।
कंपनी द्वारा मनमाना वेतन काटना: क्या नियोक्ता बिना जांच के आपकी पूरी सैलरी रोक सकता है या जुर्माना काट सकता है?
पूर्णतः गैरकानूनी! मजदूरी भुगतान अधिनियम 1936 के तहत, नियोक्ता केवल कानूनी कटौतियां (पीएफ, ईएसआई, टैक्स) ही कर सकता है। कुल कटौती 50% से अधिक नहीं हो सकती और बिना लिखित जांच के सैलरी काटना अवैध है।
- • 1. किसी भी महीने में कुल कटौती कर्मचारी के अर्जित वेतन के 50% से अधिक नहीं हो सकती।
- • 2. किसी गलती पर जुर्माना केवल कारण बताओ नोटिस और लिखित स्पष्टीकरण के बाद ही लगाया जा सकता है।
- • 3. महीने की 7 से 10 तारीख के भीतर वेतन का बैंक खाते में जमा होना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
- 1. एचआर को ईमेल भेजकर सैलरी स्लिप और वेतन काटने का कानूनी कारण मांगें।
- 2. लिखें: "वेतन भुगतान अधिनियम की धारा 7 के तहत अनधिकृत वेतन कटौती कानूनी अपराध है।\"
- 3. 15 दिनों में भुगतान न होने पर श्रम आयुक्त (Labour Officer) के समक्ष दावा प्रस्तुत करें।
- 4. धारा 15 के तहत काटी गई रकम के साथ 10 गुना तक हर्जाने की मांग करें।
सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम: क्या कर्मचारी दोगुने वेतन (Double Pay) की दर से ओवरटाइम पाने के हकदार हैं?
अनिवार्य है! कारखाना अधिनियम की धारा 59 और दुकान प्रतिष्ठान नियमों के अनुसार, यदि कोई कर्मचारी दिन में 9 घंटे या सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम करता है, तो उसे सामान्य वेतन की तुलना में दोगुनी दर से ओवरटाइम मिलना अनिवार्य है।
- • 1. सामान्य कार्य सप्ताह 48 घंटे का होता है; इससे अधिक किया गया काम ओवरटाइम की श्रेणी में आता है।
- • 2. ओवरटाइम दर की गणना सामान्य वेतन (मूल वेतन + महंगाई भत्ता) से ठीक दोगुनी होती है।
- • 3. कंपनियां बिना पैसे दिए वीकेंड पर काम करने या मुफ्त में देर तक रुकने के लिए मजबूर नहीं कर सकतीं।
- 1. अपने आने-जाने के समय (बायोमेट्रिक पंच और ईमेल) का निजी रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
- 2. पेरोल विभाग को कारखाना अधिनियम की धारा 59 के तहत दोगुने ओवरटाइम का बिल प्रस्तुत करें।
- 3. कंपनी द्वारा भुगतान न करने पर श्रम निरीक्षक (Labour Inspector) के पास शिकायत दर्ज कराएं।
- 4. श्रम अदालत के माध्यम से ब्याज सहित बकाए का भुगतान प्राप्त करें।