राज्य का महाधिवक्ता (Advocate-General)
त्वरित सारांश (TL;DR)
अनुच्छेद 165 (राज्य का महाधिवक्ता (Advocate-General)): भाग VI के तहत राज्य की कार्यपालिका (राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद व महाधिवक्ता) के संवैधानिक नियम।
सरल नागरिक भाषा में अर्थ
संविधान के भाग VI (राज्य शासन) का अनुच्छेद 165 'राज्य का महाधिवक्ता (Advocate-General)' का प्रावधान करता है। यह राज्यों में राज्यपाल की नियुक्ति व पदावधि, मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह, राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General) और राज्य सरकार के कार्य-संचालन के संवैधानिक नियमों को तय करता है।
प्रमुख संवैधानिक उपबंध एवं बिंदु
संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद 165): Part VI के अंतर्गत 'राज्य का महाधिवक्ता (Advocate-General)' के लिए बाध्यकारी कानूनी नियम तय करता है
इसमें 3 खंड (Clauses) के माध्यम से स्पष्ट प्रक्रिया तय की गई है
उच्च न्यायालय (High Court) की स्वतंत्र न्यायिक निगरानी द्वारा संरक्षित
अपवाद एवं युक्तियुक्त निर्बंधन (सीमाएं)
अनुच्छेद 163 व 164(2) तथा सुप्रीम कोर्ट (शमशेर सिंह व नबाम रेबिया केस) के अनुसार, राज्यपाल राज्य विधानसभा के प्रति उत्तरदायी मंत्रिपरिषद की सलाह से बंधे संवैधानिक प्रमुख हैं।
दैनिक जीवन में यह क्यों महत्वपूर्ण है?
यह सुनिश्चित करता है कि राज्य का प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य और स्थानीय कल्याण योजनाएं जनता द्वारा चुनी गई राज्य सरकार के माध्यम से जवाबदेह ढंग से चलें।
और गहराई से पढ़ना चाहते हैं? आधिकारिक राजपत्रित मूल पाठ या सुप्रीम कोर्ट निर्णय व संविधान सभा बहस देखें: