सदन या सदनों में अभिभाषण का और उनको संदेश भेजने का राज्यपाल का अधिकार
त्वरित सारांश (TL;DR)
अनुच्छेद 175 (सदन या सदनों में अभिभाषण का और उनको संदेश भेजने का राज्यपाल का अधिकार): भाग VI के तहत राज्य विधानमंडल (विधानसभा व विधान परिषद) की संरचना, कार्यप्रणाली व कानून निर्माण के नियम।
सरल नागरिक भाषा में अर्थ
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 175 'सदन या सदनों में अभिभाषण का और उनको संदेश भेजने का राज्यपाल का अधिकार' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
प्रमुख संवैधानिक उपबंध एवं बिंदु
संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद 175): Part VI के अंतर्गत 'सदन या सदनों में अभिभाषण का और उनको संदेश भेजने का राज्यपाल का अधिकार' के लिए बाध्यकारी कानूनी नियम तय करता है
इसमें 2 खंड (Clauses) के माध्यम से स्पष्ट प्रक्रिया तय की गई है
इस अनुच्छेद के तहत संवैधानिक पद की शक्तियों का प्रयोग लोकतांत्रिक सलाह और संवैधानिक मर्यादाओं के भीतर ही होता है
अपवाद एवं युक्तियुक्त निर्बंधन (सीमाएं)
राज्य विधानमंडल सातवीं अनुसूची की राज्य सूची व समवर्ती सूची के दायरे में ही कानून बना सकते हैं और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर सकते।
दैनिक जीवन में यह क्यों महत्वपूर्ण है?
यह आपके द्वारा चुने गए विधायकों (MLA) के माध्यम से राज्य स्तर पर पारदर्शी कानून निर्माण और राज्य के बजट पर जनता का नियंत्रण सुनिश्चित करता है।
और गहराई से पढ़ना चाहते हैं? आधिकारिक राजपत्रित मूल पाठ या सुप्रीम कोर्ट निर्णय व संविधान सभा बहस देखें: