आपातकालीन नागरिक हेल्पलाइन

अनुच्छेद 220 Part VI

स्थायी न्यायाधीश रहने के पश्चात् विधि-व्यवसाय (वकालत) पर निर्बंधन

त्वरित सारांश (TL;DR)
अनुच्छेद 220 (स्थायी न्यायाधीश रहने के पश्चात् विधि-व्यवसाय (वकालत) पर निर्बंधन): भाग VI के तहत राज्यों के उच्च न्यायालय (High Courts) के गठन, स्वतंत्रता और न्यायिक अधिकारिता का प्रावधान।
संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 220 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'स्थायी न्यायाधीश रहने के पश्चात् विधि-व्यवसाय (वकालत) पर निर्बंधन' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।
संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद 220): Part VI के अंतर्गत 'स्थायी न्यायाधीश रहने के पश्चात् विधि-व्यवसाय (वकालत) पर निर्बंधन' के लिए बाध्यकारी कानूनी नियम तय करता है
यह एक सीधा और स्पष्ट संवैधानिक निर्देश है जिसका पालन करना सभी संबंधित प्राधिकारियों के लिए अनिवार्य है
सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) की स्वतंत्र न्यायिक निगरानी द्वारा संरक्षित
एल. चंद्र कुमार बनाम भारत संघ (1997) के अनुसार हाई कोर्ट की न्यायिक समीक्षा की शक्ति संविधान के अनुल्लंघनीय मूल ढांचे का हिस्सा है।
यह प्रत्येक नागरिक को अपने ही राज्य में पुलिस या प्रशासन की किसी भी गैर-कानूनी कार्रवाई के खिलाफ तुरंत न्याय पाने का मजबूत मंच देता है।
और गहराई से पढ़ना चाहते हैं? आधिकारिक राजपत्रित मूल पाठ या सुप्रीम कोर्ट निर्णय व संविधान सभा बहस देखें:
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