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अनुच्छेद 233A Part VI

कुछ जिला न्यायाधीशों की नियुक्तियों का और उनके द्वारा दिए गए निर्णयों आदि का विधिमान्यकरण

त्वरित सारांश (TL;DR)
अनुच्छेद 233A (कुछ जिला न्यायाधीशों की नियुक्तियों का और उनके द्वारा दिए गए निर्णयों आदि का विधिमान्यकरण): जिला न्यायाधीशों और निचली अदालतों (Subordinate Courts) की कार्यपालिका से स्वतंत्रता व हाई कोर्ट के नियंत्रण का प्रावधान।
संविधान के भाग VI के अध्याय VI (अधीनस्थ न्यायालय) का अनुच्छेद 233A 'कुछ जिला न्यायाधीशों की नियुक्तियों का और उनके द्वारा दिए गए निर्णयों आदि का विधिमान्यकरण' का प्रावधान करता है। यह जिला जजों और निचली अदालतों के न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति, पदोन्नति और नियंत्रण को राज्य सरकार की राजनीति से अलग रखकर सीधे उच्च न्यायालय (High Court) के अधीन रखता है।
संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद 233A): Part VI के अंतर्गत 'कुछ जिला न्यायाधीशों की नियुक्तियों का और उनके द्वारा दिए गए निर्णयों आदि का विधिमान्यकरण' के लिए बाध्यकारी कानूनी नियम तय करता है
इसमें 1 खंड (Clauses) व 3 उप-खंड के माध्यम से स्पष्ट प्रक्रिया तय की गई है
अनुच्छेद 233A के उल्लंघन में की गई किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई को हाई कोर्ट (अनुच्छेद 226) या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है
अनुच्छेद 235 के तहत जिला व अधीनस्थ अदालतों पर पूर्ण नियंत्रण हाई कोर्ट का होता है, न कि पुलिस या राज्य गृह विभाग का।
आम नागरिक को सबसे पहले जिला अदालत या मजिस्ट्रेट के पास जाना पड़ता है; यह अनुच्छेद वहां निष्पक्ष जमानत और बिना दबाव के न्याय सुनिश्चित करता है।
और गहराई से पढ़ना चाहते हैं? आधिकारिक राजपत्रित मूल पाठ या सुप्रीम कोर्ट निर्णय व संविधान सभा बहस देखें:
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