संविधान के भाग VI (राज्य शासन) का अनुच्छेद 152 'परिभाषा (भाग 6 के संदर्भ में राज्य की परिभाषा)' का प्रावधान करता है। यह राज्यों में राज्यपाल की नियुक्ति व पदावधि, मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह, राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General) और राज्य सरकार के कार्य-संचालन के संवैधानिक नियमों को तय करता है।
संविधान के भाग VI (राज्य शासन) का अनुच्छेद 153 'राज्यों के राज्यपाल' का प्रावधान करता है। यह राज्यों में राज्यपाल की नियुक्ति व पदावधि, मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह, राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General) और राज्य सरकार के कार्य-संचालन के संवैधानिक नियमों को तय करता है।
संविधान के भाग VI (राज्य शासन) का अनुच्छेद 154 'राज्य की कार्यपालिका शक्ति' का प्रावधान करता है। यह राज्यों में राज्यपाल की नियुक्ति व पदावधि, मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह, राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General) और राज्य सरकार के कार्य-संचालन के संवैधानिक नियमों को तय करता है।
संविधान के भाग VI (राज्य शासन) का अनुच्छेद 155 'राज्यपाल की नियुक्ति' का प्रावधान करता है। यह राज्यों में राज्यपाल की नियुक्ति व पदावधि, मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह, राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General) और राज्य सरकार के कार्य-संचालन के संवैधानिक नियमों को तय करता है।
संविधान के भाग VI (राज्य शासन) का अनुच्छेद 156 'राज्यपाल की पदावधि' का प्रावधान करता है। यह राज्यों में राज्यपाल की नियुक्ति व पदावधि, मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह, राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General) और राज्य सरकार के कार्य-संचालन के संवैधानिक नियमों को तय करता है।
संविधान के भाग VI (राज्य शासन) का अनुच्छेद 157 'राज्यपाल नियुक्त होने के लिए अर्हताएं' का प्रावधान करता है। यह राज्यों में राज्यपाल की नियुक्ति व पदावधि, मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह, राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General) और राज्य सरकार के कार्य-संचालन के संवैधानिक नियमों को तय करता है।
संविधान के भाग VI (राज्य शासन) का अनुच्छेद 158 'राज्यपाल के पद के लिए शर्तें' का प्रावधान करता है। यह राज्यों में राज्यपाल की नियुक्ति व पदावधि, मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह, राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General) और राज्य सरकार के कार्य-संचालन के संवैधानिक नियमों को तय करता है।
संविधान के भाग VI (राज्य शासन) का अनुच्छेद 159 'राज्यपाल द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान' का प्रावधान करता है। यह राज्यों में राज्यपाल की नियुक्ति व पदावधि, मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह, राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General) और राज्य सरकार के कार्य-संचालन के संवैधानिक नियमों को तय करता है।
संविधान के भाग VI (राज्य शासन) का अनुच्छेद 160 'कुछ आकस्मिकताओं में राज्यपाल के कृत्यों का निर्वहन' का प्रावधान करता है। यह राज्यों में राज्यपाल की नियुक्ति व पदावधि, मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह, राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General) और राज्य सरकार के कार्य-संचालन के संवैधानिक नियमों को तय करता है।
संविधान के भाग VI (राज्य शासन) का अनुच्छेद 161 'क्षमा आदि की और कुछ मामलों में दंडादेश के निलंबन, परिहार या लघुकरण की राज्यपाल की शक्ति' का प्रावधान करता है। यह राज्यों में राज्यपाल की नियुक्ति व पदावधि, मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह, राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General) और राज्य सरकार के कार्य-संचालन के संवैधानिक नियमों को तय करता है।
संविधान के भाग VI (राज्य शासन) का अनुच्छेद 162 'राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार' का प्रावधान करता है। यह राज्यों में राज्यपाल की नियुक्ति व पदावधि, मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह, राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General) और राज्य सरकार के कार्य-संचालन के संवैधानिक नियमों को तय करता है।
संविधान के भाग VI (राज्य शासन) का अनुच्छेद 163 'राज्यपाल को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद' का प्रावधान करता है। यह राज्यों में राज्यपाल की नियुक्ति व पदावधि, मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह, राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General) और राज्य सरकार के कार्य-संचालन के संवैधानिक नियमों को तय करता है।
संविधान के भाग VI (राज्य शासन) का अनुच्छेद 164 'मंत्रियों के बारे में अन्य उपबंध (मुख्यमंत्री की नियुक्ति और विधानसभा के प्रति उत्तरदायित्व)' का प्रावधान करता है। यह राज्यों में राज्यपाल की नियुक्ति व पदावधि, मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह, राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General) और राज्य सरकार के कार्य-संचालन के संवैधानिक नियमों को तय करता है।
संविधान के भाग VI (राज्य शासन) का अनुच्छेद 165 'राज्य का महाधिवक्ता (Advocate-General)' का प्रावधान करता है। यह राज्यों में राज्यपाल की नियुक्ति व पदावधि, मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह, राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General) और राज्य सरकार के कार्य-संचालन के संवैधानिक नियमों को तय करता है।
संविधान के भाग VI (राज्य शासन) का अनुच्छेद 166 'राज्य की सरकार के कार्य का संचालन' का प्रावधान करता है। यह राज्यों में राज्यपाल की नियुक्ति व पदावधि, मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह, राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General) और राज्य सरकार के कार्य-संचालन के संवैधानिक नियमों को तय करता है।
संविधान के भाग VI (राज्य शासन) का अनुच्छेद 167 'राज्यपाल को जानकारी देने आदि के संबंध में मुख्यमंत्री के कर्तव्य' का प्रावधान करता है। यह राज्यों में राज्यपाल की नियुक्ति व पदावधि, मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह, राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General) और राज्य सरकार के कार्य-संचालन के संवैधानिक नियमों को तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 168 'राज्यों के विधान-मंडलों का गठन' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 169 'राज्यों में विधान परिषदों का उत्सादन (समाप्ति) या सृजन' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 170 'विधान सभाओं की संरचना' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 171 'विधान परिषदों की संरचना' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 172 'राज्यों के विधान-मंडलों की अवधि' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 173 'राज्य के विधान-मंडल की सदस्यता के लिए अर्हता' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 174 'राज्य के विधान-मंडल के सत्र, सत्रावसान और विघटन' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 175 'सदन या सदनों में अभिभाषण का और उनको संदेश भेजने का राज्यपाल का अधिकार' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 176 'राज्यपाल का विशेष अभिभाषण' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 177 'सदनों के बारे में मंत्रियों और महाधिवक्ता के अधिकार' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 178 'विधान सभा का अध्यक्ष और उपाध्यक्ष' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 179 'अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का पद रिक्त होना, पदत्याग और पद से हटाया जाना' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 180 'अध्यक्ष के पद के कर्तव्यों का पालन करने या अध्यक्ष के रूप में कार्य करने की उपाध्यक्ष या अन्य व्यक्ति की शक्ति' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 181 'जब अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन है तब उसका पीठासीन न होना' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 182 'विधान परिषद का सभापति और उपसभापति' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 183 'सभापति और उपसभापति का पद रिक्त होना, पदत्याग और पद से हटाया जाना' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 184 'सभापति के पद के कर्तव्यों का पालन करने या सभापति के रूप में कार्य करने की उपसभापति या अन्य व्यक्ति की शक्ति' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 185 'जब सभापति या उपसभापति को पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन है तब उसका पीठासीन न होना' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 186 'अध्यक्ष और उपाध्यक्ष तथा सभापति और उपसभापति के वेतन और भत्ते' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 187 'राज्य के विधान-मंडल का सचिवालय' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 188 'सदस्यों द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 189 'सदनों में मतदान, रिक्तियों के होते हुए भी सदनों की कार्य करने की शक्ति और गणपूर्ति' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 190 'स्थानों का रिक्त होना' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 191 'सदस्यता के लिए निरर्हताएं (अयोग्यताएं)' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 192 'सदस्यों की निरर्हताओं से संबंधित प्रश्नों पर विनिश्चय' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 193 'अनुच्छेद 188 के अधीन शपथ लेने या प्रतिज्ञान करने से पहले या अर्हित न होते हुए या निरर्हित किए जाने पर बैठने और मत देने के लिए शास्ति' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 194 'विधान-मंडलों के सदनों की तथा उनके सदस्यों और समितियों की शक्तियां, विशेषाधिकार आदि' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 195 'सदस्यों के वेतन और भत्ते' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 196 'विधेयकों के पुरःस्थापन और पारित किए जाने के संबंध में उपबंध' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 197 'धन विधेयकों से भिन्न विधेयकों के बारे में विधान परिषद की शक्तियों पर निर्बंधन' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 198 'धन विधेयकों के संबंध में विशेष प्रक्रिया' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 199 'राज्य विधान-मंडल में "धन विधेयक" की परिभाषा' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 200 'विधेयकों पर अनुमति (राज्यपाल की स्वीकृति)' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 201 'विचार के लिए आरक्षित विधेयक (राष्ट्रपति के विचारार्थ)' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 202 'वार्षिक वित्तीय विवरण (राज्य बजट)' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 203 'विधान-मंडल में प्राक्कलनों के संबंध में प्रक्रिया' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 204 'विनियोग विधेयक (Appropriation Bills)' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 205 'अनुपूरक, अतिरिक्त या अधिक अनुदान' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 206 'लेखानुदान, प्रत्ययानुदान और अपवादानुदान' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 207 'वित्त विधेयकों के बारे में विशेष उपबंध' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 208 'प्रक्रिया के नियम' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 209 'राज्य के विधान-मंडल में वित्तीय कार्य संबंधी प्रक्रिया का विधि द्वारा विनियमन' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 210 'विधान-मंडल में प्रयोग की जाने वाली भाषा' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 211 'विधान-मंडल में चर्चा पर निर्बंधन' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 212 'न्यायालयों द्वारा विधान-मंडल की कार्यवाहियों की जांच न किया जाना' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।
संविधान के Part VI में स्थित अनुच्छेद 213 'विधान-मंडल के विश्रांतिकाल में अध्यादेश प्रख्यापित करने की राज्यपाल की शक्ति' के संबंध में स्पष्ट संवैधानिक नियम और प्रक्रियात्मक सीमाएं निर्धारित करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 214 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'राज्यों के लिए उच्च न्यायालय (High Courts)' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 215 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'उच्च न्यायालयों का अभिलेख न्यायालय होना' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 216 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'उच्च न्यायालयों का गठन' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 217 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति और उसके पद की शर्तें' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 218 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'उच्चतम न्यायालय से संबंधित कुछ उपबंधों का उच्च न्यायालयों को लागू होना' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 219 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 220 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'स्थायी न्यायाधीश रहने के पश्चात् विधि-व्यवसाय (वकालत) पर निर्बंधन' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 221 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'न्यायाधीशों के वेतन आदि' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 222 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'किसी न्यायाधीश का एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय को अंतरण (तबादला)' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 223 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'कार्यकारी मुख्य न्यायमूर्ति की नियुक्ति' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 224 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'अपर और कार्यकारी न्यायाधीशों की नियुक्ति' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 224A राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'उच्च न्यायालयों की बैठकों में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 225 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'विद्यमान उच्च न्यायालयों की अधिकारिता' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।
अनुच्छेद 226 आम भारतीय नागरिक के दैनिक जीवन में सबसे अधिक काम आने वाला संवैधानिक हथियार है, क्योंकि इसके लिए आपको दिल्ली (सुप्रीम कोर्ट) जाने की जरूरत नहीं है—आप अपने ही राज्य के हाईकोर्ट में तुरंत याचिका दायर कर सकते हैं। इसके तहत हाईकोर्ट अपने राज्य के भीतर किसी भी पुलिस अधिकारी, कलेक्टर, नगर निगम, बिजली बोर्ड या सरकारी विभाग के विरुद्ध 5 रिट (बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण और अधिकार-पृच्छा) या निर्देश जारी कर सकता है।
सबसे रोचक तथ्य यह है कि कानूनी दायरे के मामले में अनुच्छेद 226 की शक्ति अनुच्छेद 32 से भी अधिक व्यापक है: जहां सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 32 के तहत केवल 'मौलिक अधिकारों' के उल्लंघन पर ही रिट जारी करता है, वहीं हाईकोर्ट अनुच्छेद 226 के तहत मौलिक अधिकारों के साथ-साथ 'किसी भी अन्य उद्देश्य के लिए' (For any other purpose)—जैसे संपत्ति का अधिकार (अनुच्छेद 300A), अवैध बुलडोजर कार्रवाई, नौकरी/पेंशन विवाद, गलत टैक्स नोटिस या फर्जी FIR—पर भी तुरंत रिट और स्टे ऑर्डर दे सकता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 227 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'सभी न्यायालयों के अधीक्षण की उच्च न्यायालय की शक्ति' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 228 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'कुछ मामलों का उच्च न्यायालय को अंतरण' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 229 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'उच्च न्यायालयों के अधिकारी और सेवक तथा व्यय' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 230 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'उच्च न्यायालयों की अधिकारिता का संघ राज्यक्षेत्रों पर विस्तार' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 231 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'दो या अधिक राज्यों के लिए एक ही उच्च न्यायालय की स्थापना' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय VI (अधीनस्थ न्यायालय) का अनुच्छेद 233 'जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति' का प्रावधान करता है। यह जिला जजों और निचली अदालतों के न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति, पदोन्नति और नियंत्रण को राज्य सरकार की राजनीति से अलग रखकर सीधे उच्च न्यायालय (High Court) के अधीन रखता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय VI (अधीनस्थ न्यायालय) का अनुच्छेद 233A 'कुछ जिला न्यायाधीशों की नियुक्तियों का और उनके द्वारा दिए गए निर्णयों आदि का विधिमान्यकरण' का प्रावधान करता है। यह जिला जजों और निचली अदालतों के न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति, पदोन्नति और नियंत्रण को राज्य सरकार की राजनीति से अलग रखकर सीधे उच्च न्यायालय (High Court) के अधीन रखता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय VI (अधीनस्थ न्यायालय) का अनुच्छेद 234 'न्यायिक सेवा में जिला न्यायाधीशों से भिन्न व्यक्तियों की भर्ती' का प्रावधान करता है। यह जिला जजों और निचली अदालतों के न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति, पदोन्नति और नियंत्रण को राज्य सरकार की राजनीति से अलग रखकर सीधे उच्च न्यायालय (High Court) के अधीन रखता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय VI (अधीनस्थ न्यायालय) का अनुच्छेद 235 'अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण' का प्रावधान करता है। यह जिला जजों और निचली अदालतों के न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति, पदोन्नति और नियंत्रण को राज्य सरकार की राजनीति से अलग रखकर सीधे उच्च न्यायालय (High Court) के अधीन रखता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय VI (अधीनस्थ न्यायालय) का अनुच्छेद 236 'निर्वचन (न्यायिक सेवा संबंधी परिभाषाएं)' का प्रावधान करता है। यह जिला जजों और निचली अदालतों के न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति, पदोन्नति और नियंत्रण को राज्य सरकार की राजनीति से अलग रखकर सीधे उच्च न्यायालय (High Court) के अधीन रखता है।
संविधान के भाग VI के अध्याय VI (अधीनस्थ न्यायालय) का अनुच्छेद 237 'कुछ वर्ग या वर्गों के मजिस्ट्रेटों पर इस अध्याय के उपबंधों का लागू होना' का प्रावधान करता है। यह जिला जजों और निचली अदालतों के न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति, पदोन्नति और नियंत्रण को राज्य सरकार की राजनीति से अलग रखकर सीधे उच्च न्यायालय (High Court) के अधीन रखता है।