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🇮🇳 भारत का सर्वोच्च विधान • 26 जनवरी 1950 को लागू

भारत का संपूर्ण संविधान: डिजिटल नागरिक महाग्रंथ

विश्व के सबसे विस्तृत लिखित संविधान के 395 अनुच्छेदों, 25 भागों और 12 अनुसूचियों का अध्ययन करें सरल नागरिक भाषा, संविधान सभा के ऐतिहासिक विमर्श और सर्वोच्च अदालत के फैसलों के साथ।

395+
अनुच्छेद (Articles)
25
भाग (Thematic Parts)
12
अनुसूचियां (Schedules)
106
संशोधन (Amendments)
📜 उद्देशिका “हम, भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व-सम्पन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए...”
“हम, भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व-सम्पन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को: सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय; विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता; प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर, 1949 ईस्वी को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।”
Page 1 • सरल नागरिक भाषा में
अनुच्छेद 152
Part VI

परिभाषा (भाग 6 के संदर्भ में राज्य की परिभाषा)

संविधान के भाग VI (राज्य शासन) का अनुच्छेद 152 'परिभाषा (भाग 6 के संदर्भ में राज्य की परिभाषा)' का प्रावधान करता है। यह राज्यों में राज्यपाल की नियुक्ति व पदावधि, मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह, राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General) और राज्य सरकार के कार्य-संचालन के संवैधानिक नियमों को तय करता है।

अनुच्छेद 153
Part VI

राज्यों के राज्यपाल

संविधान के भाग VI (राज्य शासन) का अनुच्छेद 153 'राज्यों के राज्यपाल' का प्रावधान करता है। यह राज्यों में राज्यपाल की नियुक्ति व पदावधि, मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह, राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General) और राज्य सरकार के कार्य-संचालन के संवैधानिक नियमों को तय करता है।

अनुच्छेद 154
Part VI

राज्य की कार्यपालिका शक्ति

संविधान के भाग VI (राज्य शासन) का अनुच्छेद 154 'राज्य की कार्यपालिका शक्ति' का प्रावधान करता है। यह राज्यों में राज्यपाल की नियुक्ति व पदावधि, मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह, राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General) और राज्य सरकार के कार्य-संचालन के संवैधानिक नियमों को तय करता है।

अनुच्छेद 155
Part VI

राज्यपाल की नियुक्ति

संविधान के भाग VI (राज्य शासन) का अनुच्छेद 155 'राज्यपाल की नियुक्ति' का प्रावधान करता है। यह राज्यों में राज्यपाल की नियुक्ति व पदावधि, मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह, राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General) और राज्य सरकार के कार्य-संचालन के संवैधानिक नियमों को तय करता है।

अनुच्छेद 156
Part VI

राज्यपाल की पदावधि

संविधान के भाग VI (राज्य शासन) का अनुच्छेद 156 'राज्यपाल की पदावधि' का प्रावधान करता है। यह राज्यों में राज्यपाल की नियुक्ति व पदावधि, मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह, राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General) और राज्य सरकार के कार्य-संचालन के संवैधानिक नियमों को तय करता है।

अनुच्छेद 157
Part VI

राज्यपाल नियुक्त होने के लिए अर्हताएं

संविधान के भाग VI (राज्य शासन) का अनुच्छेद 157 'राज्यपाल नियुक्त होने के लिए अर्हताएं' का प्रावधान करता है। यह राज्यों में राज्यपाल की नियुक्ति व पदावधि, मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह, राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General) और राज्य सरकार के कार्य-संचालन के संवैधानिक नियमों को तय करता है।

अनुच्छेद 158
Part VI

राज्यपाल के पद के लिए शर्तें

संविधान के भाग VI (राज्य शासन) का अनुच्छेद 158 'राज्यपाल के पद के लिए शर्तें' का प्रावधान करता है। यह राज्यों में राज्यपाल की नियुक्ति व पदावधि, मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह, राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General) और राज्य सरकार के कार्य-संचालन के संवैधानिक नियमों को तय करता है।

अनुच्छेद 159
Part VI

राज्यपाल द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान

संविधान के भाग VI (राज्य शासन) का अनुच्छेद 159 'राज्यपाल द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान' का प्रावधान करता है। यह राज्यों में राज्यपाल की नियुक्ति व पदावधि, मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह, राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General) और राज्य सरकार के कार्य-संचालन के संवैधानिक नियमों को तय करता है।

अनुच्छेद 160
Part VI

कुछ आकस्मिकताओं में राज्यपाल के कृत्यों का निर्वहन

संविधान के भाग VI (राज्य शासन) का अनुच्छेद 160 'कुछ आकस्मिकताओं में राज्यपाल के कृत्यों का निर्वहन' का प्रावधान करता है। यह राज्यों में राज्यपाल की नियुक्ति व पदावधि, मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह, राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General) और राज्य सरकार के कार्य-संचालन के संवैधानिक नियमों को तय करता है।

अनुच्छेद 161
Part VI

क्षमा आदि की और कुछ मामलों में दंडादेश के निलंबन, परिहार या लघुकरण की राज्यपाल की शक्ति

संविधान के भाग VI (राज्य शासन) का अनुच्छेद 161 'क्षमा आदि की और कुछ मामलों में दंडादेश के निलंबन, परिहार या लघुकरण की राज्यपाल की शक्ति' का प्रावधान करता है। यह राज्यों में राज्यपाल की नियुक्ति व पदावधि, मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह, राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General) और राज्य सरकार के कार्य-संचालन के संवैधानिक नियमों को तय करता है।

अनुच्छेद 162
Part VI

राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार

संविधान के भाग VI (राज्य शासन) का अनुच्छेद 162 'राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार' का प्रावधान करता है। यह राज्यों में राज्यपाल की नियुक्ति व पदावधि, मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह, राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General) और राज्य सरकार के कार्य-संचालन के संवैधानिक नियमों को तय करता है।

अनुच्छेद 163
Part VI

राज्यपाल को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद

संविधान के भाग VI (राज्य शासन) का अनुच्छेद 163 'राज्यपाल को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद' का प्रावधान करता है। यह राज्यों में राज्यपाल की नियुक्ति व पदावधि, मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह, राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General) और राज्य सरकार के कार्य-संचालन के संवैधानिक नियमों को तय करता है।

अनुच्छेद 164
Part VI

मंत्रियों के बारे में अन्य उपबंध (मुख्यमंत्री की नियुक्ति और विधानसभा के प्रति उत्तरदायित्व)

संविधान के भाग VI (राज्य शासन) का अनुच्छेद 164 'मंत्रियों के बारे में अन्य उपबंध (मुख्यमंत्री की नियुक्ति और विधानसभा के प्रति उत्तरदायित्व)' का प्रावधान करता है। यह राज्यों में राज्यपाल की नियुक्ति व पदावधि, मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह, राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General) और राज्य सरकार के कार्य-संचालन के संवैधानिक नियमों को तय करता है।

अनुच्छेद 165
Part VI

राज्य का महाधिवक्ता (Advocate-General)

संविधान के भाग VI (राज्य शासन) का अनुच्छेद 165 'राज्य का महाधिवक्ता (Advocate-General)' का प्रावधान करता है। यह राज्यों में राज्यपाल की नियुक्ति व पदावधि, मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह, राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General) और राज्य सरकार के कार्य-संचालन के संवैधानिक नियमों को तय करता है।

अनुच्छेद 166
Part VI

राज्य की सरकार के कार्य का संचालन

संविधान के भाग VI (राज्य शासन) का अनुच्छेद 166 'राज्य की सरकार के कार्य का संचालन' का प्रावधान करता है। यह राज्यों में राज्यपाल की नियुक्ति व पदावधि, मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह, राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General) और राज्य सरकार के कार्य-संचालन के संवैधानिक नियमों को तय करता है।

अनुच्छेद 167
Part VI

राज्यपाल को जानकारी देने आदि के संबंध में मुख्यमंत्री के कर्तव्य

संविधान के भाग VI (राज्य शासन) का अनुच्छेद 167 'राज्यपाल को जानकारी देने आदि के संबंध में मुख्यमंत्री के कर्तव्य' का प्रावधान करता है। यह राज्यों में राज्यपाल की नियुक्ति व पदावधि, मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह, राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General) और राज्य सरकार के कार्य-संचालन के संवैधानिक नियमों को तय करता है।

अनुच्छेद 168
Part VI

राज्यों के विधान-मंडलों का गठन

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 168 'राज्यों के विधान-मंडलों का गठन' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 169
Part VI

राज्यों में विधान परिषदों का उत्सादन (समाप्ति) या सृजन

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 169 'राज्यों में विधान परिषदों का उत्सादन (समाप्ति) या सृजन' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 170
Part VI

विधान सभाओं की संरचना

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 170 'विधान सभाओं की संरचना' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 171
Part VI

विधान परिषदों की संरचना

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 171 'विधान परिषदों की संरचना' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 172
Part VI

राज्यों के विधान-मंडलों की अवधि

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 172 'राज्यों के विधान-मंडलों की अवधि' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 173
Part VI

राज्य के विधान-मंडल की सदस्यता के लिए अर्हता

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 173 'राज्य के विधान-मंडल की सदस्यता के लिए अर्हता' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 174
Part VI

राज्य के विधान-मंडल के सत्र, सत्रावसान और विघटन

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 174 'राज्य के विधान-मंडल के सत्र, सत्रावसान और विघटन' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 175
Part VI

सदन या सदनों में अभिभाषण का और उनको संदेश भेजने का राज्यपाल का अधिकार

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 175 'सदन या सदनों में अभिभाषण का और उनको संदेश भेजने का राज्यपाल का अधिकार' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 176
Part VI

राज्यपाल का विशेष अभिभाषण

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 176 'राज्यपाल का विशेष अभिभाषण' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 177
Part VI

सदनों के बारे में मंत्रियों और महाधिवक्ता के अधिकार

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 177 'सदनों के बारे में मंत्रियों और महाधिवक्ता के अधिकार' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 178
Part VI

विधान सभा का अध्यक्ष और उपाध्यक्ष

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 178 'विधान सभा का अध्यक्ष और उपाध्यक्ष' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 179
Part VI

अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का पद रिक्त होना, पदत्याग और पद से हटाया जाना

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 179 'अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का पद रिक्त होना, पदत्याग और पद से हटाया जाना' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 180
Part VI

अध्यक्ष के पद के कर्तव्यों का पालन करने या अध्यक्ष के रूप में कार्य करने की उपाध्यक्ष या अन्य व्यक्ति की शक्ति

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 180 'अध्यक्ष के पद के कर्तव्यों का पालन करने या अध्यक्ष के रूप में कार्य करने की उपाध्यक्ष या अन्य व्यक्ति की शक्ति' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 181
Part VI

जब अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन है तब उसका पीठासीन न होना

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 181 'जब अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन है तब उसका पीठासीन न होना' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 182
Part VI

विधान परिषद का सभापति और उपसभापति

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 182 'विधान परिषद का सभापति और उपसभापति' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 183
Part VI

सभापति और उपसभापति का पद रिक्त होना, पदत्याग और पद से हटाया जाना

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 183 'सभापति और उपसभापति का पद रिक्त होना, पदत्याग और पद से हटाया जाना' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 184
Part VI

सभापति के पद के कर्तव्यों का पालन करने या सभापति के रूप में कार्य करने की उपसभापति या अन्य व्यक्ति की शक्ति

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 184 'सभापति के पद के कर्तव्यों का पालन करने या सभापति के रूप में कार्य करने की उपसभापति या अन्य व्यक्ति की शक्ति' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 185
Part VI

जब सभापति या उपसभापति को पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन है तब उसका पीठासीन न होना

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 185 'जब सभापति या उपसभापति को पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन है तब उसका पीठासीन न होना' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 186
Part VI

अध्यक्ष और उपाध्यक्ष तथा सभापति और उपसभापति के वेतन और भत्ते

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 186 'अध्यक्ष और उपाध्यक्ष तथा सभापति और उपसभापति के वेतन और भत्ते' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 187
Part VI

राज्य के विधान-मंडल का सचिवालय

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 187 'राज्य के विधान-मंडल का सचिवालय' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 188
Part VI

सदस्यों द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 188 'सदस्यों द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 189
Part VI

सदनों में मतदान, रिक्तियों के होते हुए भी सदनों की कार्य करने की शक्ति और गणपूर्ति

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 189 'सदनों में मतदान, रिक्तियों के होते हुए भी सदनों की कार्य करने की शक्ति और गणपूर्ति' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 190
Part VI

स्थानों का रिक्त होना

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 190 'स्थानों का रिक्त होना' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 191
Part VI

सदस्यता के लिए निरर्हताएं (अयोग्यताएं)

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 191 'सदस्यता के लिए निरर्हताएं (अयोग्यताएं)' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 192
Part VI

सदस्यों की निरर्हताओं से संबंधित प्रश्नों पर विनिश्चय

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 192 'सदस्यों की निरर्हताओं से संबंधित प्रश्नों पर विनिश्चय' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 193
Part VI

अनुच्छेद 188 के अधीन शपथ लेने या प्रतिज्ञान करने से पहले या अर्हित न होते हुए या निरर्हित किए जाने पर बैठने और मत देने के लिए शास्ति

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 193 'अनुच्छेद 188 के अधीन शपथ लेने या प्रतिज्ञान करने से पहले या अर्हित न होते हुए या निरर्हित किए जाने पर बैठने और मत देने के लिए शास्ति' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 194
Part VI

विधान-मंडलों के सदनों की तथा उनके सदस्यों और समितियों की शक्तियां, विशेषाधिकार आदि

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 194 'विधान-मंडलों के सदनों की तथा उनके सदस्यों और समितियों की शक्तियां, विशेषाधिकार आदि' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 195
Part VI

सदस्यों के वेतन और भत्ते

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 195 'सदस्यों के वेतन और भत्ते' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 196
Part VI

विधेयकों के पुरःस्थापन और पारित किए जाने के संबंध में उपबंध

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 196 'विधेयकों के पुरःस्थापन और पारित किए जाने के संबंध में उपबंध' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 197
Part VI

धन विधेयकों से भिन्न विधेयकों के बारे में विधान परिषद की शक्तियों पर निर्बंधन

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 197 'धन विधेयकों से भिन्न विधेयकों के बारे में विधान परिषद की शक्तियों पर निर्बंधन' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 198
Part VI

धन विधेयकों के संबंध में विशेष प्रक्रिया

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 198 'धन विधेयकों के संबंध में विशेष प्रक्रिया' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 199
Part VI

राज्य विधान-मंडल में "धन विधेयक" की परिभाषा

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 199 'राज्य विधान-मंडल में "धन विधेयक" की परिभाषा' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 200
Part VI

विधेयकों पर अनुमति (राज्यपाल की स्वीकृति)

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 200 'विधेयकों पर अनुमति (राज्यपाल की स्वीकृति)' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 201
Part VI

विचार के लिए आरक्षित विधेयक (राष्ट्रपति के विचारार्थ)

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 201 'विचार के लिए आरक्षित विधेयक (राष्ट्रपति के विचारार्थ)' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 202
Part VI

वार्षिक वित्तीय विवरण (राज्य बजट)

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 202 'वार्षिक वित्तीय विवरण (राज्य बजट)' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 203
Part VI

विधान-मंडल में प्राक्कलनों के संबंध में प्रक्रिया

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 203 'विधान-मंडल में प्राक्कलनों के संबंध में प्रक्रिया' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 204
Part VI

विनियोग विधेयक (Appropriation Bills)

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 204 'विनियोग विधेयक (Appropriation Bills)' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 205
Part VI

अनुपूरक, अतिरिक्त या अधिक अनुदान

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 205 'अनुपूरक, अतिरिक्त या अधिक अनुदान' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 206
Part VI

लेखानुदान, प्रत्ययानुदान और अपवादानुदान

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 206 'लेखानुदान, प्रत्ययानुदान और अपवादानुदान' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 207
Part VI

वित्त विधेयकों के बारे में विशेष उपबंध

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 207 'वित्त विधेयकों के बारे में विशेष उपबंध' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 208
Part VI

प्रक्रिया के नियम

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 208 'प्रक्रिया के नियम' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 209
Part VI

राज्य के विधान-मंडल में वित्तीय कार्य संबंधी प्रक्रिया का विधि द्वारा विनियमन

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 209 'राज्य के विधान-मंडल में वित्तीय कार्य संबंधी प्रक्रिया का विधि द्वारा विनियमन' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 210
Part VI

विधान-मंडल में प्रयोग की जाने वाली भाषा

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 210 'विधान-मंडल में प्रयोग की जाने वाली भाषा' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 211
Part VI

विधान-मंडल में चर्चा पर निर्बंधन

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 211 'विधान-मंडल में चर्चा पर निर्बंधन' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 212
Part VI

न्यायालयों द्वारा विधान-मंडल की कार्यवाहियों की जांच न किया जाना

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 212 'न्यायालयों द्वारा विधान-मंडल की कार्यवाहियों की जांच न किया जाना' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 213
Part VI

विधान-मंडल के विश्रांतिकाल में अध्यादेश प्रख्यापित करने की राज्यपाल की शक्ति

संविधान के Part VI में स्थित अनुच्छेद 213 'विधान-मंडल के विश्रांतिकाल में अध्यादेश प्रख्यापित करने की राज्यपाल की शक्ति' के संबंध में स्पष्ट संवैधानिक नियम और प्रक्रियात्मक सीमाएं निर्धारित करता है।

अनुच्छेद 214
Part VI

राज्यों के लिए उच्च न्यायालय (High Courts)

संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 214 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'राज्यों के लिए उच्च न्यायालय (High Courts)' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 215
Part VI

उच्च न्यायालयों का अभिलेख न्यायालय होना

संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 215 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'उच्च न्यायालयों का अभिलेख न्यायालय होना' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 216
Part VI

उच्च न्यायालयों का गठन

संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 216 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'उच्च न्यायालयों का गठन' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 217
Part VI

उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति और उसके पद की शर्तें

संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 217 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति और उसके पद की शर्तें' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 218
Part VI

उच्चतम न्यायालय से संबंधित कुछ उपबंधों का उच्च न्यायालयों को लागू होना

संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 218 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'उच्चतम न्यायालय से संबंधित कुछ उपबंधों का उच्च न्यायालयों को लागू होना' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 219
Part VI

उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान

संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 219 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 220
Part VI

स्थायी न्यायाधीश रहने के पश्चात् विधि-व्यवसाय (वकालत) पर निर्बंधन

संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 220 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'स्थायी न्यायाधीश रहने के पश्चात् विधि-व्यवसाय (वकालत) पर निर्बंधन' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 221
Part VI

न्यायाधीशों के वेतन आदि

संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 221 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'न्यायाधीशों के वेतन आदि' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 222
Part VI

किसी न्यायाधीश का एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय को अंतरण (तबादला)

संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 222 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'किसी न्यायाधीश का एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय को अंतरण (तबादला)' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 223
Part VI

कार्यकारी मुख्य न्यायमूर्ति की नियुक्ति

संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 223 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'कार्यकारी मुख्य न्यायमूर्ति की नियुक्ति' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 224
Part VI

अपर और कार्यकारी न्यायाधीशों की नियुक्ति

संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 224 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'अपर और कार्यकारी न्यायाधीशों की नियुक्ति' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 224A
Part VI

उच्च न्यायालयों की बैठकों में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति

संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 224A राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'उच्च न्यायालयों की बैठकों में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 225
Part VI

विद्यमान उच्च न्यायालयों की अधिकारिता

संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 225 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'विद्यमान उच्च न्यायालयों की अधिकारिता' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 226
Part VI

कुछ रिट निकालने की उच्च न्यायालय की शक्ति (मौलिक एवं विधिक अधिकारों की रक्षा)

अनुच्छेद 226 आम भारतीय नागरिक के दैनिक जीवन में सबसे अधिक काम आने वाला संवैधानिक हथियार है, क्योंकि इसके लिए आपको दिल्ली (सुप्रीम कोर्ट) जाने की जरूरत नहीं है—आप अपने ही राज्य के हाईकोर्ट में तुरंत याचिका दायर कर सकते हैं। इसके तहत हाईकोर्ट अपने राज्य के भीतर किसी भी पुलिस अधिकारी, कलेक्टर, नगर निगम, बिजली बोर्ड या सरकारी विभाग के विरुद्ध 5 रिट (बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण और अधिकार-पृच्छा) या निर्देश जारी कर सकता है। सबसे रोचक तथ्य यह है कि कानूनी दायरे के मामले में अनुच्छेद 226 की शक्ति अनुच्छेद 32 से भी अधिक व्यापक है: जहां सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 32 के तहत केवल 'मौलिक अधिकारों' के उल्लंघन पर ही रिट जारी करता है, वहीं हाईकोर्ट अनुच्छेद 226 के तहत मौलिक अधिकारों के साथ-साथ 'किसी भी अन्य उद्देश्य के लिए' (For any other purpose)—जैसे संपत्ति का अधिकार (अनुच्छेद 300A), अवैध बुलडोजर कार्रवाई, नौकरी/पेंशन विवाद, गलत टैक्स नोटिस या फर्जी FIR—पर भी तुरंत रिट और स्टे ऑर्डर दे सकता है।

अनुच्छेद 227
Part VI

सभी न्यायालयों के अधीक्षण की उच्च न्यायालय की शक्ति

संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 227 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'सभी न्यायालयों के अधीक्षण की उच्च न्यायालय की शक्ति' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 228
Part VI

कुछ मामलों का उच्च न्यायालय को अंतरण

संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 228 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'कुछ मामलों का उच्च न्यायालय को अंतरण' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 229
Part VI

उच्च न्यायालयों के अधिकारी और सेवक तथा व्यय

संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 229 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'उच्च न्यायालयों के अधिकारी और सेवक तथा व्यय' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 230
Part VI

उच्च न्यायालयों की अधिकारिता का संघ राज्यक्षेत्रों पर विस्तार

संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 230 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'उच्च न्यायालयों की अधिकारिता का संघ राज्यक्षेत्रों पर विस्तार' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 231
Part VI

दो या अधिक राज्यों के लिए एक ही उच्च न्यायालय की स्थापना

संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 231 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'दो या अधिक राज्यों के लिए एक ही उच्च न्यायालय की स्थापना' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 233
Part VI

जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति

संविधान के भाग VI के अध्याय VI (अधीनस्थ न्यायालय) का अनुच्छेद 233 'जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति' का प्रावधान करता है। यह जिला जजों और निचली अदालतों के न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति, पदोन्नति और नियंत्रण को राज्य सरकार की राजनीति से अलग रखकर सीधे उच्च न्यायालय (High Court) के अधीन रखता है।

अनुच्छेद 233A
Part VI

कुछ जिला न्यायाधीशों की नियुक्तियों का और उनके द्वारा दिए गए निर्णयों आदि का विधिमान्यकरण

संविधान के भाग VI के अध्याय VI (अधीनस्थ न्यायालय) का अनुच्छेद 233A 'कुछ जिला न्यायाधीशों की नियुक्तियों का और उनके द्वारा दिए गए निर्णयों आदि का विधिमान्यकरण' का प्रावधान करता है। यह जिला जजों और निचली अदालतों के न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति, पदोन्नति और नियंत्रण को राज्य सरकार की राजनीति से अलग रखकर सीधे उच्च न्यायालय (High Court) के अधीन रखता है।

अनुच्छेद 234
Part VI

न्यायिक सेवा में जिला न्यायाधीशों से भिन्न व्यक्तियों की भर्ती

संविधान के भाग VI के अध्याय VI (अधीनस्थ न्यायालय) का अनुच्छेद 234 'न्यायिक सेवा में जिला न्यायाधीशों से भिन्न व्यक्तियों की भर्ती' का प्रावधान करता है। यह जिला जजों और निचली अदालतों के न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति, पदोन्नति और नियंत्रण को राज्य सरकार की राजनीति से अलग रखकर सीधे उच्च न्यायालय (High Court) के अधीन रखता है।

अनुच्छेद 235
Part VI

अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण

संविधान के भाग VI के अध्याय VI (अधीनस्थ न्यायालय) का अनुच्छेद 235 'अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण' का प्रावधान करता है। यह जिला जजों और निचली अदालतों के न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति, पदोन्नति और नियंत्रण को राज्य सरकार की राजनीति से अलग रखकर सीधे उच्च न्यायालय (High Court) के अधीन रखता है।

अनुच्छेद 236
Part VI

निर्वचन (न्यायिक सेवा संबंधी परिभाषाएं)

संविधान के भाग VI के अध्याय VI (अधीनस्थ न्यायालय) का अनुच्छेद 236 'निर्वचन (न्यायिक सेवा संबंधी परिभाषाएं)' का प्रावधान करता है। यह जिला जजों और निचली अदालतों के न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति, पदोन्नति और नियंत्रण को राज्य सरकार की राजनीति से अलग रखकर सीधे उच्च न्यायालय (High Court) के अधीन रखता है।

अनुच्छेद 237
Part VI

कुछ वर्ग या वर्गों के मजिस्ट्रेटों पर इस अध्याय के उपबंधों का लागू होना

संविधान के भाग VI के अध्याय VI (अधीनस्थ न्यायालय) का अनुच्छेद 237 'कुछ वर्ग या वर्गों के मजिस्ट्रेटों पर इस अध्याय के उपबंधों का लागू होना' का प्रावधान करता है। यह जिला जजों और निचली अदालतों के न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति, पदोन्नति और नियंत्रण को राज्य सरकार की राजनीति से अलग रखकर सीधे उच्च न्यायालय (High Court) के अधीन रखता है।

Part VI (87 अनुच्छेदs)
सार्वजनिक डोमेन (Public Domain) एवं वैधानिक प्रामाणिकता सूचना

भारतीय प्रतिलिप्यधिकार अधिनियम (Copyright Act), 1957 की धारा 52(1)(q) के अंतर्गत भारत का संविधान, संसदीय अधिनियम, राजपत्र अधिसूचनाएं तथा उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों के निर्णय सार्वजनिक डोमेन (Public Domain) में हैं। यह पाठ विधायी विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय, भारत सरकार (India Code) के आधिकारिक अभिलेखों पर आधारित है।

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