संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 264 'निर्वचन (भाग 12 वित्त संबंधी परिभाषा)' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
अनुच्छेद 265 केवल एक पंक्ति में नागरिकों की जेब और कमाई की सबसे बड़ी रक्षा करता है: 'विधि के प्राधिकार के बिना न तो कोई कर उद्गृहीत (Levied) किया जाएगा और न ही संग्रहीत (Collected) किया जाएगा।' यहां 'विधि' का अर्थ संसद या राज्य विधानसभा द्वारा पारित कानून है—केवल किसी अफसर का आदेश, विभागीय सर्कुलर या नगर निगम का मनमाना नोटिस नहीं।
यदि कोई सरकारी विभाग, टोल एजेंसी, पंचायत या अधिकारी ऐसा कोई टैक्स, सेस (Cess), शुल्क या चालान वसूलता है जिसके पीछे कोई वैध कानून नहीं है, तो वह वसूली अनुच्छेद 265 के तहत पूरी तरह असंवैधानिक है और नागरिक को वह पैसा ब्याज सहित वापस पाने (Refund) का अधिकार है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 266 'भारत और राज्यों की संचित निधियां (Consolidated Funds) और लोक लेखे' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 267 'आकस्मिकता निधि (Contingency Fund)' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 268 'संघ द्वारा उद्गृहीत किए जाने वाले किंतु राज्यों द्वारा संगृहीत और विनियोजित किए जाने वाले शुल्क' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 268A 'संघ द्वारा उद्गृहीत सेवा कर (101वें संशोधन द्वारा निरसित)' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 269 'संघ द्वारा उद्गृहीत और संगृहीत किंतु राज्यों को सौंपे जाने वाले कर' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 269A 'अंतरराज्यिक व्यापार या वाणिज्य के अनुक्रम में माल और सेवा कर (IGST) का उद्ग्रहण और संग्रहण' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 270 'उद्गृहीत कर और उनका संघ तथा राज्यों के बीच वितरण' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 271 'कुछ शुल्कों और करों पर संघ के प्रयोजनों के लिए अधिभार (Surcharge)' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 273 'जूट पर और जूट उत्पादों पर निर्यात शुल्क के स्थान पर अनुदान' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 274 'ऐसे कराधान पर जिसमें राज्य हितबद्ध हैं, प्रभाव डालने वाले विधेयकों के लिए राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश की अपेक्षा' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 275 'कुछ राज्यों को संघ से अनुदान' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 276 'वृत्तियों, व्यापारों, आजीविकाओं और नियोजनों पर कर (Professional Tax)' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 277 'व्यावृत्ति (Savings)' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 279 '"शुद्ध आगम" (Net Proceeds) आदि की गणना' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 280 'वित्त आयोग (Finance Commission)' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 281 'वित्त आयोग की सिफारिशें' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 282 'संघ या राज्य द्वारा अपने राजस्व से किए जाने वाले व्यय' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 283 'संचित निधियों, आकस्मिकता निधियों और लोक लेखाओं में जमा धनराशियों की अभिरक्षा आदि' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 284 'लोक सेवकों और न्यायालयों द्वारा प्राप्त वादकर्ताओं की जमा राशियों और अन्य धनराशियों की अभिरक्षा' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 285 'संघ की संपत्ति को राज्य के कराधान से छूट' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 286 'माल के क्रय या विक्रय पर कर के अधिरोपण के बारे में निर्बंधन' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 287 'विद्युत् पर करों से छूट' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 288 'जल या विद्युत् के संबंध में कुछ दशाओं में राज्यों द्वारा कराधान से छूट' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 289 'राज्यों की संपत्ति और आय को संघ के कराधान से छूट' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 290 'कुछ व्ययों और पेंशनों के संबंध में समायोजन' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 290A 'कुछ देवस्वम् निधियों को वार्षिक संदाय' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 292 'भारत सरकार द्वारा उधार लेना' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 293 'राज्यों द्वारा उधार लेना' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 294 'कुछ दशाओं में संपत्ति, आस्तियों, अधिकारों, दायित्वों और बाध्यताओं का उत्तराधिकार' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 295 'अन्य दशाओं में संपत्ति, आस्तियों, अधिकारों, दायित्वों और बाध्यताओं का उत्तराधिकार' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 296 'राजगामी, व्यपगत या स्वामीहीन होने से प्रोद्भूत संपत्ति' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 297 'राज्यक्षेत्रीय सागर-खंड या महाद्वीपीय मग्नतट भूमि में स्थित मूल्यवान चीजों और अनन्य आर्थिक क्षेत्र के संपत्ति स्रोतों का संघ में निहित होना' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 298 'व्यापार करने आदि की सरकार की शक्ति' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 299 'सरकारी संविदाएं (Contracts)' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 300 'वाद और कार्यवाहियां (Suits and Proceedings)' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
44वें संविधान संशोधन अधिनियम (1978) द्वारा संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों (अनुच्छेद 19(1)(f) व 31) की सूची से हटाकर अनुच्छेद 300A के तहत एक मजबूत 'संवैधानिक अधिकार' बनाया गया। सुप्रीम कोर्ट ने 'विद्या देवी (2020)' और 'कोलकाता नगर निगम बनाम बिमल कुमार शाह (2024)' में स्पष्ट किया है कि संपत्ति का अधिकार एक अमूल्य मानवाधिकार (Human Right) भी है।
अनुच्छेद 300A में 'संपत्ति' का अर्थ केवल जमीन, मकान या दुकान ही नहीं है, बल्कि इसमें आपकी गाड़ी/बाइक, बैंक जमा राशि और कर्मचारियों की पेंशन व ग्रेच्युटी भी शामिल है (जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव केस, 2013)। नवंबर 2024 के ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने 'बुलडोजर जस्टिस' पर पूर्ण प्रतिबंध लगाते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के मात्र आरोपी होने पर बिना कानूनी प्रक्रिया और नोटिस के उसका घर गिराना अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 300A का घोर उल्लंघन है।